लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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यू.पी. ए. 2 सरकार हमारी,

भोली  भाली  और  बेचारी,

राजकुमार  उनके  ब्रम्हचारी,

राज  करें उनकी  महतारी।

प्रधानमंत्री   भी  भोले भाले,

सारे  काँण्ड करें  मंत्रीगण,

कभी कामनवेल्थ धोटाला,

2जी, 3जी मे नहा नहाकर,

हैलीकौप्टर  की  घूस  खाकर,

कोलगेट  से दाँत  साफकर,

आर्म्स गेट से अन्दर जाकर,

रेल गेट से बाहर आकर,

कलावती  की रोटी  खाकर,

दामाद को अरबपति बनाकर,

हम तो  बालक  भोले  भाले,

मंत्री   हमारे सारे  चमचे,

भ्रष्टाचार  को रोकें  कैसे,

वो ही तो हाथ पैर हमारे।

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2 Comments on "भ्रष्टाचार को रोके कैसे ?"

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vijay nikore
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अच्छा व्यंग्य लिखा है।

binu bhatnagar
Guest

एक मामूली सा सवाल, श्री महेश कुमार की पदोन्नति के लियें किसी कंपनी ने 90 लाख रु. रेल मंत्री जी के भाँजे को दिये , देने वाला हिरासत मे है, मामा या भाँजे के पास 90 लाख होने चाहियें। जब किसी ने दिये तो किसी न किसी ने लिये भी होंगे। भाँजा तो पदो्न्नति दे नहीं सकता था, तो उन्हे कोई इतनी बड़ी रक़म क्यों देगा ? पर सरकार अपने हाथ पैर क्यों कटवाये ?

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