लेखक परिचय

शादाब जाफर 'शादाब'

शादाब जाफर 'शादाब'

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार हैं।

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gang-rape दमिनी के दर्द को अभी हम लोग सही तरह से भूले भी नही थे कि दिल्ली ने फिर से देश को एक ऐसा जख्म दे दिया जिसने देश की लगभग 125 करोड़ लोगो की आत्मा को लहू लुहान कर के रख दिया। महज पांच साल की बच्ची के साथ एक इंसान के जिस्म में छुपे हैवान ने दरिंदगी की सारी हदो को लांघ दिया। रूह कंपा देने वाला ये हादसा फिर से उसी दिल्ली में हुआ जिस दिल्ली को भारत का दिल कहा जाता है, जिस दिल्ली में सोनिया गांधी, मीरा कुमार, शीला दीक्षित, देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, संसद भवन और देश का भविष्य संवारने का दम भरने वाले देश के तमाम कैबिनेट और राज्य मंत्रियो के आलावा देश के सब से बडे न्याय के मंदिर सुप्रीम कोर्ट के जज और पुलिस के आला अफसर रहते है। इन सब के बावजूद एक छोटी से मासूम उस बच्ची ने जिस बच्ची को अपनों और परायों तक की पहचान मुश्किल से हो पाती हो, उस पर एक दरिंदे ने ऐसा जुल्म ढाया है कि आज ये मासूम मौत के इतने करीब है कि जिंदगी मिल जाये तो उस की ये जिंदगी मौत से बदत्तर बन चुकी है।

आज देश की हर मां अपनी बेटी के भविष्य को लेकर चिंतित है वजह है एक पाच साल की छोटी मासूम बच्ची के साथ बहुत ही क्रूर तरीके से देश की राजधानी दिल्ली में एक और रेप ?। बच्ची के साथ बिहार निवासी आरोपी मनोज ने हैवानियत की इंतहा कर दी। दिल दहला देने वाली इस घटना में डॉक्टरों ने ऑपरेशन करके बच्ची के यौनांग से दो मोमबत्ती और एक शीशी निकाली है। मासूम के गाल, होंठ और गले पर जख्म के निशान हैं, जिससे पता चलता है कि गला दबाकर उसे मारने की भी कोशिश की गई। अस्पताल में भर्ती होते वक्त पांच साल की ये मासूम असहनीय पीड़ा से तड़प रही थी। गौरतलब है कि पीडित बेहद गरीब ये बच्ची अपने गरीब मां बाप के साथ दिल्ली के गांधी नगर इलाके में किराए के मकान के प्रथम तल पर रहते थीं। गत 15 अप्रैल को घर में खेलते समय बच्ची लापता हो गई थी। जिसकी सूचना परिजनों ने पुलिस को दी। लेकिन पुलिस ने घर तक जाकर जांच करने की जहमत नहीं उठाई। 17 अप्रैल को परिजनों ने भूतल पर स्थित एक कमरे से रोने की आवाज सुनी तो उन्होने दिल्ली पुलिस को इस की सूचना दी। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने ताला तोड़ा तो पाया बच्ची खून से लथपथ पड़ी हुई थी। उसके गले पर दबाए जाने के निशान थे। गंभीर हालत में बच्ची को स्वामी दयानंद अस्पताल में भर्ती करवाया गया। पुलिस ने जांच में पाया गया कि मुजफ्फरपुर बिहार, निवासी मनोज नामक किराएदार पांच-छह दिन पहले ही उस कमरे में रहने आया था। उसके खिलाफ पहले भी एक छेड़छाड़ का मामला दर्ज है। बच्ची से रेप करने के बाद उसने उसे मारने की कोशिश की। जब बच्ची बेहोश हो गई तो वह उसे मरा समझकर कमरे में ताला लगा फरार हो गया।

