लेखक परिचय

प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

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-लक्ष्मी जयसवाल-

अजनबी से मुलाकात,
जाने क्या हुआ उस दिन कि,
राहों में देखकर कर उनको,
दिल ठहर सा गया।
जाने वो अजनबी मुझ पर,
क्या जादू कर गया।
जुबां तो ख़ामोश थी पर,
आंखें हाल-ए-दिल उसका,
मुझसे बयां कर गया।
जाने क्या था उन आंखों में,
कि उनकी गहराई में,
दिल मेरा उतर गया।
आंखों की बातें आंखें ही जाने,
पर मुझको तो जैसे कोई,
हमसफ़र ही मिल गया।
जाने क्या हुआ उस दिन कि,
राहों में देखकर कर उनको,
दिल ठहर सा गया।
अजनबी से हुई जो यूं मुलाकात,
लगता है ऐसा कि जीवन,
मेरा पूरा बदल गया।
मेरी आंखों में बसी तस्वीर में,
जैसे वो रंग ढेर सारे,
अपने प्यार के भर गया।
जीवन में रंग ही नहीं भरे,
आने से उनके मेरे जीवन का,
हर एक पल संवर गया।
जाने क्या हुआ उस दिन कि,
राहों में देखकर कर उनको,
दिल ठहर सा गया।

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