लेखक परिचय

राजेश कश्यप

राजेश कश्यप

स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं समीक्षक।

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 राजेश कश्यप

हरियाणा में बलात्कारों का अंतहीन सिलसिला राष्ट्रीय सुर्खियों में है। इस शर्मनाक सिलसिले को रोकने के लिए दिए जा रहे सुझाव भी राष्ट्रीय सुर्खियों है। इन दोनों ही मामलों में राष्ट्रीय स्तर पर भारी निंदा और थू-थू हो रही है। एक माह में एक बाद एक दो दर्जन से अधिक नाबालिग युवतियों व विवाहित महिलाओं के साथ दुष्मर्म की घटनाएं घटना और पुलिस पर लापरवाह व संवेदनहीन बने रहने के आरोप लगना निःसन्देह हरियाणा की भूपेन्द्र सिंह हुड्डा सरकार के लिए बेहद शर्म का विषय है। इसके साथ ही सबसे बड़ा शर्म का विषय यह भी रहा कि बलात्कार की इन घटनाओं को रोकने के लिए हरियाणा की खापों ने जो उपाय सुझाये और जिस तरह विपक्ष के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला ने अपने वोट बैंक को मजबूत बनाने के लिए जिस तरह तत्काल खापों के सुर में सुर मिलाया, वे न केवल गैर-कानूनी हैं, बल्कि अनैतिक व असामाजिक भी हैं।

बलात्कारों के इस अंतहीन सिलसिले ने कई सुलगते सवाल पैदा किए हैं। सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि आखिर इस शर्मनाक सिलसिले को रोकने में हरियाणा की कांग्रेस सरकार सफल क्यों नहीं हो पा रही है? लगभग सभी मामलों में पुलिस पर भारी लापरवाही और ढ़िलाई के आरोप लगे हैं, ऐसे में मुख्यमंत्री खामोश क्यों हैं? वे सिर्फ कानून अपना काम करेगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, जैसा रटा-रटाया जुमला ही जुबान पर क्यों रखे हुए हैं? क्या उन्हंे अपनी इस प्रचलित शैली को बदलने की आवश्यकता नहीं है? प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष फूलचंद मुलाना और शिक्षा व समाज कल्याण मंत्री श्रीमती गीता भुक्कल द्वारा इन बलात्कारों के पीछे विपक्षी लोगों का हाथ बताना, क्या गैर-जिम्मेदाराना और हास्यास्पद आचरण नहीं कहा जाएगा? सरकार के इन आरोपों के जवाब में विपक्ष स्पष्ट कह चुका है कि सरकार दोषी विपक्ष के लोगों के नाम उजागर करे तो फिर प्रदेश सरकार क्यों खामोश है? यदि सरकार को लगता है कि ये बलात्कार विपक्षी नेता जान बुझकर कर रहे हैं तो फिर ऐसे लोगों का पर्दाफाश क्यों नहीं कर रही है? यदि विपक्ष पर लगाए इल्जाम झूठे हैं तो फिर ऐसी ओछी हरकत क्यों की जा रही है?

9 सितम्बर से लेकर 9 अक्तूबर तक एक दर्जन से अधिक बलात्कार के मामलों के बाद कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी ने हरियाणा का दौरा किया और जीन्द जिले के सच्चा खेड़ा गाँव में एक पीड़ित दलित परिवार को ढ़ांढ़स बंधाया और सांत्वना दी। इस दलित परिवार की एक नाबालिग युवती से 6 अक्तूबर को दो पड़ौसी युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। घटना से आहत युवती ने मिट्टी का तेल छिड़कर आग लगा ली। युवती 95 फीसदी झुलस गई। उसे आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया तो वहां डॉक्टरांे ने बीपीएल कार्ड व अन्य कागजातों के बिना ईलाज करने से मना कर दिया। घटना से बदहवाश परिवार को ये कागजात उपलब्ध करवाने में कथित तौरपर लगभग चालीस मिनट लग गए। इतनी देर बाद शुरू हुए इलाज को कोई फायदा नहीं हुआ और युवती दम तोड़ गई। इस घटनाक्रम से भी कई सुलगते सवाल खड़े होते हैं। क्या सचमुच हस्पताल के डॉक्टर इस हद तक संवेदनहीन हो चुके हैं कि वे कागजों के अभाव में तड़पते मरीज का इलाज करने से मुंह मोड़ लें? इस तरह का व्यवहार करने वाले हस्पताल प्रशासन पर जिला प्रशासन और सरकार द्वारा स्वयं संज्ञान लेकर उचित कार्यवाही क्यों नहीं की गई?

