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प्रवक्‍ता ब्यूरो

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काशी के विद्वानों ने एक दैनिक अखबार में डा.मुरली मनोहर जोशी के संदर्भ में कांग्रेस प्रत्याशी के बगल में प्रकाशित भ्रामक विज्ञापन पर आपत्ति जताई है। काशी के प्रमुख विद्वानों और वैज्ञानिकों ने कांग्रेस और सपा प्रत्याशी से कुछ गंभीर सवालों पर तत्काल उत्तर चाहा है। इन विद्वानों में डा. कामेश्वर उपाध्याय, प्रोफेसर श्यामसुंदर शुक्ल, प्रोफेसर ओम प्रकाश सिंह, प्रोफेसर यू.के. चौधरी, डा.दीनानाथ सिंह,डा. नन्दू सिंह, प्रोफेसर जेपी लाल,प्रोफेसर नागेंद्र पाण्डेय, डा. सच्चिदानंद सिंह, डा. विजय सोनकर शास्त्री, आनन्दरत्न मौर्य आदि ने पूछा है कि कांग्रेस प्रत्याशी बताएं कि क्या वेदकाल में ब्राह्मण गोमांस खाते थे? आखिर कांग्रेस पार्टी ने स्कूली पाठयक्रम में आजादी के बाद से पढ़ाए जा रहे इस पाठ पर कभी आपत्ति क्यों नहीं की।विद्वानों ने पूछा है कि क्या गुरू तेगबहादुर और सरदार भगत सिंह, पं. चंद्रशेखर आजाद लुटेरे और आतंकवादी थे। और यदि ऐसा नहीं है तो कांग्रेस 40 साल तक एनसीईआरटी की स्कूली पुस्तकों में यह गंदी बात क्यों पढ़ाती रही? विद्वानों ने सवाल पूछा है कि कांग्रेस पार्टी ने सन् 70 के दशक में मां गंगा के प्रवाह पर टिहरी बांध का निर्माण किसके कहने पर शुरू किया? महामना मालवीय और ब्रिटिश सरकार के बीच के समझौते को क्यों कांग्रेस और समाजवादी सरकारों ने जनता की नजरों से छुपाकर रखा? गंगा एक्शल प्लान का सारा पैसा कांग्रेसी नेताओं ने दबाकर उसे स्विस बैंक में रखा या नहीं? यदि नहीं तो कांग्रेस पार्टी स्विस बैंक के खातेदारों और उनकी जमा धनराशि के बारे में स्विटजरलैण्ड सरकार से हिसाब मांगने में क्यों हिचक रही है।

विद्वानों ने पूछा है कि क्या यह सच नहीं है कि कांग्रेस नेतृत्व ने सन् 1998 में केंद्र में भाजपा सरकार बनने के पहले ही टिहरी बांध के पीछे गंगा की अविरल धारा को कैद कर दिया था। क्या यह सच नहीं है कि डा. जोशी ने केंद्र में मंत्री बनने के बाद स्कूली पाठयक्रम में हिंदुओं और तमाम अन्य भारतीय मत-पंथों के बारे में लिखी अनाप-शनाप बातों को पुस्तकों से हटवा कर बच्चों के लिए सर्व शिक्षा अभियान की शुरूआत की। आखिर कांग्रेस ने ग्रैंड ट्रंक रोड को शेरशाह सूरी ने बनवाया ये झूठा पाठ देश को क्यों पढ़ाया? डा. जोशी ने अपने कार्यकाल में देश को बताया कि ग्रैंड ट्रंक रोड शेरशाह सूरी नहीं वरन् सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और उनके प्रखर महामंत्री आचार्य चाणक्य के प्रयत्नों से बना था। सवाल यह भी पूछा गया है कि क्या अधिसूचना जारी कर देने मात्र से ही गंगा का प्रदूषण समाप्त हो जाएगा जबकि कांग्रेस पचास साल तक गंगा में तमाम शहरों का सीवरजल, टेनरी और बूचड़खानों का चमड़ा-रक्त आदि बहाने का पापकर्म करवाती रही और कांग्रेस नेतृत्व ने रूस की सरकार से करोड़ों रूपया लेकर गंगा का अविरल प्रवाह रूकवा दिया।

विभिन्न सरकारी दस्तावेजों का हवाला देते हुए विद्वानों ने कांग्रेस से जवाब मांगा है कि जोशी कमेटी ने गंगा के अविरल प्रवाह के लिए पहाड़ों को काटकर सुरंग बनाने की 450 करोड़ की जो परियोजना भारत सरकार का सौंपी उस रिपोर्ट पर अब तक केंद्र की कांग्रेस सरकार ने क्या कार्रवाई की। गंगा पर उत्तराखंड में केंद्र सरकार के एनटीपीसी ने ही अधिकांश योजनाएं पिछले पांच साल में शुरू की, कांग्रेस उन परियोजनाओं पर चुप क्यों है। भारतीय जनता पार्टी के घोषणापत्र में गंगा के प्रवाह को अविरल बनाने का मुद्दा शामिल कर लिया गया है। कांग्रेस जवाब दे कि उसने अपने घोषणापत्र में गंगा के प्रवाह को अविरल करने की घोषणा क्यों शामिल नहीं होने दी। गौमाता का राष्ट्रीय प्राणी घोषित करने में कांग्रेस क्यों चुप है। देश भर में चल रहे तमाम कत्लखानों जैसे देवनार, अलकबीर को कांग्रेस सरकारों ने बंद क्यों नहीं कराया। गीता जैसे पवित्र ग्रंथ को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित क्यों नहीं किया गया। विद्वानों ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस ने आजादी के बाद सिर्फ और सिर्फ हिंदू द्रोह को ही शरण दी है, एक विदेशी महिला के इशारों पर नाचने वाली कांग्रेस ने एक देसी होनहार युवा वरूण गांधी को जेल की सलाखों के पीछ बंद करवा कर अपनी जहरीली मानसिकता का परिचय दे दिया है, ऐसी कांग्रेस को इस बार जनता सत्ता से खदेड़कर उसके सारे पापकर्मों का हिसाब ले लेगी।

विद्वानों ने पूछा कि कांग्रेस का गंगा प्रेम तब कहां गुम हो जाता है जब सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा देकर कांग्रेसी कहते हैं कि राम भगवान तो कभी पैदा ही नहीं हुए। रामसेतु तोड़ने और गंगा को बांधने का षड़यंत्र क्या कांगेस ने नहीं रचा है। आखिर कांग्रेस रामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर क्यों बनने नहीं दे रही है। कांग्रेस बताए कि देश से करोड़ों बंगलादेशी घुसपैठियों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद अभी तक क्यों बाहर नहीं किया गया। आतंकवाद विरोधी कानून पोटा क्यों निरस्त किया गया और संसद पर हमले के आरोपी सजायाफ्ता अफजल गुरू को अब तक फांसी क्यों नहीं दी गई। (विश्व संवाद केंद्र, काशी)

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