लेखक परिचय

सिद्धार्थ शंकर गौतम

सिद्धार्थ शंकर गौतम

ललितपुर(उत्तरप्रदेश) में जन्‍मे सिद्धार्थजी ने स्कूली शिक्षा जामनगर (गुजरात) से प्राप्त की, ज़िन्दगी क्या है इसे पुणे (महाराष्ट्र) में जाना और जीना इंदौर/उज्जैन (मध्यप्रदेश) में सीखा। पढ़ाई-लिखाई से उन्‍हें छुटकारा मिला तो घुमक्कड़ी जीवन व्यतीत कर भारत को करीब से देखा। वर्तमान में उनका केन्‍द्र भोपाल (मध्यप्रदेश) है। पेशे से पत्रकार हैं, सो अपने आसपास जो भी घटित महसूसते हैं उसे कागज़ की कतरनों पर लेखन के माध्यम से उड़ेल देते हैं। राजनीति पसंदीदा विषय है किन्तु जब समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का भान होता है तो सामाजिक विषयों पर भी जमकर लिखते हैं। वर्तमान में दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, हरिभूमि, पत्रिका, नवभारत, राज एक्सप्रेस, प्रदेश टुडे, राष्ट्रीय सहारा, जनसंदेश टाइम्स, डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट, सन्मार्ग, दैनिक दबंग दुनिया, स्वदेश, आचरण (सभी समाचार पत्र), हमसमवेत, एक्सप्रेस न्यूज़ (हिंदी भाषी न्यूज़ एजेंसी) सहित कई वेबसाइटों के लिए लेखन कार्य कर रहे हैं और आज भी उन्‍हें अपनी लेखनी में धार का इंतज़ार है।

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-सिद्धार्थ शंकर गौतम-

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देश में भीषण गर्मी का दौर जारी है। एक ओर सूरज जहां आग बरसा रहा है वहीं मानसून को लेकर मायूसी बढ़ती जा रही है। ३० मई तक मानसून आने के पूर्वानुमान ध्वस्त हो चुके हैं और अब जनता से लेकर सरकार के माथे पर बल पड़ना शुरू हो गए हैं। आमतौर पर केरल में मानसून की आमद १ जून को होती है किन्तु मौसम विभाग ने मानसून की अनुमानित तारीख ३० मई घोषित की थी। हालांकि मौसम विभाग के प्रमुख डीएस पई का कहना है कि मानसून एक-दो दिन देरी से केरल पहुंचेगा किन्तु उसके बाद होने वाली झमाझम बारिश पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। दरअसल मानसूनी हवाएं फिलहाल दक्षिणी श्रीलंका में हैं और प्रशांत महासागर में बन रहा अलनिनो प्रभाव इन पर असर डाल सकता है। इससे भारत में मानसून को लेकर निराशा बढ़ सकती है। वैसे भी पिछले महीने २२ अप्रैल को जारी अपने पूर्वानुमान में भारतीय मौसम विभाग ने कहा था कि इस बार मानूसन सामान्य से कम रहेगा। पूरे देश में बारिश औसत की ९३ फीसद होने की बात मौसम विभाग ने की थी। मौसम विभाग के आंकड़ों पर यूं तो सवालिया निशान उठते रहे हैं मगर कई बार पूर्वानुमान इतने सटीक बैठे हैं कि उनके द्वारा भविष्य की रणनीति बनाने में मदद मिलती रही है। फिलहाल मानसून की आमद से पूर्व इस वक़्त देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। मैदानी इलाकों में तो फिलहाल आसमान से बरसती आग से राहत मिलने की कोई संभावना नहीं दिखाई देती। देशभर में लू के चलते अब तक मरने वालों की तादाद २२०० से अधिक हो गई है। मैदानी इलाकों में औसत तापमान ४० डिग्री सेल. से अधिक ही रिकॉर्ड किया जा रहा है। एक अंतर्राष्ट्रीय डिज़ाएस्टर डेटा EM-DAT के अनुसार जारी वर्ष में गर्मी से होने वाली मौतों की संख्या भारत के इतिहास में दूसरी जबकि इतिहास में पांचवें नंबर पर सबसे अधिक है। EM-DAT का कहना है कि वर्ष १९९८ में बहुत अधिक तापमान से देश के इतिहास में सबसे अधिक २५४१ लोग मारे गए थे। देश के दक्षिणी राज्यों विशेषकर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में सबसे अधिक १९७९ मौतें हुई हैं। इसी प्रकार पूर्वी प्रांत ओडिशा में १७ जबकि देश के दूसरे भागों में नौ लोग मारे गए हैं। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में सरकारों ने भीषण गर्मी से बचने के लिए जनचेतना का कार्यक्रम आरंभ कर रखा है।

इसी बीच एक अमेरिकी एजेंसी एक्यूवेदर ने भारत में भीषण सूखा पड़ने की आशंका जताई है। एजेंसी का आंकलन है कि प्रशांत महासागर में बन रही परिस्थितियों के चलते इस बार मानसून कमजोर रहेगा। महासागर से कई बड़े तूफान उठने वाले हैं जो मानसून को भटका देंगे। इसका असर न केवल भारत बल्कि पाकिस्तान पर भी पड़ेगा। एजेंसी के प्रवक्ता के मुताबिक, अलनिनो पर भारतीय मौसम विभाग की आशंका बिल्कुल सही है, लेकिन उन्होंने हालात को कमजोर करके लोगों के सामने रखा है, ताकि किसी तरह ही हड़बड़ाहट पैदा नहीं हो। ऐक्यूवेदर के मुताबिक अकाल की यह स्थिति एल नीनो प्रभाव की वजह से पैदा होगी। एक्यूवेदर के अनुसार इस संभावित इस सूखे और अकाल से भारतीय उपमहाद्वीप में १ अरब लोग प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि भारतीय मौसम विभाग के अनुसार जब पिछले वर्ष १२ फीसद कम बारिश हुई थी तो हालात को संभाल लिया गया था, तब इस साल भी ऐसा किया जा सकता है। किन्तु भावी हालात को देखते हुए सरकार एवं अन्य संस्थाओं को अभी से इस भविष्यवाणी के अनुसार भविष्य की रणनीति बनाना शुरू कर देना चाहिए वरना सूखे से हालात और बुरे हो सकते हैं। जनता भी भविष्य के अनुमानित खतरे को भांपते हुए जल संचय करे और अपने आस-पास पर्यावरण संरक्षण का काम करे, तभी इस संभावित स्थिति से निपटा जा सकेगा।

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