लेखक परिचय

सुरेश हिन्‍दुस्‍थानी

सुरेश हिन्‍दुस्‍थानी

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

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modi-rajnathसुरेश हिंदुस्थानी

भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान द्वारा कूटनीतिक तरीके कब्जा किए गए पाक अधिकृत कश्मीर के बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जो बयान दिया है, वह अत्यंत ही अभिनंदनीय है। प्रधानमंत्री ने सर्वदलीय बैठक में साफ तौर पर कहा है कि पाकिस्तान के अधिकार क्षेत्र में आने वाला काश्मीर भारत का हिस्सा है। वर्तमान में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के हालत विकरालता की सीमा को भी पार कर चुके हैं। इस समस्या के लिए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के नागरिक भी वास्तविकता से भलीभांति परिचित हैं। पाकिस्तान जब अपना ही देश नहीं संभाल पा रहा है तो उससे कश्मीर की स्थिति सुधारने की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
प्रधानमंत्री का बयान राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काफी मायने रखता है। आज के समय में विश्व के कई देश पाकिस्तान को संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से आतंकियों को समर्थन करने के लिए पाकिस्तान की भूमिका कई बार उजागर हो चुकी है। विश्व के सभी देश इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं कि आतंकवाद से किसी का भला नहीं हो सकता, इसके विपरीत वह विनाश का कारण ही साबित हुआ है। पाकिस्तान आज जिस आग में जल रहा है, उसी आग से वह दूसरे देशों में आग लगाने का प्रयत्न करता हुआ दिखाई दे रहा है। भारत में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की जो हालत है, वह किसी से छिपी नहीं है। वहां के लोग अब पाकिस्तान से मुक्ति चाहने लगे हैं। पाकिस्तान के विरोध में जबरदस्त प्रदर्शन हो रहे हैं। पाकिस्तान की सेना के विरोध में वापस जाओ के नारे सुनाई दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सर्वदलीय बैठक में बिलकुल उसी तरह का जवाब दिया है, जैसा पाकिस्तान चाहता था। वास्तव में भारत की सरकार को यह बहुत पहले ही करना चाहिए था, लेकिन उस समय की केन्द्र सरकार ने केवल मुस्लिम वोट बैंक के चक्कर में कोई ठोस पहल नहीं की। जिसके कारण पाकिस्तान भारत को हमेशा कमजोर समझता रहा और अपनी मनमर्जी करके कश्मीर के युवकों को गुमराह करता रहा। धीरे धीरे वहां के नागरिकों के सामने यह स्पष्ट होने लगा कि पाकिस्तान किसी भी तरीके से कश्मीर के लोगों को शांति की राह नहीं दिखा सकता। वहां के नागरिक अब खुलेआम रुप से भारत के साथ रहने की बात करने लगे हैं। अब भारत सरकार को भी चाहिए कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में रहने वाले लोगों ने जो भाव व्यक्त किया है, उसको पूरा समर्थन मिलना चाहिए।
भारत के साथ पाकिस्तान ने हमेशा ही कुटिलता पूर्ण व्यवहार किया है। उसकी कथनी और करनी में जमीन आसमान जैसा अंतर दिखाई दिया है। पाकिस्तान जैसे कुटिल पड़ोसी को सबक सिखाने और करारा जवाब देने के लिए भारत को और आक्रामक रुख अपनाना होगा। पाकिस्तान ने कुटिलता पूर्वक भारत के हिस्से पर अनाधिकृत रुप से कब्जा किया है। इतना ही नहीं पाकिस्तान ने कश्मीर के बारे में विश्व समुदाय के समक्ष भ्रांति फैलाई है। मर्यादा की सारी सीमाओं को पार करते हुए पाकिस्तान ने कश्मीर के प्रकरण को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उठाने का दुस्साहस भी किया है। यही नहीं, वह कुछ मु_ीभर तत्वों को भरमाकर घाटी में हिंसा, पत्थरबाजी और आतंकी वारदातों को भी अंजाम देता रहा है।
भारत ने सर्वदलीय बैठक के माध्यम से प्रधानमंत्री ने जो बयान दिया है, वह एक दम सही और ठोस तौर पर उठाया गया कदम माना जा सकता है। भारत के किसी भी प्रधानमंत्री ने देशवासियों की भावनाओं का आदर करते हुए जिस मजबूती के साथ पाकिस्तान को जवाब दिया है। वैसा देश की जनता हमेशा चाहती थी, लेकिन सरकारों ने हमेशा ही लापरवाही पूर्ण रवैया अपनाया और कश्मीर में पाकिस्तान की आतंकी रुपी मनमानी लगातार चलती रही। प्रधानमंत्री पे साफ शब्दों में कहा है कि पाक अधिकृत कश्मीर भी भारत का हिस्सा है और अब इस समस्या के हल के लिए वहां के लोगों से भी बात करना जरूरी है। पीओके में जिस तरह ज्यादतियों की खबरें हाल के वर्षों में लगातार आती रही हैं, उससे पता चलता है कि वहां पाकिस्तान से आजादी की मांग करने वालों की आवाज को कितनी क्रूरता के साथ दबाया जाता रहा है। कुछ महीने पहले जब लोग अपने हकों के लिए सड़कों पर उतरे, तब पाकिस्तानी सेना और सुरक्षाबलों ने उन पर प्रहार कर दबाने की चेष्टा की ताकि दुनिया को पता ही नहीं चल सके कि वहां क्या हो रहा है। इतना ही नहीं पाकिस्तान के राजनेता और आतंकवादी एक ही भाषा बोलते दिखाई देते हैं। जिससे यह साफ़ पता चलता है क़ि दोनों के सोच में गहरी समानता है।