सच्चा खेड़ा बलात्कार प्रकरण पर हस्पताल प्रशासन ही नहीं कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गाँधी का सहानुभूति जताने गाँव में पहुंचना भी कई गंभीर सवाल पैदा करता है। आखिर, क्यों श्रीमती गांधी केवल सच्चा खेड़ा के दलित परिवार को ही ढ़ांढ़स बंधवाकर दिल्ली लौट गईं? क्या यह सिर्फ दलित समुदाय की सहानुभूति बटोरने के लिए ही ड्रामा रचा गया? वे बलात्कार का शिकार हुई अन्य बिरादरियों की युवतियों व उनके परिवारों को ढ़ांढ़स बंधवाने क्यों नहीं पहुंची? क्या उन्हें दलित और एक सामान्य बिरादरी की इज्जत में कोई अंतर नजर आता है? यदि नहीं तो फिर वे अन्य जगहों पर क्यों नहीं गईं? क्या उनके दिल में सच्चे अर्थों में बलात्कार पीड़िताओं और परिवारों के प्रति हमदर्दी थी? यदि हाँ तो फिर उन्होंने प्रदेश सरकार की खिंचाई करने की बजाय उसका बचाव यह कहते हुए क्यों किया कि बलात्कार की घटनाएं तो देशभर में हो रही हैं, यहां कोई नई घटना नहीं है? यदि उन्हें ऐसी घटनाएं सामान्य लगती हैं तो फिर वे सच्चा खेड़ा गाँव किस मकसद से पहुंची? उनके इस बयान का कितना गहरा विपरीत असर पड़ा, क्या इसका उन्हें तनिक भी अहसास है?

योगगुरू बाबा रामदेव द्वारा उठाए गए सवाल कि यदि उनकी स्वयं की बेटी के साथ बलात्कार हुआ होता तो क्या तब भी वे इसी प्रकार का बयान देंती, पर पूरी कांग्रेस सरकार क्यों तिलमिला गई? बाबा रामदेव ने ऐसा कहकर कौन सा गुनाह कर दिया? उन्होंने कड़वा सच ही तो कहा था? बाबा रामदेव के प्रत्युत्तर में कांग्रेस की वरिष्ठ केन्द्रीय महिला मंत्री का यह कहना कि वह इतना क्यों संवेदनशील हो रहे हैं? उनकीं कौन सी बेटी है? क्या इस तरह का प्रत्युत्तर किसी को शोभा देता है? लालू प्रसाद यादव ने भी बाबा रामदेव के इस सवाल के जवाब में अत्यन्त गैर-जिम्मेदाराना और आपत्तिजनक बयान दिया। क्या इन सब जनप्रतिनिधियों को आम आदमी की बहू-बेटी के प्रति कोई सम्मान नहीं है? क्या उनकी नजर में आम युवती व महिला की कोई इज्जत नहीं होती? क्या सिर्फ नेताओं की बहू-बेटियों के ही इज्जत लगी हुई है? सबसे बड़ी विडंबना का विषय है कि एक महिला राजनेनियां होकर भी संवेदना शून्य होकर बलात्कार मामलों में अनैतिक, असैमाजिक व गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां की गईं। आखिर, एक महिला होकर भी वह दूसरी महिला के दर्द को क्यों नहीं महसूस कर पा रही हैं?

