लेखक परिचय

आलोक कुमार

आलोक कुमार

बिहार की राजधानी पटना के मूल निवासी। पटना विश्वविद्यालय से स्नातक (राजनीति-शास्त्र), दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नाकोत्तर (लोक-प्रशासन)l लेखन व पत्रकारिता में बीस वर्षों से अधिक का अनुभव। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सायबर मीडिया का वृहत अनुभव। वर्तमान में विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के परामर्शदात्री व संपादकीय मंडल से संलग्नl

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 india chinaकूटनीतिक दृष्टि से एक सार्थक व सकारात्मक पहल

भारत – चीन सीमा विवाद पर आज पहली बार दोनों देशों के प्रमुखों ने सार्वजनिक तौर पर संयुक्त रूप से ये बात खुल कर कही कि सीमा विवाद एक गंभीर मसला है और इसका जल्द ही समाधान निकाला जाएगा l चीनी राष्ट्रपति का ये कहना ही कि “ सीमा विवाद के कारण तनाव अब इतिहास का विषय है और इसके कारण दोनों देशों के सम्बन्धों में भविष्य में कोई असर नहीं पड़ेगा ” इस शिखर वार्ता का सबसे सकारात्मक पहलू रहा l कूटनीति की दृष्टि से देखें तो तात्कालिक रूप से इसे ‘एडवांटेज – इंडिया’ कहा जा सकता है l भारत के प्रधानमंत्री ने अपने सम्बोधन में तीन बार “ Peace & Tranquility ” की बात कही जो साफ़ तौर पर भारत के रूख और भारत के द्वारा सीमा विवाद की गंभीरता के संबंध में चीन को दिए गए कड़े संदेश को दर्शाता है l

चीनी राष्ट्रपति ने अपने सम्बोधन में कहा कि “आज की वैश्विक परिस्थितियों में भारत और चीन का मजबूत होना और एक स्वर में बोलना निहायत ही जरूरी है ” चीनी राष्ट्रपति यहाँ अंतर्राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में “Balancing of Power” की कूटनीतिक अवधारणा की ओर इशारा करते हुए दिखे l वैश्विक या ऐशियाई परिवेश में आज निःसन्देह तौर पर चीन भारत से हरेक मायने में सशक्त है लेकिन भारत की महत्ता अनेक मायनों में चीन के लिए भी उतनी ही है जितनी एक विकसित राष्ट्र के रूप में उभरने हेतू भारत को चीन की l भारत आज चीन के लिए भी सबसे बड़ा बाजार है और चीन का मौजूदा नेतृत्व , जिसे कूटनीतिक – विशेषज्ञ आधुनिक चीन का सबसे खुली सोच वाला और लिबरल नेतृत्व मानते हैं , इस बात को भली – भांति समझ रहा है कि नरेंद्र मोदी की मौजूदा सरकार के रहते हुए सीमा विवाद को उलझा कर या हाशिए पर रखकर भारत से अच्छे व्यापारिक सम्बन्धों की उम्मीद रखना बेमानी है l आज के परिवेश में एक बात तो तय है कि लड़ाई से कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता और ये भी कटु सत्य है कि चीन के सामरिक सामर्थ्य के आगे हम अभी कहीं नहीं टिकेंगे और रातों-रात हम समर्थ हो भी नहीं सकते , ऐसे में कूटनीति ही सबसे सही रास्ता है और भारत का विस्तृत बाजार बहुत बड़ा कूटनीतिक – एडवांटेज l कूटनीति के एक दूसरे दृष्टिकोण  से भी ये तर्कसंगत दिखता है , आज चीन के संबंध अपने लगभग सारे अहम पड़ोसियों से तल्ख हैं और भारत की जापान के साथ बढ़ती नज़दीकियों को देखते हुए चीन भारत के साथ अनावश्यक रूप किसी भी विवाद को बेवजह तूल नहीं देना चाहेगा l

आज जो भी द्रष्टव्य हुआ उसे देखकर ये कहा जा सकता है कि भारत व चीन एक सार्थक व सकारात्मक सोच के साथ परस्पर सहयोग की बात करते दिख रहे हैं और निःसन्देह मोदी की सरकार इस बात के लिए बधाई की पात्र है कि उसने पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों और परंपराओं से अलग हटकर सीमा विवाद जैसे जटिल मुद्दे पर चीन के साथ आँख में आँख मिलाकर बात की l

आलोक कुमार

 

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