लेखक परिचय

सुरेश हिन्‍दुस्‍थानी

सुरेश हिन्‍दुस्‍थानी

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

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सुरेश हिन्दुस्थानी
कहा जाता है कि विश्व का आध्यात्मिक और वैचारिक दर्शन जहां पर समाप्त होता है, भारत का दर्शन वहाँ से प्रारम्भ होता है। भारत आज भी कई मामलों में विश्व के अनेक देशों से बहुत आगे है। हमारा भारत देश आज भी इतना संसाधन सम्पन्न है कि विश्व के कई देश अनेक विधायों की जानकारी लेने के लिए आतुर दिखाई देते हैं। लेकिन कमी इस बात की है कि हम स्वयं ही इस बात को भूल चुके हैं कि हम क्या हैं। जिस दिन हम इस सत्य से परिचित हो गए समझो भारत के पुनरुत्थान को कोई ताकत नहीं रोक सकती। भारत के दर्शन में अज्ञानता के पर्दे हटाने का अद्भुत सामर्थ्य है। सारा विश्व इस सत्य से परिचित हो चुका है, लेकिन हम खुद ही विश्व की अज्ञानता भरी राह पर भटक रहे हैं।
भारत के दर्शन में यह साफ कहा गया है कि व्यक्ति का जन्म किसी खास उद्देश्य को लेकर होता है, भगवान अपनी योजना को साकार करने के लिए व्यक्ति के माध्यम से कार्य कराने के उद्देश्य से जमीन पर भेजता है, जमीन पर आने के बाद व्यक्ति अपने दिमाग से काम करके भगवान की रचना को छिन्न भिन्न करने की कवायद करता है। कहते हैं कि योग स्वस्थ मानसिकता का निर्माण करता है और स्वस्थ मानस वाला व्यक्ति ही हमेशा दूसरों को प्रसन्न रखने वाला काम कर सकता है। जिस व्यक्ति के मन में मानसिक बिकार होता है, वह अपना तो अहित करता ही है साथ ही समाज का भी अहित करता है। भारत का दर्शन कहता है कि समस्त संसार का भला हो, विश्व के सभी लोग निरोगी हों। पूरी वसुधा को एक परिवार के रूप में देखने का भाव जगाने वाला भारत का दर्शन है। भारत से योग का फिर से संचालित होना माने पूरी दुनिया को समुन्नत कारी राह का दर्शन कराना है।
यह बात सही है कि योग के माध्यम से पूरे विश्व में शांति की स्थापना हो सकती है, क्योंकि जब व्यक्ति संतुष्ट पूर्वक जीवन जीता है, तब वह सबका भला ही चाहता है, कहीं से भी राग द्वेष के स्वर नहीं आ सकते। जो लोग योग का विरोध कर रहे हैं वे वास्तव में पूरे विश्व में अशांति फैलाने का मार्ग ही प्रशस्त कर रहे हैं। ऐसे लोग ही कट्टरपंथी होते हैं। इनके सामने कोई आदर्श नहीं होता, बल्कि जैसी परिस्थिति होती है उसी के अनुसार अपना निर्णय लेते हैं, इस निर्णय में समाज के हित वाला भाव विलुप्त होता है। ऐसे दिशाहीन लोग ही मारकाट करते हैं। विश्व के अनेक मुस्लिम देशों में हम देख रहे हैं कि मुसलमान, मुसलमान को मार रहा है। ऐसे लोग मानसिक विभ्रम का शिकार हैं।
एक सफल व्यक्ति के जीवन की दिनचर्या का अध्ययन करने से पता चलता है कि उसका जीवन व्यवस्थित दिनचर्या के साथ चलता है, जीवन में कोई तनाव नहीं, कोई अव्यवस्था नहीं। पूरे दिन को तीन भागों में बांटकर जीवन का संचालन जो भी व्यक्ति करता है, उसके जीवन में किसी प्रकार का कोई झंझावात नहीं रहता, बल्कि वह समुचित तरीके से हर कार्य को करता चला जाता है। चौबीस घंटे के समय में व्यक्ति को आठ घंटे स्वयं के लिए, आठ घंटे, आठ घंटे परिवार के लिए और आठ घंटे समाज के व्यतीत करना चाहिए। यही सफल जीवन का सूत्र है, लेकिन वर्तमान में हम क्या देखते हैं व्यक्ति केवल अर्थ केन्द्रित होता जा रहा है, जब पैसा नहीं आता तो जीवन में निराशा का भाव पैदा होता है, और निराश व्यक्ति कभी भी प्रगति नहीं कर पाता। व्यक्ति को अपनी प्रगति के लिए अपने मानस को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहले प्रयास करना चाहिए। इसके लिए योग सर्वथा उपयुक्त है।
