लेखक परिचय

सौरभ राय 'भगीरथ'

सौरभ राय 'भगीरथ'

मेरा नाम सौरभ राय 'भगीरथ' है और मैं हिंदी में कवितायेँ लिखता हूँ । मेरी उम्र 24 वर्ष वर्ष है एवं मेरी कविताओं के तीन संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं, जिनमे से यायावर गतः शनिवार (15 दिसम्बर, 2012) को बैंगलोर में रिलीज़ हुआ । मेरी कवितायेँ हिंदी की कई किताबों में प्रकाशित हो चुकी हैं ।

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वो किस राह का भटका पथिक है ?

मेगस्थिनिस बन बैठा है

चन्द्रगुप्त के दरबार में

लिखता चुटकुले

दैनिक अखबार में |

सिन्कदर नहीं रहा

नहीं रहा विश्वविजयी बनने का ख़्वाब

चाणक्य का पैर

घांस में फंसता है

हंसता है महमूद गज़नी

घांस उखाड़कर घर उजाड़कर

घोड़ों को पछाड़कर

समुद्रगुप्त अश्वमेध में हिनहिनाता है

विक्रमादित्य फ़ा हाइन संग

बेताल पकड़ने जाता है |

वैदिक मंत्रो से गूँज उठा है आकाश

नींद नहीं आती है शूद्र को

नहीं जानता वो अग्नि को इंद्र को

उसे बारिश चाहिए

पेट की आग बुझाने को |

सच है-

कुछ भी तो नहीं बदला

पांच हज़ार वर्षों में !

वर्षा नहीं हुई इस साल

बिम्बिसार अस्सी हज़ार ग्रामिकों संग

सभा में बैठा है

पास बैठा है अजातशत्रु

पटना के गोलघर पर

कोसल की ओर नज़र गड़ाए |

कासी में मारे गए

कलिंग में मारे गए

एक लाख लोग

उतने ही तक्षशिला में

केवल अशोक लौटा है युद्ध से

केवल अशोक लड़ रहा था

सौ चूहे मार कर

बिल्ली लौटी है हज से

मेरा कुसूर क्या है ?-

चोर पूछता है जज से |

नालंदा में रोशनी है

ग़ौरी देख रहा है

मुह्हमद बिन बख्तियार खिलजी को

लूटते हुए नालंदा

क्लास बंक करके

ह्वेन सांग रो रहा है

सो रहा है महायान

जाग रहा है कुबलाई ख़ान |

पल्लव और चालुक्य लड़ रहें हैं

जीत रहा है चोल

मदुरै की संगम सभा में कवि

आंसू बहाता है

राजराज चोल लंका तट पर

वानर सेना संग नहाता है |

इब्न बतूता दौड़ा चला आ रहा है

पश्चिम से

मार्को पोलो दक्षिण से

उत्तर से नहीं आता कोई उत्तर

आता है जहाँगीर कश्मीर से

गुरु अर्जुन देव को

मौत के घात उतारकर |

नहीं रही

नहीं रही सभ्यता

सिन्धु – सताद्रू घाटी में

अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से

चीखता है भिंडरावाले

गूँज रहा है इन्द्रप्रस्थ

सौराष्ट्र

इल्तुतमिश भाला लेकर आता है

मल्ल देश के आखिरी पड़ाव तक

चंगेज़ ख़ान की प्रतीक्षा में |

कोई नहीं रोकने आता

तैमूर लंग को |

बहुत लम्बी रात है

सोमनाथ के बरामदे में

कटा हुआ हाथ है |

लड़ रहें हैं राजपूत वीर

आपस में

रानियाँ सती होने को

चूल्हा जलाती हैं |

चमक रहा है ताजमहल

धुल रहा है मजदूरों का ख़ून

धुल रहा है

कन्नौज

मथुरा

कांगरा |

कृषि कर हटाकर

तुगलक रोता है-

“पानी की किल्लत है

झूठ है

झूठ है सब

केवल राम नाम सत् है”

वास्को डि गामा ढूंढ रहा है

कहाँ है ?

कहाँ है भारतवर्ष ?

 

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