लेखक परिचय

लक्ष्मी जायसवाल

लक्ष्मी जायसवाल

दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा तथा एम.ए. हिंदी करने के बाद महामेधा तथा आज समाज जैसे समाचार पत्रों में कुछ समय कार्य किया। वर्तमान में डायमंड मैगज़ीन्स की पत्रिका साधना पथ में सहायक संपादक के रूप में कार्यरत। सामाजिक मुद्दों विशेषकर स्त्री लेखन में विशेष रुचि।

Posted On by &filed under कविता.


लक्ष्मी जयसवाल

तलाश रही हूं खुद को
कौन हूं ‘मैं’
‘मैं ‘ हूं ‘मैं ‘ या
बस हूं नाम की ‘मैं ‘
वजूद है मेरा कोई या
बिन वजूद की हूं ‘मैं’
तलाश रही हूं खुद को
कौन हूं ‘मैं’
‘मैं ‘ हूं ‘मैं ‘ या
बस हूं नाम की ‘मैं ‘
‘मैं ‘ में हूं कहां ‘मैं ‘
जाने कहां खो गई ‘मैं ‘
खो गई या थी ही नहीं ‘मैं ‘
सपना थी या कोई खिलौना हूं ‘मैं ‘
जो बिन चाभी के चलता है और
अपने मालिक के ढंग में ढलता है
तलाश रही हूं खुद को
कौन हूं ‘मैं’
‘मैं ‘ हूं ‘मैं ‘ या
बस हूं नाम की ‘मैं ‘
अपने होने का मतलब
अब तक न जान पाई हूं
अपने वजूद को
अब भी न पहचान पाई हूं
अपनापन चाहा था जो
अब भी न मिल पाया है
अपने वजूद की तलाश ने
आज फिर मुझे रुलाया है
तलाश रही हूं खुद को
कौन हूं ‘मैं’
‘मैं ‘ हूं ‘मैं ‘ या
बस हूं नाम की ‘मैं ‘

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz