लेखक परिचय

अन्नपूर्णा मित्तल

अन्नपूर्णा मित्तल

एक उभरती हुई पत्रकार. वेब मीडिया की ओर विशेष रुझान. नए - नए विषयों के लेखन में सक्रिय. वर्तमान में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परस्नातक कर रही हैं. समाज के लिए कुछ नया करने को इच्छित.

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अन्नपूर्णा मित्तल

हिमाचल का नाम लेते ही मेरे अंदर एक नई ऊर्जा सी फैलने लगी है। हिमाचल मे प्रवेश करना किसी के लिए भी एक नए जीवन के प्रारम्भ के समान है। वहाँ की शांत प्रकृति मस्तिष्क को अंदर से सुकून प्रदान करती है। हिमाचल साक्षात् स्वर्ग है और वहाँ पर रहने वाले लोग जीते-जी स्वर्गवास का आनंद लेते हैं। हिमाचल प्रदेश भारतीय संस्कृति से पूर्ण रूप से ओत-प्रोत है। सच मे किसी पुण्य करने वाले का ही जन्म हिमाचल जैसे स्थान मे होता है। हिम की चादर मे ढका ये प्रदेश मुझे बार बार अपनी ओर आकर्षित करता है।

हिमाचल प्रदेश पश्चिमी भारत में स्थित राज्य है। यह उत्तर में जम्मू और कश्मीर, पश्चिम तथा दक्षिण-पश्चिम में दक्षिण में हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश, दक्षिण-पूर्व में उत्तराखंड तथा पूर्व में तिब्बत से घिरा है। ‘हिमाचल’ प्रदेश का शाब्दिक अर्थ हिम के आँचल मे ढका प्रदेश है। हिमाचल प्रदेश में आर्यों का प्रभाव ऋग्वेद से भी पुराना है।

आंग्ल-गोरखा युद्ध के बाद यह ब्रिटिश शासन के अंतर्गत आ गया। सन 1857 तक यह पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह के शासन के अधीन पंजाब राज्य का हिस्सा रहा। सन 1950 में इस राज्य को केन्द्र शासित प्रदेश बनाया गया, परन्तु 1971 में ‘हिमाचल प्रदेश राज्य अधिनियम-1971’ के अन्तर्गत इसे 25 जून 1971 को भारत का अठारहवाँ राज्य बना दिया गया। नदियों की बहुतायत के कारण, हिमाचल अन्य राज्यों को पनबिजली देता है, जिनमें दिल्ली, पंजाब और राजस्थान प्रमुख रूप से हैं। राज्य की अर्थव्यवस्था पनबिजली, पर्यटन और कृषि पर मूल रूप से आधारित है।

हिमाचल प्रदेश पश्चिमी हिमालय के मध्य में स्थित है, इसे देव भूमि कहा जाता है। यहाँ देवी और देवताओं का निवास स्थान माना जाता है। हिमाचल राज्य में पत्थर और लकड़ी के अनेक मंदिर हैं। सम़ृद्ध संस्कृति और परम्पराओं ने हिमाचल को एक अनोखा राज्य बना दिया है। यहाँ के ऊंचे नीचे पहाड़, ग्लेशियर, छायादार घाटियां और विशाल पाइन वृक्ष और गरजती नदियां तथा विशिष्ट जीव जंतु मिलकर हिमाचल के लिए एक मधुर संगीत की रचना तैयार करते प्रतीत होते हैं।

हिमाचल प्रदेश पूर्ण राज्य 25 जनवरी, 1971 को बना। अप्रैल 1948 में यहाँ की 27,000 वर्ग कि.मी. में फैली हुई लगभग 30 रियासतों को मिलाकर इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। 1954 में ‘ग’ श्रेणी की रियासत तबलासपुर को इसमें मिलाने पर इसका क्षेत्रफल बढ़कर 28,241 वर्ग कि.मी. हो गया। सन 1966 में इस केन्द्रशासित प्रदेश में पंजाब के पहाड़ी भाग को मिलाकर इस राज्य का पुनर्गठन किया गया और इसका क्षेत्रफल बढ़कर 55,673 वर्ग कि.मी. हो गया।

हिमाचल प्रदेश का प्रमुख व्यवसाय कृषि है। कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कृषि से 69 प्रतिशत कामकाजी नागरिकों को सीधा काम मिलता है। प्रकृति द्वारा हिमाचल प्रदेश को व्यापक रूप से कृषि के अनुकूल जलवायु और परिस्थितियां दी हैं जिसके कारण किसानों को विविध फल उगाने में मदद मिलती है। बागवानी के प्रमुख फल हैं- सेब, नाशपाती, आडू, बेर, खुमानी, गुठली वाले फल, नीबू, आम, लीची, अमरूद और झरबेरी आदि। 1950 में केवल 792 हेक्टेयर क्षेत्र बागवानी के अंतर्गत था, जो बढ़कर 2.23 लाख हेक्टेयर हो गया है। इस मिशन से राज्य में बागवानी विकास की सभी संभावनाओं का पता लगाया जाएगा। इस योजना में विभिन्न जलवायु वाले कृषि क्षेत्रों में चार उत्कृष्टता केंद्र बनाए जाएंगे और जल संरक्षण, ग्रीन हाउस, कार्बनिक कृषि और कृषि तकनीकों से जुड़ी सभी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।

