लेखक परिचय

डा. राधेश्याम द्विवेदी

डा. राधेश्याम द्विवेदी

Library & Information Officer A.S.I. Agra

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डा. राधेश्याम द्विवेदी
india-pakistan-warयुद्ध के लिए कितना तैयार हिंदुस्तान:- 17 वर्ष पूर्व पाकिस्तान की नादानी ने करगिल युद्ध को जन्म दिया था। इस युद्ध में पाकिस्तान को करारी शिकस्त मिली, लेकिन वो आज भी इससे सबक लेने को तैयार नहीं है। आज भी पाक के हुक्मरान भारत को धमकी देने से बाज नहीं आते। पाकिस्तान की शह पर हिजबुल का प्रमुख आतंकवादी सलाउद्दीन भारत पर कश्मीर का नाम लेकर जहर उगला है। सलाउद्दीन ने कश्मीर में कथित आजादी की लड़ाई पर बोलते हुए उसने भारत के खिलाफ परमाणु युद्ध तक की धमकी दे डाली है। ऐसे में जानते हैं कि अगर आज भारत और पाकिस्तान के बीच जंग छिड़ जाती है तो हम उसके लिए कितने तैयार हैं।
मारक क्षमता बढ़ी:- करगिल युद्ध के दौरान एमआई-35 फाइटर प्लेन निष्प्रभावी साबित हुए थे। इसलिए भारत को मिग-27 और मिग-29 का प्रयोग करना पड़ा था। पहली बार भारत को यह अहसास हुआ कि उसके पास पर्वतीय क्षेत्रों में युद्ध करने के लिए हवाई मारक क्षमता का तंत्र बहुत कमजोर है। भारत ने सबक लेते हुए पिछले 17 वर्षों में अपनी हवाई मारक क्षमता में अपार वृद्धि की है। भारत का फ्रांस से रफेल सौदा, इजरायल से एसयू-30एमकेआई को अपडेट करने की योजना, बीएम-30 स्मर्च मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर एयरफोर्स को और मारक बनाएगा। 22 अपाचे और 15 चिनूक हेलिकॉप्टर ने वायुसेना को करगिल जैसे युद्धों के लिए सक्षम बना दिया है। वायु सेना खुद का हेलिकॉप्टर एलसीएच विकसित कर रही है, जो इस तरह के युद्धों में कारगर होगा।
मजबूत निगरानी तंत्र:- करगिल युद्ध में पाक सेना ने फायरफाइंडर वीपन का इस्तेमाल कर भारतीय सेना को बहुत परेशान किया था। इस कमी को दूर करने के लिए भारत ने अपने दो माउंटेन डिवीजन के लिए 145 एम-777 अल्ट्रा लाइट होवित्जर्स डील कर लिए हैं। ये लाइट गन हैं, जिन्हें चिनूक और हैवी हेलीकॉप्टर के जरिए कहीं भी ले जाया जा सकता है। यह करगिल जैसे युद्धों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। इसके अलावा भारत यूएवी जैसी आईएआई सर्चर और आईएआई हेरोंस से भी सेना को लैस करने में लगा है।
कमजोर पक्षों पर ध्यान:- करगिल युद्ध में भारतीय सेना के कई कमजोर पहलू उभरकर सामने आए थे। इस बात के मद्देनजर आर्टिलरी वीपंस क्षमता में बढ़ोतरी, पर्वतीय क्षेत्रों में भारतीय सैनिकों के तत्काल तैनाती, बेहतर प्रशिक्षण पर जोर, राजनेता और सेना के बीच बेहतर तालमेल, पहले से ज्यादा आर्मी बेस, बंकर्स, एयरफील्ड तैयार करने पर जोर दिया गया है।
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सबसे भारी बमबारी:-करगिल की लड़ाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस युद्ध में वायुसेना के करीब 300 विमान उड़ान भरते थे। 300 से अधिक तोपों, मोर्टार और रॉकेट लॉन्चरों ने रोजाना करीब 5,000 बम फायर किए थे। युद्ध में तोपखाने से 2,50,000 गोले और रॉकेट दागे गए। दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह पहली ऐसी लड़ाई थी, जिसमें किसी एक देश ने दुश्मन देश की सेना पर इतनी अधिक बमबारी की थी।
अब करगिल जैसी स्थिति को पैदा करना किसी के लिए मुमकिन नहीं है। क्योंकि भारत ने सियाचिन और एलओसी के क्षेत्र में हर उस गैप को भर दिया है जहां से पाकिस्तानी सेना के जवान घुसपैठिये के रूप में प्रवेश करते थे।
