लेखक परिचय

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी मूलत: ग्वालियर, म.प्र. में जन्में ओर वहीं से इन्होंने पत्रकारिता की विधिवत शुरूआत दैनिक जागरण से की। 11 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय मयंक चतुर्वेदी ने जीवाजी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के साथ हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर, एम.फिल तथा पी-एच.डी. तक अध्ययन किया है। कुछ समय शासकीय महाविद्यालय में हिन्दी विषय के सहायक प्राध्यापक भी रहे, साथ ही सिविल सेवा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को भी मार्गदर्शन प्रदान किया। राष्ट्रवादी सोच रखने वाले मयंक चतुर्वेदी पांचजन्य जैसे राष्ट्रीय साप्ताहिक, दैनिक स्वदेश से भी जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय मुद्दों पर लिखना ही इनकी फितरत है। सम्प्रति : मयंक चतुर्वेदी हिन्दुस्थान समाचार, बहुभाषी न्यूज एजेंसी के मध्यप्रदेश ब्यूरो प्रमुख हैं।

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डॉ. मयंक चतुर्वेदी

लोकतंत्र में सरकार का अर्थ होता है, वह सरकार जो लोक का रंजन करती है, उसके सुख-दुख की समान भागी होने के साथ उसके हर कार्य में स्वयं की निरंतर सहभागिता सुनिश्चित करती दिखाई देती है। वास्तव में वही लोकतंत्रात्मक शासन व्यवस्था में एक आदर्श सरकार कहलाती है। देश में अच्छे दिन आने वाले हैं का नारा देकर केंद्र में आई भाजपा सरकार बीते आठ माह में भले ही बहुत बड़ा चमत्कार नहीं कर पाई होगी लेकिन उसने इन दिनों में ऐसे छोटे-छोटे कार्यों की शुरूआत जरूर कर दी है, जिन्हें लेकर आज कहा जा सकता है कि यदि यही छोटे दिखने वाले कार्य निरंतर होते रहे तो अवश्य आज नहीं तो कल नरेंद्र मोदी अपने प्रधान सेवक होने का दायि‍त्व संपूर्णता से निभाते हुए शक्तिसम्पन्न भारत का स्वप्न आने वाले दिनों में साकर कर देंगे।

वस्तुत: एक कल्याणकारी राज्य में यही उम्मीद की जाती है कि वह अपने नागरिकों का बिना भेद-भाव किये समान रूप से ख्याल रखे। जब केंद्र में भाजपा नहीं आई थी तब उस पर सांप्रदायिकता का आरोप लगा कर उसे केंद्रीय सत्ता से दूर रखने के प्रयास अनेक राजनीतिक पार्टियों, संस्थाओं और लोगों ने सामूहिक रूप से करने के प्रयास किये थे किंतु भारत की जनता ने फिर भी अपना विश्वास भाजपा में जताया और उसे केंद्रीय सत्ता की चाबी सौंप दी। सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार सभी मत-पंथ और धार्मिक लोगों के हित में समान रूप से कार्य करते हुए दिखाई दे रही है। वह देश के अल्पसंख्यकों के विकास के लिए एक तरफ नई-नई योजनाएं बना रही है, उन्हें लागू कर रही है, तो वहीं दूसरी ओर बहुसंख्यक समाज की भी चिंता कर रही है।

यह सर्वविदित है कि हिन्दू धर्मांवलम्बियों में चारो धाम की यात्रा के प्रति कितनी आस्था है। उत्तराखण्ड में भले ही इस सदी की भयंकर आपदा आ गई हो, किंतु आस्था का सैलाब कहीं कम नहीं हुआ। मृत्यु के पूर्व संपूर्ण भारत में व्यापक चारों धाम उत्तराखंड में गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ, उड़ीसा में जगन्नाथ पुरी, तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में समुद्र के किनारे स्थित रामेश्वरम् और गुजरात राज्य के पश्चिमी सिरे पर समुद्र के किनारे स्थित द्वारका की यात्रा भले ही ना हो पाए लेकिन लघु रूप में उत्तराखण्ड की जरूर एक बार यात्रा करते हुए गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ जाना हो जाए यह प्रत्येक हिन्दू की विशेष इच्छा होती है। यदि यह यात्रा सुगम तरीके से पूरी कर ली जाए तब कहना ही क्या है। इसके लिए यही कहा जा सकता है कि अपनी श्रद्धा को साकार होते हुए देख जीवन में अपार हर्ष हुआ है।

