लेखक परिचय

मनीष ठाकुर

मनीष ठाकुर

स्वतंत्र लेखक

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हे महाकवि, हे गुरुदेव वापस आओ, आकर देखो तुम्हारे बंगाली कैसे विलक्षण इंसान में तब्दिल हो गए हैं’. नौ जनवरी उन्नीस सौ बहत्तर, को जब बंग बंधु शेख मुजीबुर रहमान को पाकिस्तान में मौत की सजा पाने के बाद भारत के रहम से पूर्वी पाकिस्तान को मिली आजादी के बाद आजाद बांग्लादेश की जमीन पर पहली बार उतरे तो बांह फैलाकर लाखों की भीड़ को संबोधित करते हुए,गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगौर को यूं ही याद किया था। शेख मुजीब ने ढाका हवाई अड्डा के पास लाखों की भीड़ को संबोधित करते हुए नाटकीए अंदाज में कहा कि गुरुदेव कहते थे कि बंगाल के लोग सिर्फ बंगाली होते हैं,वे सच्चे इंसान नहीं बन पाए. लेकिन बांग्लादेशी भरोसा दिलाएंगे गुरुदेव को कि हम कितने बेहतर इंसान बन गए. आज के बांग्लादेश को देखकर शेख मुजीब की आत्मा को कितनी शांति मिलती होगी ये तो भगवान ही जाने लेकिन गुरुदेव की आत्मा तो तड़पती होगी कि हमने तो सिर्फ यही कहा था कि वे बंगाली बेहतर इंसान नहीं होते ये तो नहीं सोचा था कि बंगाली जब मुसलमान हो जाते हैं तो वो दानव हो जाते है इंसान होने के किसी भी पैमाने पर नहीं ठहरते.

भारत विभाजन तो नफरत की आर में दो राष्ट्र के सिद्धांत पर हुआ था जिसमें जिन्ना ने माना था कि हिंदु और मुसलमान दो अलग राष्ट्र हैं,इसीलिए पाकिस्तान में हिंदुओं पर लगातार अत्याचार हुए. स्थिति यह है कि आज पाकिस्तान में हिंदु लगभग विलुप्त अवस्था में हैं। लेकिन कट्टर इस्लामिक आधार पर बना राष्ट्र, बंगाली संस्कृति की दीवानगी में बिखर गया. जिस बंगाली संस्कृति के आधार पर बंगालियों को विलक्षण बताते हुए शेख ने गुरुदेव को आमंत्रित किया था उस बंगाल में बंगाली हिंदु पर बंगाली मुसलमानो द्वारा जितने अत्याचार हुए हैं धरती पर उसके कहीं मिसाल नहीं है.आजादी के समय जहां बांग्लादेश में तीस प्रतिशत मुसलमान थे आज आठ प्रतिशत के आसपास हैं. बंगाली मुसलमानों द्वारा वहां हिंदुओं की जमीन पर कब्जा कर उन्हें डराकर भगाने से लेकर बंगाली हिंदुओ की लड़कियों से जबरन शादी कर उनके जमीन पर काबिज होने को वहां के मुसलमान हथियार के रुप में इस्तेमाल करते हैं. शत्रु संपत्ति कानून लाकर बांग्लादेश सरकार ने बंगाली हिंदुओं की रीढ ही तोड़ दी है. ढाका में हिंदुओं की हक की लड़ाई लड़ रहे शिपन कुमार बसु कहते हैं कि शत्रु संपत्ति कानून सिर्फ इसलिए लाया गया ताकि हिंदुओं की जमीन पर कब्जा कर उन्हे निरीह बनाकर उन्हें मुसलमान बनने को मजबुर किया जा सके.