पिछले दिनो जब दामिनी के साथ रेपकांड हुआ था तब देश के कुछ जिम्मेदार राजनेताओ ने बहुत ही उलूल जुलूल बयान दिये थें मध्यप्रदेश के मंत्री विजयवर्गीय ने कहा था कि महिलाएं मर्यादा नहीं लांघें। मर्यादा का उल्लंघन होता है तो सीता का हरण होता है। जब लक्ष्मण रेखा हर व्यक्ति की खींची हुई है। उस लक्ष्मण रेखा को कोई पार करेगा तो रावण सामने बैठा है। वह सीता का अपहरण कर लेगा। राष्ट्रीय स्वयंसवेक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि बलात्कार की घटनाएं इंडिया में ज्यादा होती हैं, भारत में नहीं। महिला कृषि वैज्ञानिकमहिला कृषि वैज्ञानिक डॉ. अनीता शुक्ला ने दिल्ली गैंगरेप मामले में पीड़िता को ही जिम्मेदार ठहरा दिया था। उन्होंने कहा था कि महिलाएं ही मर्दों को उकसाती हैं। पीड़िता पर सवाल उठाते हुए कहीं थीं कि 10 बजे रात को लड़की घर से बाहर क्या कर रही थी? दोस्त के साथ रात को बाहर निकलेगी तो यही होगा। एक बाबा आशाराम ने कहा था कि ताली दोनों हाथों से बजती है। कहीं न कहीं लड़की का ही दोष है, वह चाहती तो उन दोषियों में से किसी को भी भाई कहकर उनके हाथ-पैर जोड़ सकती थी। जिससे उसकी जान बच जाती। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। हरियाणा के एक नेता जींद जिले की खाप के नेता जीतेंद्र छत्तर ने कहा था कि फास्ट फूड खाने से युवक-युवतियों का हार्माेनल संतुलन बिगड़ रहा है जिस कारण रेप जैसी घटनाएं हो रही हैं। आंध्र के डीजीपी वी. दिनेश रेड्डी ने कहा था कि महिलाओं के हल्के कपड़े बलात्कार के लिए जिम्मेदार हैं। कर्नाटक के महिला और शिशु कल्याण मंत्री सी सी पाटिल ने रेप से बचने के लिए महिलाओं को हिदायत देते हुए कहा था, मैं निजी तौर पर इस हक में नहीं हूं कि महिलाएं भड़काऊ कपड़े पहनें और यह सोचें कि वे चाहे जो पहनें उन्हें सम्मान की नजरों से देखा जाए। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आजादी को रेप की वजह बताया था। उन्होंने कहा था कि लड़के-लड़कियों को माता-पिता द्वारा दी गई आजादी से ही बलात्कार जैसी घटनाएं हो रही हैं। टीएमसी विधायक चिरंजीत चक्रवर्ती ने रेप पर दिए गए बयान में कहा था किसी वारदात के लिए कुछ हद तक लड़कियां भी जिम्मेदार हैं क्यों कि हर रोज उनकी स्कर्ट छोटी हो रही हैं।

सवाल यह उठता है कि समाज के कुछ ठेकेदार अक्सर पहनावे और संस्कृति का रोना रोते हुए बलात्कर की वजह बताते हैं। महिलाओं पर लगाम कसने वाले ये नेता और ठेकेदार ऐसे हादसों पर चुप क्यों हो जाते हैं? पांच साल के इस बच्ची का वो कौन सा पहनावा गलत था जिसकी वजह से इस हैवान ने सितम ढा दिया? बच्ची ने वो कौन सी सीमा लांच दी जिसकी वजह से आज वह जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है। चलिए महिलाओं को नसीहत देने वाले समाज के कुछ बड़े ठेकेदारों का बयान बताते हैं। आखिर इंसान अभी और कितना गिरेगा ये कहना बहुत ही मुश्किल होता जा रहा है। दुनिया आखिर कहा आ गई है समझ नही आ रहा। आखिर इंसान के इस पतन का कौन जिम्मेदार है? बार बार खुद से सवाल करने पर भी मुझे इस का जवाब नही मिल पा रहा है। अल्लाह, भगवान को पूजने वाला ये इंसान शैतान का पुजारी क्यो कैसे बना शायद भगवान भी आज इस पर विचार कर रहा होगा।

मासूम पर जुल्म ढाने वाला दरिंदा मनोज बिहार के मुजफ्फरपुर से गिरफ्तार किया जा चुका है। अदालत ने आरोपी को 23 अप्रैल तक ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया पर क्या देश के कानून और कानून के रखवालो पर पांच साल की मासूम गुडिया के गरीब माता पिता को यकीन करना चाहिये कि उन्हे इंसाफ मिलेगा। जब की वो देख वुके है कि उन की मासूम बच्ची के जख्मो का सौदा यदि मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ता उन के साथ न आते तो पुलिस ने लगभग इस दर्दनाक रेप का भी सौदा तय कर ही लिया था। आखिर इस का जवाब कौन देगा और किस को ये जवाब देना चाहिये कि क्या पुलिस का ये रवैय्या सही था। जिस पुलिस को इंसानी हकूक की रक्षा की शपथ दिलाई जाती है उसी पुलिस के आला अफसरो द्वारा देश के सम्मानित नागरिको के साथ क्या इस प्रकार का बरताव करना चाहिये? पांच साल की बच्ची के रेप की बोली पुलिस ने जिस प्रकार लगाकर मजदूरी करने वाले बच्ची के पीडित गरीब माता-पिता को प्रताडित और इस घिनौने, क्रूर रेप के आरोपी को बचाने की कोशिश की वो बहुत ही शर्मनाक है। जिंदगी बची तो सिर्फ पांच साल की उम्र में जिंदगी का सब से बडा दर्द शायद जिंदगी भर याद रहेगे इस मासूम गुडिया को।

शादाब जफर’’शादाब’’

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