आज यह सभी बातें इस संदर्भ में कही जा रही है कि केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा उत्तराखंड के चार धामों को जोड़ने के लिए एक नया रास्ता बनाने की मंशा जाहिर की गई है। 890 किलोमीटर लंबा नया राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने की घोषणा जो केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने की है। निश्चित ही इससे आने वाले दिनों में उत्तराखण्ड का तो पर्यटन और अन्य दृष्टियों से लाभ होगा ही, संपूर्ण देश और विदेशों से चारधाम में आस्था रखने वाले जो लोग यहां आते हैं उनके जीवन में भी अपने भगवान के दर्शन करने की जो प्रबल इच्छा रहती है, वह भी सहजता से पूरी होने के द्वार खुल जायेंगे। राजमार्ग बनाने के लिए इसी वर्ष मई-जून में काम शुरू कर दिया जाएगा, जिसमें कि केंद्र सरकार 13 हजार करोड़ रुपये स्वीकृत करते हुए व्यय करने वाली है।

वस्तुत: केंद्र की भाजपा सरकार की इस घोषणा को हम संपूर्ण हिन्दू समाज और उत्तराखंड वासियों के लिए एक  बड़े तोहफे के रूप में भी देखें तो कोई हर्ज नहीं है, क्योंकि आज यह सभी को पता है कि जब 17 जून 2013 को बादल फटने से यहां प्रकृति की विनाशलीला शुरू हुई, तब वह कई दिनों तक लगातार चली थी,  जिसमें कि पांच हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे और कई हजार लोगों के सिर से हमेशा के लिए छत छिन गई थी। इस आपदा के घाव इतने घहरे थे कि लम्बे समय तक सरकार यहां 366 गांवों के 10 हजार 234 परिवारों का पुनर्वास तक नहीं कर सकी थी और यहां की सड़कों की बात करें तो 335  से ज्यादा जरूरी आम रास्ते ऐसे थे, जो एक वर्ष बीत जाने के बाद भी सामान्य अवस्था में नहीं लाए जा सके थेजिनमें बुरी तरह प्रभावित चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी एवं पिथौरागढ़ जिलों में कई रास्तों पर अभी भी इस आपदा के चिह्न देखे जा सकते हैं। यातायात के लिए जो 1 हजार 967 सड़कें खुली हैं, अभी भी उनमें से अधि‍कांश की सेहत अच्छी नहीं है। यहां प्राकृतिक आपदा आए डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद अभी भी आपदा में सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र केदारनाथ के पुनर्निर्माण तथा विकास के साथ ही 200 से भी अधिक संवेदनशील गांवों का पुनर्वास किया जाना है, जिसमें आवास निर्माण, बिजली, पानी, डेनेज सिस्टम, सड़क, स्कूल, मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध करवाने जैसे बड़े स्तर पर काम होना है।

हालांकि, उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को पुन: गतिशील बनाने, पर्यावरण के अनुरूप पुनर्निर्माण और पुनर्वास कार्य करने तथा आधारिक संरचना को नए सिरे से खड़ा करने के लिए यहां के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 4 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता देने की मांग की है और केंद्र भी यथासंभव राहतभरा सहायता पैकेज उत्तराखण्ड को यहां आई विपदा के बाद से बीच-बीच में लगातार दे ही रहा है, परन्तु अब जो यहां यह नया राष्ट्रीय राजमार्ग बन जाएगा तो निश्चित ही विकास के नए द्वार पुन: इस क्षेत्र मे खुल जायेंगे, ऐसा विश्वास के साथ कहा जा सकता हैकेंद्र सराकर भी उत्तराखण्ड की वर्तमान हालत देखकर यह मान ही रही है कि आज भी उत्तराखंड में सड़कों की दशा ठीक नहीं है। बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री को जोड़ने वाले मार्ग यात्रा के समय कई बार बंद हो जाते हैं। इसका नुकसान राज्य के व्यवसायियों के साथ ही यात्रा करने वालों को भी उठाना पड़ता है। इसलिए यहां चार धामों को जोड़ने के लिए नया राष्ट्रीय राजमार्ग बनना ही चाहिए।

सरकार ने यह जो यहां नए राजमार्ग बनाने की सुध ली है उसके लिए आज उसका ह्दय से आभार मानकर यही कहा जा सकता है कि केंद्र में भाजपा की मोदी सरकार को खास और आम दोनों की समान चिंता है, वस्तुत: यही सफल लोकतंत्र व्यवस्था की पहचान भी है कि उसमें सभी के हितों को ध्यान में रखते हुए निरंतर अपने समाज और राष्ट्र के विकास कि लिए आगे बढ़ा जाए।

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