हिंदु स्ट्रगल कमिटी के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष अरुण अपाध्याय कहते हैं कि बांग्लादेश सरकार ने हिंदुओं को तबाह करने के लिए सिर्फ शत्रु संपत्ति कानून ही नहीं बनाया जिसमें कि खानदान का यदि कोई भी एक आदमी देश छोडकर कहीं चला गया या गायब है,भले ही हिंदुओं पर हुए अत्याचार में वह मारा गया हो और उसका अता पता न हो तो उसकी संपत्ति पर खानदान के किसी का भी हक नहीं होगा. अरुण बताते हैं कि बांग्लादेश सरकार ने एक ऐसा अत्याचारी कानून बनाया है जिसके द्वारा बांग्लादेश में अपमान जनक तरीके से हिंदुओं का नाश किया जा सके.एंटी रेप कानून वही कानून है जिसमें कोई भी मुसलमान लड़का किसी हिंदु लड़की से रेप करता है और फिर शादी कर लेता है तो उस पर रेप का केस नहीं चलेगा. इस कानून का प्रयोग हिंदु लड़कियों के साथ जबरन शारीरिक अत्याचार कर उसका धर्मांतरण कराते हुए उसके पैत्रिक संपत्ति पर कब्जा जमाने के लिए किया जा रहा है. हिंदु स्ट्रगल कमिटी ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार को मानवता के साथ अन्याय बताते हुए, भारत दौरे पर आई बांग्लादेश की प्रधानमंत्री और गुरुदेव को याद कर बंगालियों के विलक्षण इंसान में तब्दिल होने का भ्रम फैलाने वाले मुजीबुर रहमान की बेटी शेख हसीना का विरोध किया था. अरुण उपाध्याय का कहना है कि जिस देश में हिंदुओं पर लगातार अत्याचार हो रहे हों वहां के प्रधानमंत्री का भारत में इस कदर सम्मान बांग्लादेश के हिंदुओं का अपमान है. अरुण कहते हैं कि बांग्लादेश में हिंदु बेहद दयनीय स्थिति में है. दुनिया भर के 142 देशो की संसद ने निंदा प्रस्ताव जारी किया है. अनेक मानवाधिकार संगठनों ने इसे दुनिया के अलग अलग मंचो तक पहुंचाया है लेकिन पड़ोसी देश भारत ने आश्यचर्यजनक रुप से चुप्पी साध ली है. जबकि बांग्लादेश के हिंदुओं को मोदी सरकार से आखिरी उम्मीद है.

आंकड़े चीख चीख कर बताते हैं कि कैसे वहां हिंदुओं की संख्या लगातार  घट रही हैं.कैसे वहां भय का माहोल है.सोशल मीडिया पर वहां हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर लिखने वाले हिंदुओं की तो तुरंत हत्या पाकिस्तान के ईश निंदा कानून की तरह कर दिया जाता है.हां बावजूद इसके कुछ मुस्लिम पत्रकार हैं जो बांग्लादेश में लगातार हो रहे हिंसा पर कुछ तथ्यात्मक रिपोर्ट जारी करते हैं. 20 अप्रैल 2017 को ढाका ट्रीब्यून में सईरत सलकेन’ ‘हमारे हाथों में खून’ शीर्षक लिखते है….मैं जुमे का नमाज पढने के बाद अपनी चटाई समेट रहा था तो देखा सामने वाले एक निर्माणाधीन मकान में कुछ लोग हल्ला करते हुए हाथों मे लोहे का सरिया लेकर घुस रहे थे. मैं भी पीछे पीछे गया तो देखा कुछ मजदूर थे जो वहां काम कर रहे थे कुछ सो रहे थे. हाथों में सरिया लिए लोग मजदूरों की पिटाई करने लगे यह कहते हुए की इबादत के समय सो रहे हो?  मजदूरों ने जवाब दिया लेकिन हम तो हिंदु हैं ! पिटाई करने वालो ने उन्हें पिटते और गाली देते हुए कहा तो अपनी पूजा क्यों नही करते? सईकत आगे लिखते हैं हिंदुओं पर लगातार अत्याचार हो रहा है सरकार मौन है,स्वतंत्र विचारवालों की लगातार हत्या हो रही है.

बांग्लादेश में हिंदु सहमें हुए है शीर्षक से बीबीसी हिंदी में रेणु अग्रवाल लिखती है कि ढाका में मंदिर में पुजारी बाबुल चंद दास की लोगों ने हत्या कर दी सरकार और प्रशासन ने कोई कार्र्वायी नहीं की. फिल्माकर पत्रकार शहयार कवीर के हवाले से बीबीसी लिखता है कि बांग्लादेश में हिंदु हासिए पर हैं उनका दर्द सुनने वाला नहीं.

बांग्लादेश के राजनीति शास्त्री प्रो अलि रियाज ने ‘गॉड विलिंग द पॉलिटिक्स ऑफ इस्लामिज्म इन बांग्लादेश’ में लिखते हैं 25 वर्ष में 53 लाख हिंदुओं का देश से पलायन हो गया. 350 सदस्यी संसद में महज 15 हिंदु सांसद है.

