लेखक परिचय

ललित कुमार कुचालिया

ललित कुमार कुचालिया

लेखक युवा पत्रकार है. हाल ही में "माखनलाल चतुर्वेदी राष्टीय पत्रकारिता विश्विधालीय भोपाल", से प्रसारण पत्रकारिता की है और "हरिभूमि" पेपर रायपुर (छत्तीसगढ़) में रिपोर्टिंग भी की . अभी हाल ही में पत्रकारिता में सक्रीय रूप से काम कर है

Posted On by &filed under कविता.


मैं उजला ललित उजाला हूँ!

मैं हूँ तो फिर अंधकार नहीं है!

 

तेरे मन के तम से लड़ता हूँ

तेरी राहें उजागर करता हूँ

आओ मुझे बाहों में भर लो!

मुझ सा कोई प्यार नहीं है

 

मैं हूँ तो फिर अंधकार नहीं है!

 

तेरे रोम-रोम में भर जाता हूँ

तेरे दर्द को मैं सहलाता हूँ

आओ मुझे देह में भर लो!

मुझ सा कोई उपचार नहीं है

 

मैं हूँ तो फिर अंधकार नहीं है!

 

यूं तो नहीं मेरा कोई भी रूप

हूँ मैं ही चांदनी, मैं ही धूप

आओ मुझे अंजुली में भर लो!

मुझ में कोई भार नहीं है

 

मैं हूँ तो फिर अंधकार नहीं है!

 

क्यों मन में भय को भरते हो

क्यों अंधियारे से डरते हो

आओ मुझे अंखियों में भर लो

मुझ सा कोई दीदार नहीं है

 

मैं हूँ तो फिर अंधकार नहीं है!

मैं उजला ललित उजाला हूँ!

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz