लेखक परिचय

डॉ. प्रवीण तोगड़िया

डॉ. प्रवीण तोगड़िया

वैभवपूर्ण जीवन को भारतमाता के श्रीचरणों की सेवा में समर्पित करने वाले ख्‍यातलब्‍ध कैंसर सर्जन तथा विश्‍व हिंदू परिषद के अंतरराष्‍ट्रीय महामंत्री।

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डॉ0 प्रवीण तोगड़िया

न्यूयॉर्क पर 9/11 को हमला करनेवाले अल कायदा और ओसामा बिन लादेन हैं, यह विश्वभर में चिल्ला-चिल्ला कर अमेरिका ने कहा, दुनिया ने बिना सवाल किए उसे मान लिया और फिर शुरु हुआ अमेरिका, यूरोप और अन्य देशों का जेहाद के विरुध्द तथाकथित युध्द! 9/11 के पहले से भारत में ऐसे जेहादी हमले हो रहे थे, भारत भी चिल्ला-चिल्ला कर कहता रहा कि 1990 में काश्मीरी हिंदुओं का जो भयानक नरसंहार हुआ, उसके पीछे, 1993 में मुंबई में हुए अनेक बम धमाकों के पीछे और फिर दिल्ली, बंगलूरु, कोयम्बटूर, जयपुर, अहमदाबाद, हैदराबाद और फिर 26/11 का मुंबई पर हुआ युध्द शैली का हमला – इन सबके पीछे पाकिस्तान में पले-बढे जिहादियों का हाथ है! भारत यह कहता रहा और पाक फाइलें मांगता रहा – अमेरिका पाक को अपना ‘आतंक विरोधी युध्द में सहयोगी’ घोषित करता रहा, भारत पर लगातार हमले होते रहे, आये दिन जम्मू-काश्मीर में हमारे निष्पाप पोलिस, सेना के जवान मरते रहे – अमेरिका पाक को धन, शस्त्र, वैश्विक मित्रता प्रदान करता रहा!

अमेरिका के एक चुनाव में बुश साहब ने गजब किया था – चुनाव के ठीक एक दिन पहले ओसामा से वक्तव्य आया – बुश इस्लाम विरोधी है! फिर क्या था! अमेरिका बाकी सब भूल गया! नौकरियों में कमी, महँगाई सब भूल कर अमेरिका ने बुश साहब को चुना था! उसके बाद के चुनाव में ओबामा साहब ‘परिवर्तन’ के नाम पर जीत गए और पहले हफ्ते में ही ईराक से सेना हटाने की घोषणा की! अफगानिस्तान में भी कुछ ज्यादा हलचल नहीं हो रही थी उन की! अमेरिका में खुसुर-पुसुर शुरु हुई कि ओबामा साहब मुसलमानों के प्रति ढुलमुल रवैया रखते हैं (वैसे उनका बहुत करीबी सुरक्षा सलाहकार जो देवबंदियों के ही जमात का है – वह भारत में आकर उस के प्यारे आझमगढ़, देवबंद अलीगढ़ आदि स्थानों पर जाकर ‘अपनों को’ मिला भी था गत वर्ष!), अब उनका दूसरा चुनाव आया है, मुद्दे खत्म हुए, भारत को ‘नौकरी, व्यवसाय चोर’ जैसी गालियाँ दी – फिर भी ओबामा साहब की लोकप्रियता नीचे ही जा रही थी! फिर क्या!

ओसामा को तो मरना ही था, उसके मरने का तमाशा भी बनाना ओबामा साहब को जरुरी था! चलो, इसी बहाने से ही सही, अमेरिकनों को लगेगा कि, जो कुछ हो, लेकिन ओबामा साहब ने ओसामा जेहादी को मारा – वोट दे ही देते हैं! चुनाव में इस का फायदा ओबामा साहब को कितना होगा, यह तो वही जाने! अमेरिका का मामला तो निपट गया, लेकिन मुन्ना, अब मेरा (याने, भारत का!) क्या होगा! जिस पाक को अमेरिका ने सर ऑंखों पर बिठाया, उसी पाक में पाकी सेना की नाक के नीचे भले चंगे मेंशन में ओसामा साहब रहते थे! किसी ने पूछा तक नहीं कि यह कौन है, जो कभी मस्जिद भी नहीं आता!