“योग” का अर्थ होता है जोड़, यानि टूटी हुई को सही तरीके से बनाना ही योग का दूसरा नाम है। यह बात भी सही है कि योग का सीधा संबंध भारत से है, विश्व में निवास करने वाले जो लोग योग की महिमा से अंजान हैं, वे भारत से योग के बारे में बहुत सीख सकते हैं। वर्तमान में केंद्र सरकार के मुखिया नरेंद्र मोदी के आग्रह पर विश्व के 193 देश खुशहाली के इस मार्ग पर चलने को तैयार हैं, सारा विश्व योग की महत्ता को समझ चुका है। परंतु भारत में कुछ लोग इसका विरोध करने की राजनीति कर रहे हैं। वास्तव में जो लोग योग का विरोध कर रहे हैं, उनको इसका महत्व ही नहीं मालूम, क्योंकि जिसने भी योग को एक बार किया है, उसे उससे शारीरिक फायदा ही मिला है, भारत के कई मुस्लिम भी आज योग करने के लिए आगे आ रहे हैं। योग करने से शारीरिक और बौद्धिक दोनों प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं।
योग को किसी एक धर्म से जोड़ना पूरी तरह से गलत है, क्योंकि सारे धर्मों की पूजा पद्धति में किसी न किसी रूप में योग आ ही जाता है, इसके साथ ही यह कहना भी समीचीन ही होगा कि विश्व की सारी पूजा पद्धति में योग की अनिवार्यता रहती है। भारत का दर्शन कहता है कि मनुष्य जो परिश्रम करता है, वह कर्मयोग है। यानि परिवार संचालन के लिए जो काम किया जाता है, वह भी एक योग ही है। इसी प्रकार निद्रा लेना भी योग की क्रिया मानी गई है। मनुष्य के जीवन में अगर योग नहीं है, तो मनुष्य स्वस्थ जीवन नहीं जी सकता। हम भ्रमण करते हैं, वह भी पद चालान योग है। व्यक्ति के जीवन में हर समय योग की महत्ता होती है। इसलिए इसे किसी एक धर्म या संप्रदाय से जोड़कर देखना प्रथम दृष्टया मूर्खता ही होगी। एक धर्म विशेष के कुछ कट्टरपंथी योग को हिन्दू धर्म का अंग मानकर अपने समाज को भ्रम की स्थिति में रखते हैं, ऐसे लोग समाज का भला नहीं बल्कि बुरा ही करते हैं। क्योंकि योग के माध्यम से यह कभी नहीं कहा जाता कि तुम हनुमान जी पूजा करो या शिव जी की पूजा करो। सभी धर्मों के लोग अपनी अपनी पूजा करते हुए भी योग कर सकते हैं, और लोग कर भी रहे हैं। मुसलमान भाइयों को अगर जीवन में विकास करना है तो उन्हें समाज को गुमराह करने की राजनीति करने वाले ऐसे कट्टरपंथी तत्वों सावधान रहकर अपने जीवन की भलाई के मार्ग पर चलाना होगा, मुसलमान अगर ऐसा करते हैं तो उन्हें खुद ही यह दिखाई देगा कि वे बिना किसी तनाव के जीवन जीने की ओर आगे बढ़ रहे हैं, और उनके बच्चे भी पढ़ाई लिखाई में नाम कमा रहे हैं।
भारत में योग गुरू बाबा रामदेव ने योग को एक बार फिर से घर घर पहुंचाया है। अनेक लोगों ने चिकित्सकों से ठीक नहीं होने वाली बीमारियों में चमत्कारिक लाभ प्राप्त किया है। योग के महत्व को लगभग भूलते जा रह भारत के नागरिकों में बाबा रामदेव ने कभी चैनलों के माध्यम से तो कभी प्रत्यक्ष रूप से आम जनता में गज़ब की चेतना का प्रस्फुटन किया है। योग करने वाले व्यक्ति हमेशा निरोग रहते हैं, योग करने के कुछ नियम भी हैं, व्यक्ति को उन नियमों का पालन करते हुए ही यौगिक क्रियाओं का सम्पादन करना चाहिए। वास्तव में योग व्यक्ति को मानसिक बुलंदी की ओर ले जाने का सामर्थ्य रखता है। हम सभी को 21 जून को होने वाले योग दिवस को सार्थक बनाने का काम तो करना ही चाहिए, साथ ही योग को दैनिक जीवन का हिस्सा भी बनाना चाहिए।

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