परमाणु युद्ध की धमकी ही इकलौती ढाल:-चार युद्ध में करारी शिकस्त झेल चुके पाकिस्तान के जेहन में अब ये बात कूट-कूट कर भर चुकी है कि भारत के सामने उसके पास इकलौती सबसे बड़ी ढाल परमाणु बम ही है। 1998 के परमाणु परीक्षणों के बाद से ही पाकिस्तान लगातार अपने परमाणु हथियारों के जखीरे को बढ़ा रहा है। वो दुनिया का इकलौता मुल्क है जो यूरेनियम और प्लूटोनियम दोनों पर आधारित परमाणु बम कार्यक्रम को चला रहा है। बदकिस्मती से अगर परमाणु युद्ध होता है तो भारत के पास भी सुखोई जैसे लड़ाकू विमान, पृथ्वी और अग्नि जैसी मिसाइलें जिनसे परमाणु हथियार दागा जा सकता है।भारत की परमाणु नीति पहले हमला न करने की है इसलिए वो परमाणु पनडुब्बी और उनसे छोड़ी जा सकने वाली मिसाइलों को तेजी से बना रहा है। ये मुमकिन है कि बड़े खतरे की स्थिति में पाकिस्तान कभी पहला परमाणु हमला कर भारत के बड़े हिस्से को तबाह कर दे, लेकिन इतना तय है कि भारत के पास जिस तरह से परमाणु पलटवार की क्षमता है, उसकी बदौलत वो पूरे पाकिस्तान को तबाह कर सकता है। हालांकि दुनिया भर के जानकार मानते हैं कि दोनों मुल्कों में परमाणु युद्ध हुआ तो दोनों तरफ से करीब एक अरब लोग मारे जा सकते हैं। पाकिस्तान की नीति आतंकवाद को लेकर बदल नहीं रही।
हिरोशिमा जैसा विनाश होगा:-अगर आतंकवादियों के हाथ एक भी परमाणु बम लग जाए तो क्या होगा? शायद कुछ वैसा ही जैसा 70 साल पहले हिरोशिमा में हुआ था। 6 अगस्त 1945 की वो सुबह जब हिरोशिमा पर अमेरिका ने परमाणु बम गिराया था तो जमीन से 16 किलोमीटर की उंचाई तक आग का बवंडर उठ खड़ा हुआ था। तापमान 4000 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा था। लोग भाप बनकर आग के गोले में गुम हो गए थे। कुछ ही पलों में हिरोशिमा शहर शमशान बन गया था। लेकिन उससे भी बड़ा खतरा है परमाणु युद्ध का। अगर मान लीजिए कि भारत पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध छिड़ जाए तो क्या होगा?
परमाणु युद्ध की धमकी:-पाकिस्तानी आतंकी संगठन हिजबुल के चीफ सलाहुद्दीन ने भारत को धमकी देते हुए कश्मीर के लिए परमाणु युद्ध करने की चेतावनी दी है। भारत पर परमाणु हमला आतंकी संगठनों के लिए महज एक मजाक या शौक हो सकता है लेकिन कुछ लोग यह नहीं जानते कि भारत-पाकिस्तान के बीच न्यूक्लियर वार में दुनिया की लगभग आधी आबादी खत्म हो जाएगी और बचे हुए लोगों को एक बार फिर सभ्यता का निर्माण करना होगा। वैज्ञानिकों के एक दल द्वारा किए गए अध्ययन को सही माने तो दोनों देशों की जंग इतिहास को पलट कर मानवता को फिर एक बार सैकड़ों वर्ष पुराने काल में ले जाएगी। दोनों देश परमाणु हथियारों से लैस हैं। ऐसे में अगर भारत-पाक में जंग होती है तो दुनियाभर में अकाल और भुखमरी के आसार जताए गए हैं। इस युद्ध से दुनिया की एक-चौथाई जनसंख्या यानी दो अरब से अधिक लोगों की मौत हो सकती है। ऐसा भी हो सकता है कि भारत और पाकिस्तान के साथ ही चीन की भी पूरी की पूरी मानवजाति खत्म हो जाए।