अब मेरे सीधे सवाल हैं और उन का जबाब मुझे नहीं, अमेरिका, पाक और भारत की सरकार इन्हें मिलकर पूरे भारत को देने हैं! ओसामा पाक में छिपा है, ऐसी जानकारी मिली तो पाक को बिना बताये ओबामा साहब ने सीधे पाक (भारत की सीमा से सटकर !) में घुसकर हमला किया, मुंबई 1993 हमलों का गुनाहगार दाऊद, कंधार विमान अपहरण का गुनाहगार मसूद अजहर और मुंबई 26/11 हमले के गुनाहगार हाफिज सईद और उसका जेहादी कुनबा व पाकी आईएसआई पाक में ही तो हैं – भारत के विद्वान गृहमंत्री और भारत के खुफिया तंत्र, भारत की सेना यही बार बार कहते रहते हैं! तो फिर हर भारतीय के मन में सीधा सवाल है। अगर 9/11 के हमले के गुनाहगार जेहादी ओसामा को ओबामा साहब पाक में घुसकर मार सकते हैं तो फिर, भारत की सेना को भारत के प्रधान मंत्री इतना भी नहीं कह सकते कि भारत के लाखों लोगों को जेहाद में मारने वाले पाक में छिपे हैं – हाफिज सईद जैसे कुछ खुलकर लाहौर में सभा कर भारत के विरुध्द जेहाद की घोषणा करते हैं – तो पाक पर हमला कर भारत के इन गुनाहगारों को मारो? अमेरिका के लिए एक न्याय और भारत के लिए दूसरा?

दूसरा सवाल, दुनिया पर अंकुश रखने का दावा कर अमेरिका को दुनिया का निरंकुश मालिक बना देनेवाला यू.एन. अब चुप क्यों? या तो पाक जैसे स्वतंत्र देश में बिना इजाजत सेना घुसाने के लिए अमेरिका को सजा करे यू. एन. या फिर भारत को भी पाक पर हमला करने से ना रोके यू. एन. ! जिहादी ओसामा मारा गया यह तो बहुत ही ठीक हुआ (अगर अमेरिका के दावों में सच्चाई हो तो!) लेकिन अब भारत को पाक पर हमला कर भारत के विरुध्द जेहाद करनेवालों को मार गिराने से कौन रोक रहा है?

भारत की सरकार खुद, जो वोटों की गुलाम है? वह राजनीतिक दल जिन के ‘दिग पराजयी’ नेता जेहादियों के समर्थन में आजमगढ़ जाते हैं, हिंदू साधु-संतों को गालियाँ देते हैं और ओसामा को समुद्र में डालने से इस्लाम का अपमान हुआ इसलिए रोते हैं – क्या ये रोक रहे हैं, अब भारत को पाक पर हमला करने से? या भारत की सरकार सिर्फ हिंदुओं को जेल में डालने तक ही ‘शूर’ बनती है और पाक पर हमले से डरती है? हमारी सेना तो शूर है, निडर है, फिर कौन डर रहा है?

तीसरा सवाल : पाकिस्तान ने लगातार दुनिया से झूठ कहा कि वे नहीं जानते ओसामा

कहाँ है – यही झूठ, वह दाऊद, मसूद अजहर आदियों के बारे में बोलते आये हैं – इस चार सौ बीसी से भरे जेहाद की कौन सी सजा संपूर्ण दुनिया और यू. एन. और मानवाधिकार वाले अब पाक को देंगे? और कब देंगे? पाक को तुरंत यू. एन. की सारी समितियों से बेदखल करना चाहिए, सभी देशों को पाक से अपने सारे रिश्ते तोड़ने चाहिए और भारत सरकार को सेना द्वारा तुरंत पाक के सभी जिहादी अव्े खत्म करने चाहिए! उसी समय, भारत सरकार ने भारत में भी चल रहे जेहादी अव्े और जेहादी नेताओं को खत्म करना चाहिए!