ढॉका विश्वविद्धयालय के प्रो(रिटायर्ड) अजय राय कहते हैं कि हिंदु महिलाओं द्वारा सिंदुर और बिंदी लगाने पर फब्ति कसे जाते हैं. बांग्लादेश में हिदुं चमत्कारिक ढंग से विलुप्त हो रहे हैं उनके लिए कोई मंच नहीं है न ही उनकी सुध लेने वाला कोई है. प्रोफेसर राय के मुताबिक 1981 के आंकड़ों के मुताबिक बांग्लादेश के सात जिलों में हिंदुओं की संख्या में 6 प्रतिशत की गिरावट आई है. अमेरिका में रह रहे बांग्लादेशी वैज्ञानिक दीपेन भट्टाचार्य कहते हैं कि बांग्लादेश का निर्माण एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के सपनों के साथ हुआ था. हम सब ने अपने बांग्लादेश के लिए कई सपने देखे थे लेकिन जो हालात हैं वो पाकिस्तान में हिंदुओं के हालात से भी खराब हो चके हैं. उनके मुताबिक अभी वहां 8 प्रतिशत हिंदु हैं लेकिन जो हालात बनते जा रहे हैं सदी के अंत तक हिंदुओं की संख्या डेढ प्रतिशत से भी कम हो जाएगी. सन 2051 तक ये संख्या 1974  की संख्या के बराबर हो जाएगी. दुनिया में किसी जाती की संख्या लगातार बढती है बांग्लादेश में बंगाली हिंदु ऐसे बद्किश्तम हैं कि उनकी संख्या लगातार कम हो रही है. भट्टाचार्य के मुताबिक इसके लिए देश में धर्मातरण और भूमि हस्तांतरण का कमजोर कानून जिम्मेवार जिसका शिकार बंगाली हिंदुओं को बनाया जाता है. यह प्रकिया सतत रुप से जारी है. बांग्लादेश में हिंदुओं की बदहाली का सीधा असर भारत की अर्थ व्यवस्था पर पड़ रहा है. अत्याचार,बहुबेटियों के साथ बलात्कार, शोषण और भूमि पर कब्जा से हताश बंगाली हिदुं ,आसाम और पश्चिम बंगाल की राह से भारत में प्रवेश कर रहे हैं .इस लिहाज से भी भारत सरकार की यह जिम्मेवारी बनती है कि वो बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार पर दबाव डाले कि वो अपने देश में हिंदुओं के पर हो रहे अत्याचार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्वायी करे ताकि देश में बंगाली हिदुं का शोषण बंद हो और वे शुकुन से रह सकें. भारत की यह जिम्मेवारी इसलिए भी बनती है क्योकि बांग्लादेश तीन तरफ से भारत से धिरा है और एक तरफ समुद्र है .ऐसे में बांग्लादेश का कोई भी प्रताड़ित नागरिक भारत की समस्या को ही बढाएगा. इसलिहाज से अंतर्राष्ट्रीय मंच हो या सीधा बांग्लादेश सरकार पर दवाब बनाने का मामला, भारत सरकार की यह जिम्मेदारी है कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार करे.

अरुण उपाध्याय….. अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष हिंदु स्ट्रगल कमेटी..

