लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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1. हारी नहीं हूँ

थकी हूँ हारी नहीं हूँ,

थोड़ा सा विश्राम करलूं।

ज़रा सी सी दुखी हूँ फिर भी,

थोड़ा सा श्रंगार करलूं।

श्रंगार के पीछे अपने,

आंसुओं को छुपालूं।

ख़ुश नहीं हूँ फिर भी,

ख़ुशी का इज़हार करलूं।

शरीर तो दुख रहा है,

फिर भी दर्द को छुपालूँ।

भंवर मे फंसी है नैया,

तूफ़ान से उसे बचालूं।

छंद लिखना आता नहीं है,

मन मे उठते भाव लिखलूं।

 

 2. ख़्वाहिश

 कोई ख़्वाहिश,

अधूरी रह गई हो,

मै ये मै नही कहती,

 क्योंकि कोई ख़्वाहिश,

कभी की ही नहीं थी।

ख़वाहिशों का क्या है,

एक पूरी हो तो,

दूसरी दे देती है दस्तक,

जिस चीज़ के पीछे भागो,

दो दिन मे वो हो जाती है,

वो बेमतलब!

ख़त्म हो जाती है,

उसकी चाहत और ज़रूरत,

इसलियें ख़वाहिशों का

 अधूरा रहना ,

पूरा होना , ना होना ,

  कोई बड़ी बात नहीं

फिर भी आदमी ,

उनके पीछे भागता है,,

ज़िन्दगी का चैन खोकर!

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4 Comments on "हारी नहीं हूँ"

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Sachin Tyagi
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बीनू जी , आप अच्छी कविता करती हैं …….. मेरी शुभकामनाएं ………!

PRAN SHARMA
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Bhavabhiyakti uttam hai .

डॉ.अशोक कुमार तिवारी
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डॉ.अशोक कुमार तिवारी
हारना भी नहीं है —————————– “राजनीति के कारण ही विरोध हो रहा है” : ———————– जयललिता जी इसलिए यूजीसी के हिंदी से सम्बंधित निर्देशों का विरोध कर रही हैं कि उसे यूपीए सरकार के समय भेजा गया है और उनकी विरोधी द्रमुक यूपीए का हिस्सा थी (( अब देखना है एनडीए ( मोदी ) उस निर्देश को पुन: पास करवाकर भेजते हैं या नहीं )) ( देखिए राजस्थान पत्रिका – 19-9-14, पेज -14 ) :—— तमिलनाडु में परिजनों और स्कूलों की मांग, ‘हमें हिंदी चाहिए’ NDTVcom, Last Updated: जून 16, 2014 06:43 PM IST ‘We Want Hindi’, Say Parents, Schools… Read more »
vijay nikore
Guest

रचनाएँ अच्छी लगीं। बधाई।

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