जानता हूँ, पाक की मदद के लिए चीन और सारे इस्लामी देश खड़े रहेंगे, लेकिन यही भारत सरकार की कूटनीति की परीक्षा है कि बिना समय गँवाए शेष सभी देशों को भारत सरकार पाक के विरुध्द खड़ा करे! तीसरा विश्व युध्द अगर होना ही हो, तो जेहादी पाकिस्तान और अन्य सभी जिहादी देशों के विरुध्द हो, ताकि इस विश्व में जेहादी आतंकवाद की विचारधारा ही ना बचे! ‘हम भी आतंक के मारे’ यह पाक का झूठा रोना-धोना और अमेरिका की दोहरी राजनीति अब, बस, बहुत हुई!

यदि भारत सरकार में यह हिम्मत नहीं, कि समय की चाल पहचानकर, कूटनीति बनाकर पाक पर हमला करें, तो इस्तीफा दे और भारत की जनता के हाथ में यह निर्णय सौंपे कि पाक पर हमला किन-किन दिशाओं से किया जाय! भारत की सेना, भारत की जनता और भारत के हिंदू अब बहुत भुगत चुके जेहाद को और जेहादियों के समर्थन में हिंदुओं को जेल भेजनेवाले नेताओं को ! यह सवाल नहीं, यह भारत माता की पुकार है, जागो!

 

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11 Comments on "अब पाक पर हमला करे भारत !"

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AJAY GOYAL
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hum kuch nahi kar saktai ????????????????????

manmohan ji na kuch dekhtai hai, na suntai hai, na boltai hai …………………………………………………………………..

RAJ SINH
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अरे जब सुप्रीम कोर्ट से फांसी की सजा पाए अफ़ज़ल गुरु और कसब का कुछ नहीं कर रही जो दायित्व है तो ‘ गद्दारों की सरकार और विदेशी रानी के चाकर हिजड़े सरदार से ‘ कर्तव्य की उम्मीद कोई कर रहा है तो सपना देख रहा है .

डॉ. मधुसूदन
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शिखंडियों से क्या अपेक्षा की जा सकती है? यह जितनी कूटनैतिक पैंतरेबाजी और चालें कुरसीपर टिक कर स्विस बॅंक का खाता भरने में चलते हैं, उतनी देशके हित में चले तो भारत का कल्याण १९६२ में हो चुका होता। कूट नीति कहती है, (१) जब शत्रु दुर्बल हो जाएं, (२) जब उसके हाथ कहीं ओर बंधे हों, (३) जब उसका सैन्य बल अन्य सीमाओ पर या अन्य कामों में व्यस्त हो, (४) उसकी सुस्ती की अवस्था में, (५) उसके खराब मौसम में, (६) अपनी पराकोटि की सज्जता सहित, (७) सेनाका मनोबल बढाते हुए, (८) उनके कुटुंब-परिवारकी देखभाल का दृढ आश्वासन… Read more »
sunil patel
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आदरणीय तोगड़िया जी ने बिलकुल सही बात कही है. किन्तु लगता है की हमारे देश के स्वाभिमान को तो जंग लग गई है. पाकिस्तान धीरे धीरे हमारे सीने पे मूंग दलता चला आ रहा है और हम है की आँखे बंद करके निस्फिकर होकर चिरनिद्रा में लेटे है. भारत पाकिस्तान पर हमला नहीं भी करे तो कम से कम आस पास इतना डर तो बना कर रखे की कोई हमारी तरफ आँख नहीं उठा कर देखे. किन्तु वर्तमान की परिस्थिति में लगता नहीं की हमारी सरकार कभी कोई ठोस निर्णय ले पायेगी. सहनशीलता की भी हद्द होती है. एक स्तर… Read more »
आर. सिंह
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बचपन में एक कहानी पढ़ी थी.एक शेर गुफा के बाहर निकला और अकड क्रर खड़ा हो गया.फिर शेरनी से पूछा ,मेरी आँखे लाल हैं ?शेरनी बोली हाँ .फिर पूछा क्या मेरा सीना तना हुआ है ?शेरनी फिर बोली,हाँ..क्या मेरी पूँछ उठी हुई है? शेरनी ने फिर हाँ कहा.इसके बाद शेर उछला और एक हिरण का शिकार कर लाया. यह तमाशा अपने मांद से एक सियार भी देख रहा था.कुछ देर के बाद वह भी निकला.फिर सियारनी से पूछा ,मेरी आँखे लाल हैं? आँखे तो लाल थी नही,अत: सियारनी ने कहा नहीं.सियार उस पर झपट पड़ा.तब सियारनी बोली की हाँ हैं… Read more »
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