जैव प्रौद्योगिकी के लिए राज्य में जैव-प्रौद्योगिकी के दोहन पर विशेष विकास किया जा रहा है। इसके विकास के लिए अलग से जैव-प्रौद्योगिकी विभाग खोल दिया गया है। राज्य की अपनी जैव-प्रौद्योगिकी नीति है। सरकार की ओर से जैव प्रौद्योगिकी इकाइयों को रियायतें दी जा रही हैं जो अन्य औद्योगिकी इकाइयों को दी जाती हैं। राज्य सरकार का सोलन ज़िले में जैव-प्रौद्योगिकी पार्क की स्थापना का विचार है।

पहाड़ी लोगों के मेले और त्योहार उल्लासपूर्ण गीतों और नृत्य के अवसर होते हैं। उत्कृष्ट शैली में बनी किन्नौर शॉलें, कुल्लू की विशिष्ट ऊनी टोपियाँ और चंबा के क़सीदाकारी किये हुए रूमाल त्योहार के रंगीन परिधानों को और भी विशिष्टता प्रदान करते हैं। हिमाचल प्रदेश अपनी कांगड़ा घाटी चित्रकला शैली के लिए भी जाना जाता है। शिमला की पहाड़ियाँ, कुल्लू घाटी (मनाली शहर सहित) और डलहौज़ी पर्यटकों के बड़े आकर्षण हैं। स्कीइंग, गॉल्फ़, मछली पकड़ना, लम्बी यात्रा और पर्वतारोहण ऐसी गतिविधियाँ हैं, जिनके लिए हिमाचल प्रदेश एक आदर्श स्थान है। कुछ पौराणिक धर्मस्थलों पर पूजा-अर्चना के लिए हिमाचल और उसके पड़ोसी राज्यों के श्रद्धालु बड़ी संख्या में एकत्र होते हैं।

कुल्लू घाटी देवताओं की घाटी के रूप में जानी जाती है; इसके चीड़ और देवदार के जंगल, फूलों से लदे हरे-भरे मैदान और फलों के बगीचे प्रत्येक शरद ऋतु में होने वाले दशहरा महोत्सव के लिए माहौल तैयार कर देते हैं। इस मौक़े पर मन्दिरों के देवताओं को सजी हुई पालकियों में गाजे-बाजे के साथ और नाचते हुए निकाला जाता है। 1959 में ल्हासा पर चीन के क़ब्ज़े के परिणामस्वरूप दलाई लामा तिब्बत से पलायन कर धर्मशाला आ गए थे और यहीं रहने लगे। इसके बाद से ही बौद्धों के लिए (ख़ासकर तिब्बतियों के लिए) धर्मशाला पवित्र स्थान हो गया है। वर्ष 2000 की शुरुआत में 14 वर्षीय 17वें करमापा भी तिब्बत से भागकर धर्मशाला आ गए और शरण माँगी।

हिमाचल प्रदेश में मुख्य रूप से हिन्दी, काँगड़ी, पहाड़ी, पंजाबी, तथा डोगरी आदि भाषाऐं बोली जाती हैं। हिन्दू, बौद्ध और सिक्ख आदि यहाँ के प्रमुख धर्म हैं। राज्य में हिन्दुओं की संख्या कुल जनसंख्या का 90 प्रतिशत है और मुख्य समुदायों में ब्राह्मण, राजपूत, कन्नेत, राठी और कोली हैं। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, सिरमौर, मण्डी ऊपरी क्षेत्र किन्नौर, शिमला इत्यादि जनपदों में नाटी नृत्य मुख्य रूप से किया जाता है।

हिमाचल प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल जी हैं। धूमल जी ने हिमाचल की प्रगति के लिए प्रशंसनीय कार्य किए हैं। इनके शासन मे राज्य हर क्षेत्र मे विकास कर रहा है। आज हिमाचल प्रदेश में न केवल पहाड़ी क्षेत्रों का विकास हुआ, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाओं में भी इस प्रदेश ने उल्लेखनीय विकास किया है। कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र एवं आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के औद्योगिक घराने औद्योगिक पैकेज का लाभ उठाने के लिए हिमाचल प्रदेश का रुख कर रहे हैं और वहां नई इकाइयां स्थापित कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने पहाड़ी राज्यों की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों तथा औद्योगिक पिछड़ेपन को देखते हुए हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू व कश्मीर के लिए औद्योगिक पैकेज की घोषणा की थी। इन प्रयासों का राज्य के औद्योगिक विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है जिसे और विस्तारित करने की जरूरत है।

 

 

 

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