यह भी बेहद विडम्बना का विषय है कि इन बलात्कार की घटनाओं को सिर्फ जाति के नजरिए से देखा जा रहा है। दलित के नाम पर ही बलात्कारों को सुर्खियां मिलती हैं, ऐसा क्यों? अन्य बिरादरी में घटी बलात्कार की घटनाओं को भी बराबर महत्व क्यांे नहीं दिया जाता? दलित युवकों द्वारा किए गए बलात्कारों में जाति का उल्लेख क्यों नहीं होता है? क्या यह सब दलितों के वोट बैंक के लिए होता है? यदि हाँ तो निश्चित तौरपर इससे बढ़कर इंसानियत व लोकतंत्र के लिए शर्म का विषय नहीं हो सकता है। आखिर हम यह क्यों भूल जाते हैं कि हर जाति-समुदाय की बहन-बेटी की इज्जत समान होती है और किसी भी बलात्कारी व दुष्कर्मी की कोई जाति नहीं होती है। मायावती ने महारैली के जरिये दलितों पर अत्याचार व बलात्कार के नजरिए से हरियाणा प्रदेश को अपराध प्रदेश की संज्ञा दी। क्या वे अपने पिछले कार्यकाल को भूल गईं, जब उनकीं नाक के नीचे भी दलित युवतियों व महिलाओं के साथ बलात्कार व हत्याओं का एक लंबा सिलसिला चला था और जवाब में उन्होंने एकदम गैर-जिम्मेदाराना बयान देते हुए कहा था कि उनसे अधिक तो दिल्ली में बलात्कार होते हैं। ऐसे में क्या उन्हें इस तरह की संज्ञा देना शोभा देता है?

बलात्कारों के इस शर्मनाक अंतहीन सिलसिले पर अंकुश लगाने के लिए हरियाणा की कुख्यात खाप पंचायतों ने सुझाव दिया कि लड़कियों की शादी 15 वर्ष की उम्र में कर देनी चाहिए। क्या इससे अधिक दिमागी दिवालिएपन की अन्य कोई मिसाल हो सकती है? क्या पाँच-छह वर्ष की मासूम बच्चियों और शादीशुदा महिलाओं के साथ बलात्कार नहीं होते हैं? ऐसे में 15 साल की उम्र में लड़की की शादी करने से बलात्कारों पर कैसे अंकुश लगेगा? कमाल की बात है कि यही खाप वाले जब कोई परिपक्व और कानून के दायरे में रहकर आपसी सहमति से शादी कर लेते हैं तो उनके पीछे हाथ धोकर पड़ जाते हैं और सामाजिक बहिष्कार व गाँव निकाला जैसी भयंकर सजाएं तक दे डालते हैं। लेकिन, वे बलात्कारियों को इस तरह की सजा सुनाने की स्वप्न में भी सोचते हैं। आखिर खापों का यह दोगलापन क्यो है? यदि खापें बलात्कार जैसा कुकर्म व दरिन्दगी भरा खेल खेलने वाले लोगों को गाँव, जिला व प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश छोड़ने का आदेश भी दें तो क्या किसी तरह का कोई सामाजिक विरोध होगा? बिल्कुल नहीं, उल्टे उनके इस फैसले का स्वागत होगा।