पाकिस्तान को यह अच्छी तरह पता है कि यदि उसने भारत में हिंसा करने की कोशिश की तो पाकिस्तान का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है, उसे ध्यान रखना होगा कि 1971 में भारत के साथ टकराने का दुष्परिणाम यह हुआ कि पाकिस्तान का एक भाग बांग्लादेश के नाम से स्थापित हो गया। हाफिज सईद जो इस्लाम के नाम पर भारत के खिलाफ जहर उगलता है, उसे ध्यान रखना होगा कि पाकिस्तान से अधिक मुस्लिम भारत में है, पाकिस्तान में सिया मस्जिदों पर हमले होते हैं। इस्लामी स्टेट के आतंकी इराक में सिया मुस्लिमों को मार रहे हैं, उनकी मस्जिदों पर बमों की बारिश करते हैं। इसी प्रकार पाकिस्तान में तालिबानी स्कूल में बच्चों पर हमला कर उनकी हत्या करते हैं, सिया मुस्लिमों की मस्जिदों पर हमला कर नवाजियों का खून बहाते हैं। ये बच्चे और अन्य नागरिक मुस्लिम है। सीरिया सेना और आईएस के बीच मुठभेड़ में मुस्लिम ही मारे जा रहे हैं। यदि सुरक्षा की दृष्टि से विचार करें तो सबसे अधिक सुरक्षित और खुशहाल भारत के मुस्लिम हैं। बाकी सभी मुस्लिम देशों में मारकाट हो रही है।
मुसलमानों या मुगलों का इतिहास बताता है कि उन्होंने राजपाट को हथियाने के लिए अपने अगे संबंधियों तक का गला घोंट दिया था। शक्ति का दुरुपयोग करके उन्होंने वे सब असामाजिक कार्य किए जिन्हें समाज प्रथम दृष्टया अनुचित मानता है। प्रारंभ से लेकर आज तक मुसलमान आज तक एक दूसरे को विश्वास के भाव से नहीं देखते। भारत में जितने भी मुसलमान हैं वे सब खुशनसीब हैं कि उन्हें किसी मुस्लिम राष्ट्र में जन्म नहीं लेना पड़ा। वर्तमान में भारत में भी पाकिस्तान या अन्य मुस्लिम राष्ट्रों के नेटवर्क का खुलासा होता दिखाई देता है। भारत के कुछ मुसलमान आतंकवाद जैसे कार्य का समर्थन करके पूरे समाज पर सवालिया निशान लगा रहे हैं, जबकि भोले भाले गरीब मुसलमानों का इससे कोई वास्ता नहीं है। उन्हें मजबूरी में अपने आकाओं की बात माननी पड़ती है।
भारत का मुसलमान इस सत्य को पूरी तरह से जानता है कि हम जितना हिन्दुओं के बीच रहकर सुखी हैं, उतना किसी भी मुस्लिम राष्ट्र में नहीं रह सकते। आज मुसलमान वर्ग सिया और सुन्नी वर्ग में विभाजित है, इतना ही नहीं पाकिस्तान के हालात तो और भी बदतर हैं, वहां भारत के मुसलमानों को कुछ भी नहीं समझा जाता। हमारे देश में मुसलमानों के नाम पर जिस प्रकार की राजनीति की जा रही है वह केवल मुसलमान वर्ग को कमजोर करने की एक साजिश भर है। इसके कारण जहां मुस्लिम राजनेता अपनी राजनीति चलाने का खेल खेल रहे हैं, वही कुछ राजनीतिक दल भी उन्हें तुष्ट करने की राजनीति कर रहे हैं।
इसलिए पाकिस्तान के हाफिज सईद जैसे उग्रवादी मुस्लिमों को यह ध्यान रखना चाहिए कि मुस्लिमों के नाम पर दुनिया के मुस्लिम एक जुट नहीं हो सकता। हर देश के साथ वहां के मुस्लिमों की राष्ट्रीयता है, वे उसी देश के प्रति वफादार है। इसलिए भारत के मुस्लिम कश्मीर के बारे में पाकिस्तान के साथ खड़े नहीं हो सकते। इस बारे में चाहे हाफिज सईद और मसरत आलम कश्मीर के कुछ लोगों को भड़काने में सफल हो जाएं, चाहे पथराव में अपने ही लोगों के सिर फोड़े जाए। मुस्लिमों का खून बहाने का खेल बंद होना चाहिए। मुस्लिमों एवं पाकिस्तान के नाम पर साजिश हुई तो बर्बाद होते पाकिस्तान को खामियाजा भुगतना पड़ेगा। यदि सीमा को अशांत करने की कोशिश की गई तो भारत को शक्ति की भाषा का उत्तर देना आता है। इसका जहरीला स्वाद पाकिस्तान चख चुका है।

सुरेश हिंदुस्थानी

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