लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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बीनू भटनागर

मै कौन हूँ? कहाँ हूँ ?

अंधेरी रातों मे

गुमशुदा हूँ।

कुछ साये अंजाने से,

डराने लगे हैं।

कुछ दर्द पुराने से

याद आने लगे हैं।

लेकिन,

ये तो साये हैं,

इनका वजूद ही,

कहाँ है!

इन अंधेरी रातों की,

सुबह होगी,

उजाले मे ये साये

डूब जायेंगे,

क्योंकि,

निराशा और आशा,

के बीच,

केवल दो पल का

अंतराल है।

इस अंतराल

के बाद

उम्मीद, हौसला,

नई सोच होगी।

ये मेरे गुमशुदा

होने के अहसास को

मिटा देंगे !

तब मै खुद को,

ढूँढ ही लूँगी,

मै कौन हूँ,

पहचान ही लूँगी।

मै कहाँ हूँ,

जान ही लूँगी।

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3 Comments on "मै गुमशुदा हूँ"

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Binu Bhatnagar
Guest

आप दोनो को बहुत बहुत धन्यवाद

Vijay Nikore
Guest

निराशा को दूर करती और आशा देती यह कविता अच्छी लिखी है ।
विजय निकोर

pran sharma
Guest

ASHA JAGAATEE BINU JI KEE KAVITA NE MAN KO MOH LIYAA HAI.

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