लेखक परिचय

पंडित सुरेश नीरव

पंडित सुरेश नीरव

हिंदी काव्यमंचों के लोकप्रिय कवि। सोलह पुस्तकें प्रकाशित। सात टीवी धारावाहिकों का पटकथा लेखन। तीस वर्षों से कादम्बिनी के संपादन मंडल से संबद्ध। संप्रति स्‍वतंत्र लेखन।

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पंडित सुरेश नीरव

कलैंडर के हेलीकॉप्टर से उतरकर ऋतुओं का सुपर स्टार ऋतुराज वसंत धरती पर उतर आय़ा है। शोखियों की क्रीम और रोमांस के पाउडर से लिपी-पुतीं सजी-संवरीं कलियां वसंत को देख-देखकर- वाओ..हाऊ क्यूट-जैसे जुमलों को मादक सिसकियों में ढालकर बिंदास वसंत को रिझाने में लग गई हैं। एअरपोर्ट पर नेता के स्वागत में आए चमचों की तरह बाग-बगीचों में फूल झुक-झुककर वसंत के स्वागत में दोहरे-तिहरे हुए जा रहे हैं। भौंरे मस्ती में आकर भांगड़ा करने लगे हैं। प्रेमी अपनी निजी प्रेमिकाओं को इस तरह निहारने लगे है जैसे चुनाव में खड़ा नेता एकांत में वोटर लिस्ट को निहारता है और कभी-कभी मौका देखकर पवित्र भाव से उस पर हाथ भी फेरता है। सालभर भूमिगत रहे आतंकी की तरह बिना पत्नियोवाले पति प्रेम की खोदी हुई अपनी-अपनी सुरंगों को आज मुहब्बत के रिमोट से उड़ा देने का मौका तलाश रहे हैं।

रोमांस के डिपार्टमेंट से सालों पहले रिटायर हो चुके सीनियर सिटीजन भी अपनी मुहब्बत की पेंशन को आज भुनाने के लिए भुनभुना रहे हैं। उनका इनर्जी लेवल इतना हाई हो रहा है कि तुरत-फुरत कोई सस्ता-सुंदर-टिकाऊ इनवर्टर नहीं मिला तो भक्क से इनका फ्यूज उड़ सकता है। लोकल विश्वामित्रों की तपस्या भंग करने का नेशनल परमिट प्राप्त मेनकाएं फिर एक बार सीजनल टूर पर रवाना हो गई हैं। बाबा कामदेव भी चुनावी दौर में जैसे निर्वाचन आयोग व्यस्त हो जाता है ऐसे ही व्यस्त हो गए हैं। झुग्गी-झौंपड़ियों से लेकर आलीशान कोठियों में रहनेवाली मुन्नियांइस सीजन में फिर एकबार बदनाम होने की सरफरोश तमन्ना के साथ गर्ल से आयटम गर्ल होकर हंसते-हंसते दोहोत्सर्ग के लिए अपने रंगीन बलिदानी अभियान पर सीना तानकर निकल पड़ी हैं। शक्तिवर्धक दवाएं अफवाहों की तरह घर-घर तक फैल घईं हैं। सब तरफ दबंग वसंत का ही दबदबा है। माफिया वसंत की सेना लोकल वसंतसेनाओं को आत्मसमर्पण के लिए ललकार रही हैं। लोग जानबूझकर मिस गाइड हो रहे हैं।

यत्र-तत्र-सर्वत्र मिस और प्रोमिस दोनों का ही चतुराईपूर्वक मिसयूज हो रहा है। मिसमेनेजमेंट का मिसमेरिज्म गुदगुदाती गुदाज मिस्टेकें कर-करके मिसमिसा रहा है। और चहुं ओर नर-नारी इस मिसमिसाती मिस्टेक के महोत्सव में भरपेट उत्साह के साथ शरीक हो रहे हैं। ऐसा ही होता है वसंत का रासायनिक प्रभाव। रोमांस की केंटीन में बैठीं कमसिन इडलियां डोसों से गलबहियां करने में स्वेच्छा से लथपथ हैं। ऋंगार रस की प्रयोगशाला में रिसर्च छात्र दिन-रात नए-नए और मौलिक प्रयोग कर अपनी प्रबल प्रतिभा का लोहा मनवाने के लिए बेताब हैं। यह पावन वसंत का ही असर है कि शरीफ लोगों को घर की बर्तनमांजनेवाली में सनी लिओन दिखाई देने लगी है। ऊंच-नीच की दीवारें सरकारी पुल की तरह टूट रही हैं। श्रीयुत एन.डी.तिवारी साहब अस्सी साला नौजवानों के अचानक आदर्श पुरुष बन गए हैं। अस्पतालों में टूटे-फूटे पड़े मरीज़ खानदानी शालीनता के साथ नर्स को ऐसे खींच रहे हैं जैसे भ्रष्ट नेता पब्लिक के पैसे को खेंचता है। सूने पड़े कमरों की ट्यूब लाइटों को रिझाने के लिए करेंट-वृद्ध फ्यूज़ बल्ब भी भभककर जल उठे हैं। ऐसे मल्टीकलर मौसम में सुबह-सुबह मेरे पड़ोसी रिटायर्ड कर्नल अचानक घर आ टपके। कोहरे के कारण तमाम उड़ाने रद्द हो चुकी थीं मगर उनके चेहरे पर हवाइयां निर्बाध गति से उड़ रही थीं। हांफते-कांपते हुए बोले- रात से मेरी जैरी गायब है।

कम उम्र है कुछ ऐसा-वैसा हो गया तो हम तो कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे। हमने तसल्ली दिलाते हुए कहा- फिक्र मक कीजिए कर्नल साहब। इस वासंती मौसम में किसी रंगीन मिजाज़ टॉमी के साथ कहीं वेलेंटाइन मना रही होगी। वसंत में बौराने का लाइसेंस सिर्फ इंसानों को ही थोड़े ही दिया है कामदेव ने। डॉग-डॉगनियों को भी वसंत सताता है। यह सुनते ही कर्नल साहब की मूंछों की आड़ में छिपे मुंह के बंकर से भयानक हंसी का विस्फोट हुआ।

जिसमें उनके अंग-प्रत्यंग के परखच्चे उड़ गए। जनहित में मैं आज यह सूचना जारी करना अपना गैरसरकारी फर्ज समझता हूं और शपथपूर्वक कहता हूं कि मृत्युलोक का कोई भी प्राणी कैसे भी और कहीं भी वसंत के करेंट की चपेट में आ सकता है। शोले की वसंती भी इससे नहीं बच सकी। और स्पेशल ध्यान रहे कि इसका करेंट पावरकट के दौरान और भी ज्यादा ज़ोर से झटके मारता है। इस तरह यह बहुकामी वसंत धारक के लिए मारक और उद्धारक दोनों का ही कारक है।

इति श्री वसंत कथा।

 

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