पाकिस्तान तो धर्म के आधार पर बना देश था जहां हिंदुओं पर इतने अत्याचार हुए कि आज वहां हिदुं लगभग विलुप्त होने के कगार पर हैं. आज भी वहां का सांसद मुट्ठु मियां धर्मातरण के खेल में लगा है और नाबालिग हिंदु लड़कियो को पहले गायब करवाता है फिर उसे मुसलमान बनाता है . सरकार इसे लगातार नजर अंदाज करती रही है . आज भी कर रही है. लकिन बांग्लादेश तो भारत के सहयोग से बंगबंधु शेख मुजिबुर रहमान के नेतृत्व में भाषा और बंगाली संस्कृति के आधार पर एक पंथ निरपेक्ष राष्ट्र बना था. यह बात अलग है कि बंगबंधु के समय में ही बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार शुरु हो गए. उस बंगाली हिंदुओं पर जिसने बांग्लादेश की आजादी के लिए सबसे ज्यादा कुर्बानी दी. पाकिस्तानी सैनिकों के सबसे ज्यादा अत्याचार सहे. बंग बंधु के बाद जियाऊर रहमान के शासनकाल में बांग्लादेश अपने मूल इस्लामिक चरित्र में आ गया जहां मुसलमान बहुमत में आते ही सिर्फ अपनी चलाना चाहते है और पाकिस्तान की राह पर चलते हुए बांग्लादेश इस्लामिक राष्ट्र बन गया. कुछ ही सालों बाद जब वहां सैनिक तानाशाह जनरल इरशाद का दौर  आया तो बांग्ला देश का राष्ट्रधर्म इस्लाम हो गया.तब से हिंदु वहां दोयम दर्जे के नागरिक बन गए जिनकी बांग्लादेश की मुक्ति में बहुमुल्य योगदान रहा.आज बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैं और भारत सरकार बांग्लादेश के लिए दोनो हाथ फैलाए हुए. हमने इसी लिए बांग्लादेश की प्रधानमंत्री और बंगबंधु की बेटी शेख हसीना के भारत आगमन का विरोध किया. हमारा विरोध इस लिहाज से है कि भारत सरकार बंगाली हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार करने वाली बांग्लादेश के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के बदले उस पर अपने खजाने लुटाने को क्यों तैयार है? जब तक भारत बांग्लादेश के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार नहीं करेगा बांग्लादेश के हिंदुओं का उत्पीरण बंद नहीं होगा ऐसे हालात में उनका भारत की तरह पलायन बढ़ता रहेगा.यह हमारे हित में कतई नहीं है. इसीलिहाज से बांग्लादेश के प्रति भारत सरकार की नरमी का हम लगातार विरोध करते रहेंगे. ताकि हम बांग्लादेश के हिंदुओं को इंसाफ दिला सकें।

सुकृति मंडल…संपादक,एईबेला डॉटकाम एवं कार्यकारी अध्यक्ष, बांग्लादेस जातीय हिंदु महाजोट

हम आजाद बांग्लादेश में जन्म लिए यह हमारे पूर्वजों की भूमि है.हम पलायन क्यों करें? हमारे यहां राजनीतिक समस्या है इसका समाधान भी राजनीतिक ही होगा. भारत ने बांग्लादेश को मुक्ति दिलाई लेकिन भारत सरकार ने बांग्लादेश पर ध्यान ही नहीं दिया. भारत इसे मुस्लिम राष्ट्र समझता रहा लिहाजा स्थिति विकराह होती गई। भारत सरकार को तय करना चाहिए कि बंगाली हिंदु हो या मुसलमान इसे भारत में शरण नहीं दिया जाए. भारत सरकार को इसके लिए ठोस कदम उठाना चाहिए। बांग्लादेश में स्थिरता व हिंदुओं के लिए समानता का व्यवहार हो यह भारत के लिए भी हीत में है. भारत सरकार को चाहिए कि बांग्लादेश में सेना,पुलिस और राजनीति समेत हर हिस्से में हिंदुओं को उचित स्थान मिले इसके लिए बांग्लादेश सरकार को सुझाव दे तथा लगातार इस और प्रयास करे. बांग्लादेश का हिंदु इसके लिए भारत का कृतज्ञ रहेगा.

अनंत कुमार हेगड़े..सांसद, बांग्लादेश संसदीय समित फोरम के अध्यक्ष

भारत उप महाद्वीप में महाशक्ति के रुप में उभर कर सामने आ रहा है कट्टरपंथी पाकिस्तान चीन के साथ मिलकर इसीलिहाज से बांग्लादेश को अशांत करना चाह रहा है. चीन भारत को कमजोर करने के लिए बांग्लादेश को ढाल बना रहा है। वह चाहता है कि बांग्लादेश भारत के विरुध में खड़ा हो. हम सावधान हैं। बीते कुछ सालों में हिंदुओं पर अत्याचार में तेजी आई है. हिंदुओं के घर जलाए जा रहे हैं उनकी जमीन और संपत्ति पर कब्जा करने किया जा रहा उनकी संपत्ति लूटी जा रही है. मंदिरों को अपवित्र किया जा रहा है यह सब एक अंतराष्ट्रीय साजिश के तहत किया जा रहा है। हम उचित मंच पर उचित तरीके से इसे पहुंचा रहे हैं

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