100 मिसाइल ही काफी:- इंटरनेशनल फिजिशंस फॉर द प्रिवेंशन ऑफ न्यूक्लियर वॉर (आईपीपीएनडब्ल्यू) के सह-अध्यक्ष एरा हेलफांद के अनुसार धरती पर किसी भी रूप में होने वाले सीमित परमाणु युद्ध से वैश्विक स्तर पर उससे भी कहीं अधिक संख्या में लोगों की मौत होगी, जो हमने पहले सोचा था। दो अरब लोगों को खतरा नाम की यह स्टडी उन पर्यावरण वैज्ञानिकों की ओर से प्रकाशित रिसर्च पर आधारित है, जिन्होंने पृथ्वी के वातावरण और अन्य पारिस्थितिक तंत्र पर परमाणु विस्फोटों के प्रभाव का मूल्यांकन किया है। इस स्टडी के अनुसार, विश्व में कहीं भी 100 हथियारों का इस्तेमाल करके किया गया परमाणु युद्ध वैश्विक पर्यावरण और कृषि उत्पादन पर इतना बुरा प्रभाव डालेगा कि दो अरब से ज्यादा लोगों का जीवन संकट में पड़ जाएगा। गौरतलब है कि आज से 70 वर्ष पूर्व हिरोशिमा और नागासाकी में जिन परमाणु बमों का इस्तेमाल किया गया था उससे कई गुणा ज्यादा नुकसान आज के न्यूनतम क्षमता वाले परमाणु बम कर सकते हैं। ऐसे में होने वाले नुकसान का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।अगर भारत और पाकिस्तान के बीच न्यूक्लियर वार होता है तो इसमें न केवल भारत और पाकिस्तान की आबादी खत्म होगी वरन चीन में भी करोड़ों लोगों को इसका असर भुगतना पड़ेगा। बहुत संभव है कि इन तीनों देशों में सभ्यता का नामोनिशान ही मिट जाए। स्टडी कराने वाली संस्था के पदाधिकारी हेलफांद ने कहा कि विकासशील दुनिया में एक अरब लोगों की मौत निश्चित ही मानव इतिहास की भयंकर तबाही होगी और यदि इस आशंका में चीन के एक अरब 30 करोड़ लोगों के जीवन को खतरा भी जोड़ लिया जाए, तो हम स्पष्ट रूप से ऐसी स्थिति में प्रवेश कर रहे हैं, जहां सभ्यता का अंत हो जाएगा।
परमाणु हथियार नष्ट हो:-भारत और पाकिस्तान के बीच 1947 से अब तक चार बार युद्ध हुआ है। किसी भी प्रकार के सीमित परमाणु युद्ध से पृथ्वी पर ऐसा ही प्रभाव पड़ेगा। आधुनिक परमाणु हथियार उन अमेरिकी बमों से कहीं अधिक शक्तिशाली हैं, जिन्होंने 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी में दो लाख लोगों की जान ली थी। विश्व भर में जिन देशों के पास परमाणु हथियार हैं और जिन देशों के पास ये हथियार नहीं हैं उन्हें परमाणु युद्ध के खतरों से निपटने के लिए मिलकर काम करना चाहिए और इसके लिए हमें परमाणु हथियारों को नष्ट करना चाहिए। इससे पहले 2012 की स्टडी में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आईपीपीएनडब्ल्यू और फिजिशंस फॉर सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी ने कहा था कि परमाणु हमले से पैदा अकाल के कारण एक अरब से अधिक लोगों की मौत हो सकती है।
सालों बाद तक अकाल रहेगा:- सबसे खास बात यह है कि परमाणु युद्ध का असर केवल युद्ध प्रभावित क्षेत्र में ही नहीं होगा वरन पूरी दुनिया पर इसका असर होगा। उदाहरण के तौर पर परमाणु युद्ध की वजह से काले कार्बन एरोसोल पार्टिकल हवा में फैल जाएंगे। इससे अमरीका में भी मक्का और सोयाबीन के उत्पादन में 10 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। चीन में चावल का उत्पादन 21 प्रतिशत तक गिर सकता है, साथ ही गेंहू के उत्पादन के भी 50 प्रतिशत तक गिरने की पूरी संभावना है। डर की बात यह है कि परमाणु युद्ध के दस साल बाद भी 31 प्रतिशत तक गेंहू के उत्पादन में कमी रह सकती है। इसकी वजह से पूरे विश्व में खाद्य संकट पैदा होगा, जिससे निपटना मानव सभ्यता के लिए काफी मुश्किल होगा और यह उनके खत्म होने की बड़ी वजह बन सकता है। इस खाद्य संकट के चलते अकाल और दुर्भिक्ष भी फेलेगा जो युद्ध के कई सालों बाद तक मानव जाति का विनाश करता रहेगा।

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