लेखक परिचय

श्‍यामल सुमन

श्‍यामल सुमन

१० जनवरी १९६० को सहरसा बिहार में जन्‍म। विद्युत अभियंत्रण मे डिप्लोमा। गीत ग़ज़ल, समसामयिक लेख व हास्य व्यंग्य लेखन। संप्रति : टाटा स्टील में प्रशासनिक अधिकारी।

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सोना हो चाहत अगर, सोना हुआ मुहाल।
दोनो सोना कब मिले, पूछे सुमन सवाल।।

खर्च करोगे कुछ सुमन, घटे सदा परिमाण।
ज्ञान, प्रेम बढ़ते सदा, बाँटो, देख प्रमाण।।

sleppingअलग प्रेम से कुछ नहीं, प्रेम जगत आधार।
देख सुमन ये क्या हुआ, बना प्रेम बाजार।

प्रेम त्याग अपनत्व से, जीवन हो अभिराम।
बनने से पहले लगे, अब रिश्तों के दाम।।

जीवन के संघर्ष में, नहीं किसी से आस।
भीतर जितने प्रश्न हैं, उत्तर अपने पास।।

देखो नित मिलता सुमन, जीवन से सन्देश।
भला हुआ तो ठीक पर, नहीं किसी को क्लेश।।

दोनों कल के बीच में, फँसा हुआ है आज।
कारण बिल्कुल ये सुमन, रोता आज समाज।।

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1 Comment on "सोना हो चाहत अगर"

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बीनू भटनागर
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बीनू भटनागर

सुन्दर रचना

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