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प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

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-अभिषेक तिवारी-
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आबादी भारत के एक शहर जितनी भी नहीं लेकिन सुपरपावर चीन को ‘सबक’ सिखाने का काम किया है भूटान ने…! दरअसल, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूटान यात्रा के एक ही दिन बाद भूटान की तरफ से ऐसा बयान आया , जिससे भारत राहत की सांस ले सकता है। भूटान चीन को अपने यहां दूतावास बनाने की इजाजत नहीं दी है। भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोब्गे के इस बयान से कि थिंपू में चीनी दूतावास को इजाजत देने की कोई संभावना नहीं है, चीन को करारा जवाब गया है। तोब्गे ने भारतीय न्यूज चैनल से कहा, ‘भूटान में चीन का दूतावास खुलने का कोई सवाल पैदा नहीं होता।’
यह बयान ऐसे में आया है जबकि भारत इस बात को लेकर चिंतित है कि चीन भूटान से कूटनीतिक रिश्ते शुरू करना चाहता है। भारतीय प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान दोनों देशों के नेताओं के बीच कूटनीतिक संबंधों को लेकर काफी विचार विमर्श हुआ। तोग्बे ने नरेंद्र मोदी की इस बात का समर्थन किया है कि मजबूत भारत उसके पड़ोसियों के लिए अच्छा है। उन्होंने कहा, मोदी की यात्रा का सबसे बड़ा नतीजा यह निकला है कि भारत के साथ भूटान की मित्रता की बात को दोहराया गया है। इस यात्रा से बीटूबी यानी ‘भारत के लिए भूटान, भूटान के लिए भारत का नारा निकला है।’ भूटानी प्रधानमंत्री ने भारत की तरफ से मिले इस आश्वासन के लिए भी तसल्ली जताई कि उनके देश को भारत की ओर से निर्बाध खाद्य निर्यात होता रहेगा। अब देखने वाली बात यह होगी कि चीन की तरफ से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है। लेकिन एक बात तो साफ है कि कोई भी बड़ा फैसला लेने के लिए आपके अंदर हिम्मत, जोश और जज्बा होना चाहिए। आज भूटान ने संत कबीर जी का वो दोहा तो फिर से सच साबित कर दिया है कि-
बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर।।

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