लेखक परिचय

पंडित दयानंद शास्त्री

पंडित दयानंद शास्त्री

ज्योतिष-वास्तु सलाहकार, राष्ट्रीय महासचिव-भगवान परशुराम राष्ट्रीय पंडित परिषद्, मोब. 09669290067 मध्य प्रदेश

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मंत्र जप,व्रत एवं ग्रह सम्बन्धी वस्तुओं के दान से ग्रह जनित दोषों का निवारण —-

ग्रहों की शुभता और अशुभता जन्म कुंडली में भावगत स्थित ग्रहों के अनुसार होती है| जन्म कुंडली में भावगत ग्रह शुभ स्थिति में हैं, तो व्यक्ति को परिणाम भी अच्छे मिलते हैं| यदि अशुभ स्थिति में हैं, तो बनते हुए काम भी बिगड़ जायेंगे| प्रतिकूल ग्रहों को अनुकूल बनाने के लिए ग्रह सम्बन्धी मंत्र का जप या व्रत करें| यह उपाय इतने सरल और सुगम हैं, जिन्हें कोई भी साधारण व्यक्ति आसानी से कर सकता है|

——सूर्य के लिए —–– सूर्य की प्रतिकूलता दूर करने के लिए रविवार का व्रत रखें| भोजन नमक रहित करें| सूर्य सम्बन्धी वस्तुओं- गुड, गेहूं, या ताम्बे का दान किसी औसत उम्र वाले व्यक्ति को दें| दान रविवार को सांयकाल करें| यदि चाहें तो गाय या बछड़े को गुड-गेहूं खिलाएं| अपने पिताजी की सेवा करें| यह नहीं कर सकें तो प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करके आदित्य ह्रदयस्त्रोत का पाठ करें|

——-चंद्रमा के लिए —-– यदि कुंडली में चंद्रमा, प्रतिकूल चल रहा हो तो सोमवार का उपवास शुरू कर दें| अपनी माँ की सेवा करें| सोमवार को शाम किसी युवती को शंख, सफ़ेद वस्त्र, दूध, चावल व चांदी का निरंतर दान करते रहें| गाय को सोमवार को सना हुआ आता खिलाएं| चंद्रमा यदि दोषप्रद हो तो व्यक्ति दूध का प्रयोग नहीं करें|

——मंगल के लिए —-– मंगल की प्रतिकूलता से बचाव के लिए मंगलवार का व्रत रखें| अपने छोटे भाई-बहन का विशेष ख्याल रखें| मंगल की वस्तुओं – लाल कपडा, गुड, मसूर की दाल, स्वर्ण, ताम्बा, तंदूर पर बनी मीठी रोटी का यथा-शक्ति दान करते रहें| आवेश पर हमेशा नियंत्रण रखने का प्रयास करें| हिंसात्मक कार्य से दूर रहें|

——बुध के लिए —-– बुध दोष निवारणार्थ बुधवार का उपवास करें| इस दिन उबले हुए मूंग गरीब व्यक्ति को खिलाएं| गणेशजी की अभ्यर्थना दूर्वा से करें| हरे वस्त्र, मूंग की दाल का दान बुधवार मध्याह्न करें| बुध के दोष दूर करने के लिए अपने वजन के बराबर हरी घांस गायों को खिलाएं| बहिन व बेटियों का हमेशा सम्मान करें|

——गुरु के लिए—- – देवगुरु बृहस्पति यदि दशावाश या गोचरवश प्रतिकूल परिणाम दे रहे हों तो गुरूवार का उपवास करें| इसके अलावा केले की पूजा, पीपल में नित्य जल चढ़ाना, गुरुजनों व विद्वान व्यक्तियों का सम्मान करने से भी गुरु की प्रतिकूलता दूर होती है|

——शुक्र के लिए —-– शुक्र की प्रतिकूलता दूर करने के लिए शुक्रवार का व्रत किसी शुक्लपक्ष से प्रारम्भ करें| फैशन सम्बन्धी वस्तुओं इत्र, फुलेल, डियोडरेंट इत्यादि का प्रयोग ना करें| रेशमी वस्त्र, इत्र, चीनी, कर्पूर, चन्दन, सुगन्धित तेल इत्यादि का दान किसी ब्राह्मन युवती को दें|

——–शनि / राहू- केतु के लिए —– शनि राहू – केतु मुख्यतया जप-तप की बजाय दान दक्षिणा से ज्यादा प्रसन्न होते हैं| इनके द्वारा प्रदत्त दोष निवारणार्थ शनिवार का व्रत रखें| सुबह पीपल को जल से सींचे व सांयकाल गृत का दीपक जलाएं| काले वस्त्र व काली उड़द, लौह, तिल, सरसों का तेल, गाय आदि का दान करें|

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