लेखक परिचय

रोहित कुमार कश्यप

रोहित कुमार कश्यप

पिता का नाम- श्री भगवती प्रसाद संस्थान- रेलिएंट टेक्नोलॉजीज, लखनऊ

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भारतीय समाज में किसी नए प्रयोग को लेकर इतनी स्वीकार्यता कभी नहीं थी, जितनी कम समय में वेब मीडिया ने अर्जित की है। भारत की लगभग 70 प्रतिशत जनता हिंदी भाषा को केवल समझने में ही नहीं, उसमें से अधिकतर लोग इसे पढ़ने-लिखने में भी सक्षम है। हिंदी अखबारों, इंटरनेट साइट्स पुस्तकों, फिल्मों, चैनल्स (न्यूज एवं मनोरंजक दोनों) की बढ़ती संख्या इसका प्रमाण भी है। इसका एक और प्रमाण वेब मीडिया में बढ़ता हिंदी का प्रभाव है। हिंदी के विकास में वेब मडिया के योगदान को नकारा नहीं जा सकता है। आज अंग्रेजी को टाइप करने का एक ही ‘की-बोर्ड’ है, लेकिन हिंदी में ऐसी स्थिति नहीं है। हिंदी में टाइप करने के लिए अनेक ‘की-बोर्ड’ उपलब्ध हैं। अब तो ऐसे साफ्टवेयर भी उपलब्ध है जो आपके अंग्रेजी या रोमन में लिखे शब्दों को तुरंत हिंदी में अनुवादित कर देते हैं। ‘विस्टा, इन स्क्रिप्ट, यूनिकोड, गूगल आदि ने अपने संशोधित एवं विकसित ‘की-बोर्ड’ हिंदी के लिए बनाए हैं, ताकि हिंदी वेब मीडिया के दौर में पिछड़ न जाए।

सूचनाएं आज मुक्त हैं और वे इंटरनेट के पंखों पर उड़ रही हैं। सूचना 21 वीं सदी की सबसे बड़ी ताकत बनी तो वेब मीडिया, सभी उपलब्ध मीडिया माध्यमों में सबसे लोकप्रिय माध्यम बन गया। सूचनाएं अब ताकतवर देशों, बड़ी कंपनियों और धनपतियों द्वारा चलाए जा रहे प्रचार माध्यमों की मोहताज नहीं रहीं। वे कभी भी वायरल हो सकती हैं और कहीं से भी वैश्विक हो सकती हैं, सूचनाओं ने अपना अलग गणतंत्र रच लिया है।

इलेक्ट्रानिक एवं प्रिन्ट मीडिया में संपादक, समाचार संपादक, उपसंपादक आदि पद होते हैं, जो भाषिक त्रुटियों को दूर करने का कार्य करते हैं। इसलिए इन्हें इलेक्ट्रानिक एवं प्रिन्ट मीडिया का द्वारपाल भी कहा जाता है। मीडिया की व्यापक दुनिया में अब कई ऐसे माध्यम भी हैं, जहाँ तक इन द्वारपालों की पहुँच मुमकीन नहीं है। ‘ब्लाग’ एक ऐसा ही माध्यम है, जो तमाम तरह के द्वारपालिक अवरोधों से मुक्त है। ‘ब्लाग’ के माध्यम से कोई भी व्यक्ति, किसी भी वक्त अपनी बात को करोड़ों लोगों तक पहुँचा सकता है। उसके इस कार्य में भाषा की अहम भूमिका होती है। अतः वह अपनी समझ, स्तर के आधार पर अपनी भाषा का चयन करता है। ध्यान देने की बात है कि यहाँ वह ‘ब्लागर’ मानकों का पालन करने या न करने में पूरी तरह स्वतंत्र होता है। यही वजह है कि वेब मीडिया में हिंदी की अनेक शैलियाँ मिलती है। कहीं सामान्य हिंदी, कहीं साहित्यिक हिंदी, कहीं क्षेत्रीय भाषा युक्त हिंदी, कहीं उर्दू-फारसी मिश्रित हिंदी, कहीं ग्रामीण हिंदी और कहीं-कहीं तो ‘हिंग्लिश’ हिंदी का भी प्रयोग मिलता है। हिंदी की उक्त शैलियाँ आजकल पूरे वेब मीडिया के परिदृश्य पर छाई हुई है।

वेब मीडिया वर्तमान समय में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वेब मीडिया किसी भी सर्च इंजन पर ‘क्लिक’ करते ही हिंदी का अमूल्य, अनंत संसार हमारे सामने उपस्थित कर देता है। वेब मीडिया ने हिंदी को गौरवपूर्ण स्थान दिलाने में सहयोग किया है। वेब मीडिया के प्रभावस्वरूप ही आज भारत के अलावा और भी कई देशों में हिंदी संबंधित कार्य हो रहे हैं। कई अखबार एवं पत्र-पत्रिकाएँ आनलाइन निकलने लगी हैं। नयी-नयी संस्थाएँ दिन-प्रतिदिन वेब मीडिया के माध्यम से हिंदी की सेवा करने में निरंतर संलग्न है। आज शिक्षा से जुड़ा प्रत्येक माध्यम वेब मीडिया पर उपलब्ध है। विज्ञान, स्वास्थ्य, साहित्य, फिल्म, शिक्षा, ज्योतिष, सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक, व्यापार, सरकारी एवं निजी संस्थान, खेल, पर्यटन, ग्रामीण, क्षेत्रीय, निजी पृष्ठ आदि विविध विषयों पर समुचित सामग्री आज वेब माध्यम पर हिंदी में सर्व सुलभ है। विभिन्न प्रकार की पत्र-पत्रिकाएँ, अखबार आदि निरंतर अपने को अपडेट करते रहते हैं, ताकि कोई भी हिंदी जानने वाला वैश्विक परिदृश्य में स्वयं को हिंदी से जुड़ा हुआ महसूस कर सकें। अद्यतन जानकारी उसकी अपनी भाषा में उसे मिलती रहे, यही वेब मीडिया की स्वीकार्यता व सफलता का एक प्रमाण भी है।

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