खापों के साथ-साथ विपक्षी नेता व पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला द्वारा मामले को भुनाने और कांग्रेस सरकार को घेरने के लिए विवेकहीनता का परिचय देते हुए खापों द्वारा लड़कियों की शादी की उम्र घटाकर 15 वर्ष करने के सुझावों पर सहमति देना, वास्तव में राजनीतिक गिरावट का आखिरी पायदान कहा जाना चाहिए। खाप नेताओं को खुश करने और अपना वोट बैंक मजबूत करने के लिए एक धुरन्धर नेता द्वारा इस तरह की विवेकहीनता का परिचय देना, बेहद विडम्बना का विषय है। बलात्कार के मामलों में प्रदेश की कांग्रेस सरकार की निन्दा चरम है और दूसरी तरफ उसी के मंत्री गैर-जिम्मेदाराना बयान देकर स्वयं विवादों को आमंत्रित कर रहे हैं और अपने दिमागी दिवालिएपन का ढ़िंढ़ोरा पीट रहे हैं। फूलचन्द मुलाना और श्रीमती गीता भुक्कल के बाद अब हिसार कांग्रेस के जिला प्रवक्ता धर्मबीर गोयत ने यह कहकर सनसनी फैला दी कि 90 फीसदी बलात्कार आपसी सहमती से होते हैं। क्या इस तरह का बयान जले पर नमक छिड़कने के समान नहीं है? क्या इस तरह के नेताओं को बलात्कार की टीस का जरा भी अहसास है? इसके साथ ही राज्य महिला आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा बलात्कार के मामलों में ढ़ूलमूल रवैया और सरकार को सख्त कार्यवाही करने की मांग करने जैसी औपचारिकता पूरी करने की प्रवृति भी बेहद अफसोसजनक है। ये महिला आयोग कठपुतली की तरह काम कर रहे हैं और अपने आकाओं के इशारों पर ही हिलडुल रहे हैं, जोकि देशी की आधी आबादी के साथ सरासर धोखा और विश्वासघात है।

 

बलात्कार को किसी राजनीतिक अथवा जातिगत या फिर साम्प्रदायिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से एक चुनौती के रूप में लेने की आवश्यकता है। इस दरिन्दगी भरे खेल के खात्मे के लिए सार्थक बहस और विचार-मन्थन होना चाहिए। यह कहने की आवश्यकता ही नहीं है कि बलात्कारियों को सबक सिखाने के लिए बेहद सख्त कानून बनाने और उसे अमल में लाने की कड़ी आवश्यकता है। इसके अलावा पुलिस द्वारा ऐसे संवेदनशील मामलों में सुस्ती बरते जाने की प्रवृति का तत्काल निराकरण करने की भी आवश्यकता है। इसके साथ ही हमंे ऐसी सामाजिक संरचना तैयार करनी होगी, जिसके तहत बलात्कारी अपने ही परिवार, मोहल्ले, गाँव, शहर, जाति व समुदाय से स्वतः ही बहिष्कृत हो जाए और उसके सलाखों के पीछे पहुंचने में कोई भी सहायक न बने। यदि इस तरह के उपाय यथाशीघ्र नहीं किए गए तो देश में लैंगिक असमानता बेकाबू हो जाएगी और हमारे लिए अभिशाप बन जाएगी।

 

हरियाणा में बलात्कार का सिलसिला

9 सितम्बर : किसार के गाँव डाबड़ा में दलित युवती को 12 लोगों ने बनाया हवस का शिकार। पुलिस द्वारा कार्यवाही ने करने पर दुःखी होकर पिता ने की खुदकुशी।

 

21 सितम्बर : जीन्द के पिल्लूखेड़ा में परिजनों को बंधक बनाकर विवाहिता से बलात्कार किया और एमएमएस भी बनाया।

 

26 सितम्बर : गोहाना में दुकान पर सामान लेने गई ग्यारहवीं की छात्रा के साथ गोदाम में चार लोगों द्वारा सामूहिक बलात्कार।

 

: पानीपत के चांदनी बाग में किशोरी से दुष्कर्म।

 

29 सितम्बर : भिवानी के सांडवा में आठवीं की छात्रा को अगुवा करके बलात्कार किया।

 

2 अक्तूबर : रोहतक के कच्चीगढ़ी मोहल्ले में 15 वर्षीय किशोरी को तीन युवकों ने अगवा करके सामूहिक दुष्कर्म किया।

 

: नरवाना में मंदबुद्धि दलित महिला के साथ बलात्कार।

 

3 अक्तूबर : रोहतक के शास्त्रीनगर कालोनी में 11 साल की बच्ची से पड़ौसी ने किया दुष्कर्म।

 

: करनाल के घरौण्डा कस्बे के गाँव में शादी का झांसा देकर युवती से बलात्कार।: गोहाना के बनवासा गाँव में एक विवाहिता के साथ खेतों में चार युवकों द्वारा सामूहिक बलात्कार।

 

: यमुनानगर के बिजौली गाँव में खेत से घर लौट रही 15 वर्षीय लड़की से दो युवकों द्वारा बलात्कार।

 

5 अक्तूबर : पानीपत में महिला के साथ दुष्कर्म।

 

6 अक्तूबर : नरवाना के सच्चाखेड़ा में नाबालिग दलित युवती के साथ दो युवकों द्वारा सामूहिक बलात्कार। पीड़िता ने मिट्टी का तेल डालकर लगाई आग। 95 फीसदी जली। अस्पताल में दम तोड़ा।

 

7 अक्तूबर : पानीपत में 13 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म।

 

9 अक्तूबर : कैथल जिले की कलायत बस्ती से एक दलित लड़की का अपहरण करके दो लोगों ने किया बलात्कार।

 

: करनाल के बीजना गाँव में एक नाबालिग दलित लड़की को अगुवा करके दो युवकों ने किया बलात्कार।

 

: फरीदाबाद में नौकरानी को मकान मालिक ने बनाया अपनी हवश का शिकार।

 

10 अक्तूबर : करनाल में आठवीं कक्षा की छात्रा से सामूहिक बलात्कार।

 

: साढ़ौरा में लिफ्ट के बहाने पड़ौसी द्वारा नाबालिग किशोरी से दुष्कर्म।

 

: यमुनानगर में दो युवकों द्वारा घर में घुसकर नाबालिग युवती के साथ बलात्कार का

 

मामला सामने आया।

 

: हिसार जिले के गंगवा गाँव की 12 साल की किशोरी का अपहरण के बाद बलात्कार।

 

: मंडी अटेली में एमएमएस से डराकर एक युवती के साथ बलात्कार।

 

: अंबाला की एक विवाहिता ने पति के दोस्त पर अपहरण कर 21 माह तक बलात्कार का आरोप लगाया।

 

11 अक्तूबर : भूना में एक विवाहिता से सास की मदद से पति व देवर द्वारा सामूहिक बलात्कार।

 

: मूंदड़ा में एक विवाहिता से रिवाल्वर की नोक पर लगातार ग्यारह माह से चल रहे बलात्कार का मामला उजागर।

 

: बल्लभगढ़ में एक पुलिस के एक एएसआई द्वारा महिला से दुष्कर्म।

 

: गुड़गाँव में छह वर्षीय बालिका से दो युवकों द्वारा सामूहिक बलात्कार।

 

: रोहतक में दोस्ती के बहाने पाँच युवकों ने युवती से किया सामूहिक दुष्कर्म।

 

13 अक्तूबर : यमुनानगर के गुंदियाना गाँव की महिला का तीन युवकों पर एक सप्ताह से बलात्कार का आरोप।

 

14 अक्तूबर : फरीदाबाद में स्कूल की नाबालिग बच्ची से महीनों बलात्कार का मामला उजागर। पीड़िता के साथ उसकी दो बहनों को भी स्कूल प्रबन्धन ने बाहर निकाला।

15 अक्तूबर : जीन्द में सैनी रामलीला ग्राऊण्ड से दुष्कर्म के बाद फेंकी गई अपहृत 5 वर्षीया बच्ची घायलावस्था में मिली।

16 अक्तूबर : रोहतक के घड़ौठी गाँव में 4 बच्चों की माँ के साथ दो रिश्तेदारों ने किया सामूहिक बलात्कार।

: फरीदाबाद के गुरूकुल क्षेत्र में पिता द्वारा अपनी 14 वर्षीय बेटी के साथ सालों दुष्कर्म करने का मामला।

 

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