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अढाई लाख कार्यकर्ता साक्षी बनें


भरतचंद्र नायक

मध्यप्रदेश में कांग्रेस के अनवरत सत्ता में रहने के साथ प्रदेश में जब-तब कांग्रेस से जनता का मोह भंग हुआ और मतदाताओं ने कांग्रेस को सबक सिखाया। भारतीय जनसंघ को मिली जुली संविदा सरकार गठित करने का मौका मिला। नब्बे के दशक में भारतीय जनता पार्टी की सरकार तो बनी लेकिन अल्पजीवी रही। प्रदेश के राजनैतिक क्षेत्रों में कई तरह की अवधारणाएं बनने लगी। पहली तो यह कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार एक बार बनने के बाद उसकी पुर्नावृत्ति नहीं होती। दूसरी यह कि वह अपना पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाती। वर्ष 2003 के नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता ने भारतीय जनता पार्टी को जनादेश दिया। उमा भारती के नेतृत्व में भाजपा की सरकार के गठन के साथ कांग्रेस के शासन का अवसान हो गया। अपरिहार्य कारणों से प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन होने के बावजूद पार्टी की सरकार सेवोन्मुख बनी रही। कांग्रेस जनता द्वारा ठुकराये जाने के बाद भी सत्ता लोलुपता भावना से अभिशप्त रही है और उसने भाजपा सरकार के अल्पजीवी रहने और दोबारा सत्ता में नहीं आने के मिथक से मनमोदक फोड़ने का खूब आनंद उठाया। बार-बार राजभवन पहुंचने और भाजपा सरकार के साथ केन्द्र सरकार के भेदभाव से दंडित करानें में कोई कसर नहीं छोडी। कांग्रेस बिना सत्ता के बिना पानी के तड़पने वाली मछली की मुद्रा पर आ गयी है, लेकिन लोकतंत्र में जनादेश ही सर्वोपरि होता है।

भारतीय जनता पार्टी की सरकार का नेतृत्व युवा कार्यकर्ता शिवराजसिंह चौहान के कर्मठ हाथों में रहने और प्रदेश संगठन की बागडोर पहले नरेन्द्रसिंह तोमर तथा बाद में प्रभात झा के कर्मठ हाथों में आने, उनकी सक्रियता से कार्यकर्ताओं में फैला दी। संकल्प पक्का होने से दोनों मिथक चूर-चूर हो गये। 2003 के बाद जब 2008 में प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए और 2009 में लोकसभा चुनाव हुए भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने चुनाव को चुनौती और अवसर के रूप में स्वीकार किया। दोनों मिथक टूटे। प्रदेश में विधानसभा चुनाव में पार्टी को दोबारा बहुमत भी मिला और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को पीछे धकेल भी दिया। भारतीय जनता पार्टी केडर बेस पार्टी है और कार्यकर्ता ही संगठन का मेरूदंड है। पार्टी का यह राजनैतिक दर्शन देश की अन्य पार्टी इकाईयों के बीच प्रशंसा और चर्चा का विषय बन गया। प्रदेश के 618 संगठनात्मक मंडलों में फैले कार्यकर्ताओं और पार्टी संगठन के पदाधिकारियों ने प्रदेश में पार्टी की सरकार के 7 वर्ष पूर्ण होने और मुख्यमंत्री के रूप में शिवराजसिंह चौहान के पूरे पांच वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण होने पर आत्म संतोष जताया। कार्यकर्ता हर्ष से लवरेज हुए। प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा ने अपने कार्यकाल के नब्बे दिन भी पूरे नहीं किये थे और मध्यप्रदेश जैसे विस्तृत प्रदेश का चौथायी भूभाग नाप डाला। प्रदेश में एक सात्विक संस्कृति का बीजारोपण किया। कार्यकर्ताओं के उत्साह से अभिभूत होकर प्रभात झा ने अनुभूति की कि दोनों मिथक तोड़ने के लिये कार्यकर्ताओं की लगन, परिश्रम, अध्यवसाय और कर्मठता को सम्मानित किया जाना चाहिए। कार्यकर्ता की प्रेरक शक्ति शिवराजसिंह चौहान का भी प्रदेश के प्रथम कार्यकर्ता के रूप में सम्मान होना चाहिए। कर्म की पूजा हमारी प्रकृति है। प्रभात झा ने पार्टी संगठन में अपने वरिष्ठतम सहयोगी माखनसिंह चौहान, भगवतशरण माथुर और अरविन्द मेनन को पहले विश्‍वास में लिया और योजना का रूपांकन किया। प्रदेश पदाधिकारियों की सलाह मशविरा के बाद इस योजना की जानकारी जब शिवराजसिंह चौहान को दी गयी तो उन्होंने विचार को मौलिक बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का न तो सम्मान किया जाना चाहिए और न पार्टी में ऐसा कोई प्रचलन ही है कि कार्यकर्ता सम्मानित हो। प्रभात झा ने कार्यकर्ता गौरव दिवस मनाने की योजना से पार्टी हाईकमान को अवगत कराया और मार्गदर्शन की अपेक्षा की। राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश संगठन प्रभारी अनंत कुमार ने कहा कि पौरूष, कर्तव्यनिष्ठा का सदैव सम्मान हुआ है।

हम सदविचार के पोषक है, लेकिन कार्यकर्ता गौरव दिवस इस आयोजन का निमित्त ”जनता वंदन, कार्यकर्ता अभिनंदन” के रूप में अधिक हृदय ग्राही और सार्थक होगा। सोने में सुगंध आ गयी।

प्रभात झा के नेतृत्व में प्रदेश पदाधिकारियों की जो बैठक इस निमित्त बुलायी गयी उसमें पूरी शक्ति के साथ आयोजन की तैयारियों को मूर्त रूप देने का संकल्प किया गया। लोग जुड़ते गये, कारवां बनता गया। संगठन की युवा ऊर्जा के हाथ में कमान सौंप देने और युवा उत्साह को नेपथ्य में रहकर उद्दीपित करने का निश्‍चय किया गया। प्रदेश मंत्री रामेश्‍वर शर्मा कार्यक्रम प्रभारी के रूप में भोपाल के सबसे विस्तृत प्रागंण, भोपाल नगर से दूर, शिविर लगाकर जंबूरी मैदान में जम गये। उनकी पहल पर भोपाल के पार्टी के विधायक, नवजवान नेता अपने अपने सहयोगी कार्यकर्ताओं के साथ कार्य में जुट गये। सभा स्थल, मंच, श्रोता स्थल, आवास, भोजन, चिकित्सा, शौचालय, स्नानगृह, बिजली, पानी, सुरक्षा, पार्किंग, नगर की सजावट जैसे कार्र्य तय किये गये और समितियों का गठन कर उनका कामकाज प्रभारी को सौंप दिया गया। पार्टी के संगठन पदाधिकारी भगवतशरण माथुर ने दैनंदिन कार्यों की प्रगति की समीक्षा का काम संभाल लिया। प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा पार्श्‍व में रहकर रोजाना की प्रगति की जानकारी लेते और कहां किस युवा नेता, अनुभवी, पदाधिकारी, संबंधित विभाग से समन्वय में जुट गये। प्रदेश प्रवक्ता विजेश लुनावत ने विस्तृत पंडाल निर्माण का कार्य संभाला, तो जिलाध्यक्ष आलोक शर्मा, कार्यालय मंत्री आलोक संजर कार्यकर्ताओं को उर्जित करने में जुट गये। प्रदेश के प्रत्येक अंचल का समारोह से रागात्मक जुड़ाव रखने के लिये लोक संस्कृति और विरासत को प्रदर्शित करने का काम राहुल कोठारी (राष्ट्रीय सचिव युवा मोर्चा) ने अपने हाथ में लेकर झांकियों, लोकनृत्यों के आंचलिक प्रतिनिधित्व करने का बीडा संभाल लिया। मुरैना से लेकर मंदसौर, निमाड से लेकर बुन्देलखण्ड और बघेलखण्ड की लोक संस्कृति और विरासत के दिग्दर्षन की रूपरेखा बनाने में पार्टी के संभाग प्रभारियों, जिला प्रभारियों, जिलाध्यक्षों, सांसदों और विधायकों की राय लेकर उस पर अमल किया गया।

कार्यकर्ता गौरव दिवस सभा स्थल पर भूमिपूजन के साथ भोपाल जिले के कार्यकर्ताओं का उत्साह तब दोगुना हो गया जब पार्टी के वरिष्ठ नेता सुंदरलाल पटवा, कैलाश जोशी, कैलाश सारंग, नारायणप्रसाद गुप्ता, बाबूलाल गौर जिनकी गणना भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में होती है। कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर कार्यकर्ताओं का मनोबल बढाने में जुट गये। वरिष्ठ नेता जब पितृपुरूष कुशाभाऊ ठाकरे के अदम्य साहस और परिश्रम में संस्मरण सुनाते कार्यकर्ता दिन रात काम में जुटे रहते। इस उत्साह ने मोर्चा और प्रकोष्ठों का उत्साह बहुगुठित कर दिया। मोर्चा और प्रकोष्ठों के पदाधिकारी मैदान में कूद पडे। कार्यक्रम में केडर बेस कार्यकर्ताओं को दावत देने का काम इन्होंने संभाल लिया। प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा ने कार्यकर्ताओं के साथ पीली पाती भी भेजकर प्रदेश के लाखों कार्यकर्ताओं को अनुप्राणित किया, लेकिन मर्यादाबद्ध उपस्थिति का बंधन लगाया गया कि मतदान केन्द्र पर बनी समिति का ही प्रतिनिधित्व हो। भीडभाड में गौरव दिवस की भावना तिरोहित न हो जाये। प्रति कार्यकर्ता प्रवेश 10 रू. तय किया गया और इस शुल्क के ऐवज में कार्यकर्ता गौरव दिवस में भाग लेने वाले कार्यकर्ताओं को प्रवेशिका, मार्गदर्षक साहित्य, एकात्म मानव दर्षन का साहित्य उपलब्ध कराने का पक्का बंदोबस्त किया गया। प्रदेश के सभी 618 मंडलों में बैठकों का जो सिलसिला चला तो कार्यकर्ताओं में नई ललक पैदा कर दी गयी। प्रभात झा ने हर स्तर पर शालीनता, अनुशासन, गौरव दिवस की सात्विकता बनाये रखने और हर कदम पर पार्टी का राजनैतिक दर्षन मुखरित करने में सजगता बरतने के लिये आग्रह किया। इस कार्य में प्रदेश के मंत्रियों ने सदैव समन्वय बैठाने में गंभीरता का परिचय दिया, लेकिन वे यह बात नहीं भूले कि कार्यकर्ता गौरव दिवस विशुद्ध रूप से पार्टी संगठन का आयोजन है जो पार्टी की विशिष्ठता का दरकार रखता है। पार्टी और सरकार को टीका टिप्पणी से परे रखने का जो सजग यत्न किया गया उसकी चहुंओर सराहना हुई।

भोपाल नगर से लेकर प्रदेश के दूरस्थ अंचलों तक यह संदेश एक नसीहत बन गया कि आत्मष्लाघा से दूर रहकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और उनके जीवन दर्षन को सामने लाना है। नतीजा यह हुआ कि अटलजी, आडवाणी, गडकरी, कुशाभाऊ ठाकरे, शिवराजसिंह चौहान जैसे वरिष्ठ नेताओं के कटआऊट दिखायी दिये। आडंबर और आत्म प्रचार पर सर्वत्र पाबंदी लग गयी। जंबूरी मैदान का नामकरण कुशाभाऊ ठाकरे नगर और प्रदेश द्वारों का नामकरण प्यारेलाल खण्डेलवाल, बापूराव परांजपे, राजेन्द्र धारकर और नारायणकृष्ण शेजवलकर के नाम पर किया गया। भोजनालय को राजमाता विजयाराजे सिंधिया अन्नपूर्णा के रूप में गरिमा प्रदान की गयी। सभी प्रवेश द्वार पर एंबुलेंस और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की गयी तथा एक अस्थायी चिकित्सा केन्द्र भी गठित किया गया। जिलों से आयी सामग्री को प्रदर्शनी के रूप में प्रदर्षित करते हुए जनसंघ से भाजपा तक के विस्तार की गौरवगाथा और सफल कार्यकर्ता के रूप में शिवराजसिंह चौहान की जैत ग्राम, किसान के बेटे के रूप में उदय से मुख्यमंत्री के सफर को दिखाया गया। खुले चार मंच बनाये गये जहां प्रदेश के लोकनर्तकों के आंचलिक संस्कृति का दिग्दर्षन किया। प्रदेश के कोने-कोने से आये 2 लाख 36 हजार कार्यकर्ताओं ने शुल्क जमा कर कार्यकर्ता गौरव दिवस में अपने उपस्थिति दर्ज करायी जिनमें 25 से 30 हजार के बीच महिलाएं भी शामिल थी।

कार्यकर्ता गौरव दिवस की सफलता से अभिभूत वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष वेंकैया नायडू, राजनाथ सिंह, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरूण जेटली, राष्ट्रीय महामंत्री अनंत कुमार, थावरचन्द गेहलोत, नरेन्द्रसिंह तोमर और अन्य राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने प्रदेश के कार्यकर्ताओं, कर्मठता, निष्ठा सेवा भावना का भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए उनके उत्साह को वंदनीय बताया। सभी की धारणा थी कि आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदेश में भाजपा की सरकार शिवराजसिंह चौहान के नेतृत्व में बनेगी और देश में भाजपा के नेतृत्व में बनने वाली सरकार का मार्ग मध्यप्रदेश से ही प्रशस्त होगा। शिवराजसिंह चौहान ने राष्ट्रीय नेतृत्व की चुनौती को अवसर के रूप में स्वीकार किया। प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा ने कार्यकर्ताओं की लगन की हार्दिक प्रषंसा की और विश्‍वास से जताया कि मध्यप्रदेश के देवदुर्लभ कार्यकर्ता आने वाली चुनौतियों का डंटकर सामना करेंगे और पार्टी के सर्वव्यापी, सर्वस्पर्शी बनाने के लक्ष्य को गांठ में बांधकर पूर्णपन से जुटेंगे।

कार्यकर्ता गौरव दिवस की प्रासंगिकता को चंद शब्दों में प्रभात झा ने इस तरह बयान किया कि ”कुछ लोग इतिहास पढ़ते है लेकिन भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता इतिहास गढ़ता है, गागर में सागर उड़ेल दिया”।

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