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ए.आई.ई.ई.ई. में ‘प्रयास’ विद्यालय के 222 में 149 को मिली कामयाबी

छत्तीसगढ़ के नक्सल हिंसा पीड़ित जिलों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण देकर इंजीनियरिंग और मेडिकल की प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए राज्य शासन द्वारा दो वर्ष पहले शुरू की गई मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजना के उत्साहजनक नतीजे अब मिलने लगे हैं। इस योजना के तहत प्रदेश की राजधानी रायपुर के गुढ़ियारी में आदिम जाति और अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा ग्यारहवीं और बारहवीं के बच्चों के लिए आवासीय विद्यालय ‘प्रयास’ का संचालन किया जा रहा है। नक्सल प्रभावित गांवों के किसान और मजदूर परिवारों के बच्चों के लिए भी अब इंजीनियर बनने का सपना पूरा होने लगा है।

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने लगभग दो वर्ष पहले 26 जुलाई 2010 को इस संस्था का शुभारंभ करते हुए इसके लिए करीब साढ़े चार करोड़ रूपए की लागत से निर्मित विशाल भवन का लोकार्पण किया था। संस्था में मिली गुणवत्तापूर्ण कोचिंग और स्वयं की मेहनत से ‘प्रयास’ विद्यालय के दो बच्चों ने जहां इस वर्ष भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.आई.टी.) की कठिन प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल की है, वहीं आज घोषित अखिल भारतीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा (ए.आई.ई.ई.ई.) में संस्था के 222 बच्चों में से एक साथ 148 बच्चों ने शानदार कामयाबी हासिल कर एक नया कीर्तिमान बनाया है। किसी एक संस्था से एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का अखिल भारतीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा में कामयाब होना निश्चित रूप से काफी महत्वपूर्ण घटना है। इस कठिन चुनौतीपूर्ण प्रवेश परीक्षा में बस्तर और सरगुजा जिले के तीस-तीस, उत्तर बस्तर (कांकेर) जिले के 21, दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा) जिले के 14,नारायणपुर जिले के सात, बीजापुर के पांच, जशपुर जिले के दो, कोरिया जिले के एक और राजनांदगांव जिले के 38 छात्रों ने सफलता पायी है।

प्रयास संस्था के छात्र बस्तर संभाग के माकड़ी विकासखण्ड स्थित टेमगांव निवासी शंकर मरकाम अपनी इस सफलता से बेहद खुश हैं। प्रयास संस्था में चयनित होने के बाद उन्हें इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी का मौका मिला। इस सफलता के बाद अब वे सिविल इंजीनियर बनना चाहते हैं। शंकर ने आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय फरसगांव से 85 प्रतिशत अंकों के साथ 10 वीं की परीक्षा पास की थी। इस परीक्षा में सफल सुकमा जिले के छिंदगड़ विकासखण्ड स्थित पुसपाल गांव के निवासी छात्र प्रकाश कुमार बघेल बताते हैं कि पहले उन्होंने पीई.टी. परीक्षा के बारे में भी नहीं सुना था, आई.आई.टी. और ए.आई.ई.ई.ई. तो दूर की बात है। शंकर मरकाम के पिता किसान हैं। प्रकाश कुमार बघेल के पिता भी किसानी थे, जिनका निधन हो चुका है। इन दोनों छात्रों का कहना है कि राज्य सरकार की इस योजना के जरिए उन्हें पढ़ाई लिखाई की अच्छी सुविधा मिली। यहां आकर उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की। दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा) जिले के गौरगांव निवासी अरूण तारम भी अब मेकेनिकल इंजीनियर बनना चाहते हैं। बलरामपुर जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला सनवल से 78 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण महेन्द्र कुमार को भी राजधानी रायपुर की प्रयास संस्था में पढ़ने का मौका मिला है। इनके पिता मजदूरी करते हैं। ए.आई.ई.ई.ई. में चयन होने के बाद अब महेन्द्र सिविल इंजीनियर बनना चाहते हैं। इसी संस्था के राजनांदगांव जिले के मानपुर विकासखंड के मिचगांव निवासी कुलदीप ठाकुर ने भी इस परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। वे मेकेनिकल इंजीनियर बनाना चाहते हैं। राजनांदगांव जिले के राजाभानपुरी निवासी विनोद कुमार बंधे के पिता किसान है। इस परीक्षा में सफलता के बाद विनोद भी मेकेनिकल इंजीनियर बनना चाहते हैं।

उल्लेखनीय है कि ये सभी छात्र प्रयास आवासीय विद्यालय में रहकर लगातार दो वर्षो तक प्रतिदिन 12 से 18 घण्टे तक पढ़ाई करते रहे। आवासीय विद्यालय में नक्सल प्रभावित जिलों के चयनित 251 बच्चों को ग्यारहवी और बारहवीं कक्षा की पढ़ाई के साथ-साथ आई.आई.टी., एन.आई.टी., और पी.ई.टी. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कराई गई। इन छात्रों में 149 छात्रों ने ए.आई.ई.ई.ई. में सफलता प्राप्त की है। इसके पहले इसी बैच के दो छात्रों ने इस वर्ष भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.आई.टी.) की प्रवेश परीक्षा में सफलता प्राप्त की। इनमें से बस्तर राजस्व संभाग के फरसगांव क्षेत्र के ग्राम जुगानी निवासी सूर्य प्रकाश नेताम ने आदिवासी वर्ग के छात्रों में 405 वां और सरगुजा राजस्व संभाग के अंतर्गत बलरामपुर जिले के ग्राम भंवरमाल निवासी जयप्रकाश सिंह ने 780 वां स्थान हासिल किया ।

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