लेखक परिचय

राजीव दुबे

राजीव दुबे

कार्यक्षेत्र: उच्च तकनीकी क्षेत्रों में विशेषज्ञ| विशेष रुचि: भारतीय एवं पाश्चात्य दर्शन, इतिहास एवं मनोविज्ञान का अध्ययन , राजनैतिक विचारधाराओं का विश्लेषण एवं संबद्ध विषयों पर लेखन Twitter: @rajeev_dubey

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उलूक दर्शन

उल्लुओं की भाषा के जानकारों ने बताया है कि

आजकल उल्लू अपनी हर सभा में चीख – चीख कर कह रहे हैं –

“अगर घोड़ों ने सभ्यता के विकास के शुरुआती दौर में

आदमी को अपने ऊपर चढ़कर अपना शोषण न करने दिया होता

तो यह पूंजीवादी युग कभी नहीं आता । “

लेकिन अब उल्लुओं को कौन समझाये कि

आदमी को अगर घोड़े नहीं तो गधे, और गधे भी नहीं तो

आदमी तो मिल ही जाते – सवारी करने को –

आज भी मिल जाते हैं हर जगह – कोलकाता में भी …!

– राजीव दुबे

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6 Comments on "उलूक दर्शन"

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rajeev dubey
Guest

Hi Kerry,
Thanks for the comment. Indeed this is my poem composed many years back…do have a look at my blogs at:

http://blogthesong.blogspot.com (Hindi and English creative writing)
and
http://democracyhijacked.wordpress.com

And yes, I’m delighted to know that you could read an article in Hindi. Do write more about you…

Kerri Veasley
Guest

maybe you will tell me who is really original author of this text? if this is your article i have to say you have got good thoughts

दिवस दिनेश गौड़
Guest

वाह राजीव भाई शानदार… कुछ पंकितियों में कितना बड़ा सच लिख डाला…
बहुत बहुत धन्यवाद…

Saurabh Tripathi
Guest

सही कहा aapne

Dr Venkat Iyer
Guest

बिकुल शाही बात हे राजीव ! दिवाली की सुभ कामनाये

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