लेखक परिचय

श्‍यामल सुमन

श्‍यामल सुमन

१० जनवरी १९६० को सहरसा बिहार में जन्‍म। विद्युत अभियंत्रण मे डिप्लोमा। गीत ग़ज़ल, समसामयिक लेख व हास्य व्यंग्य लेखन। संप्रति : टाटा स्टील में प्रशासनिक अधिकारी।

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बिजलियों से जगमगाई, इक दिवाली ये भी है

रोशनी घर तक न आई, इक दिवाली ये भी है

 

दीप अब दिखते हैं कम ही, मर रही कारीगरी

मँहगी है दियासलाई, इक दिवाली ये भी है

 

थी भले कम रोशनी पर, दिल बहुत रौशन तभी

रीत उल्टी क्यों बनाई, इक दिवाली ये भी है

 

देखते ललचा के लाखों, कुछ के तन कपड़े नए

फुलझड़ी ने मुँह चिढ़ाई, इक दिवाली ये भी है

 

खाते हैं कुछ फेंक देते, और जूठन छोड़ते

बस सुमन देखे मिठाई, इक दिवाली ये भी है

 

 

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