लेखक परिचय

प्रवीण दुबे

प्रवीण दुबे

विगत 22 वर्षाे से पत्रकारिता में सर्किय हैं। आपके राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय विषयों पर 500 से अधिक आलेखों का प्रकाशन हो चुका है। राष्ट्रवादी सोच और विचार से प्रेरित श्री प्रवीण दुबे की पत्रकारिता का शुभांरम दैनिक स्वदेश ग्वालियर से 1994 में हुआ। वर्तमान में आप स्वदेश ग्वालियर के कार्यकारी संपादक है, आपके द्वारा अमृत-अटल, श्रीकांत जोशी पर आधारित संग्रह - एक ध्येय निष्ठ जीवन, ग्वालियर की बलिदान गाथा, उत्तिष्ठ जाग्रत सहित एक दर्जन के लगभग पत्र- पत्रिकाओं का संपादन किया है।

Posted On by &filed under राजनीति.


army
प्रवीण दुबे
यूं तो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक दशहरा अभी 10 दिन दूर है, लेकिन जिस प्रकार हमारी सेना के जांबाज कमांडो ने पाकिस्तान के घर में घुसकर 38 आतंकवादियों को ढेर किया है, भारत में दशहरे की शुरुआत हो गई है। जिस प्रकार भगवान राम ने दूर देश में छुपी बैठी रावणी शक्तियों को अपने शौर्य पराक्रम से नष्ट किया था आज भारतीय सेना ने भी वैसा ही कुछ कर दिखाया है। तारीफ करना चाहिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उन्होंने जो कहा वो कर दिखाया। उनकी कूटनीतिक चतुरता, बुद्धि कौशल और धैर्य के साथ निर्णय लेने की क्षमता की आज पूरी दुनिया कायल हो गई है। आज पाकिस्तान को जवाब देकर उन्होंने साबित कर दिया कि वो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता यूं ही नहीं हैं वास्तव में वे दुनिया के एक बड़े और शक्तिशाली राजनेता हैं।
अभी तक कश्मीर मसले को लेकर हमारे देश में इजरायल जैसी शौर्यता और पराक्रम दिखाने की बात की जाती रही है। पिछले तीन वर्षों के दौरान यह दूसरा मौका है जब भारत की सेना ने दूसरे देश में अंदर घुसकर आतंकवादियों को मौत की नींद सुलाने का कार्य किया है। पहले म्यांमार और अब पाकिस्तान में भारतीय कमांडो ने इस अदम्य साहस का परिचय देकर आतंकियों को मारा है। अब हम सीना ठोककर यह कह सकते हैं कि अमेरिका और इजरायल ही नहीं भारत भी उन देशों की कतार में अग्रणी देश बन गया है जो अपनी सुरक्षा के लिए किसी विदेशी शक्ति के सहयोग का इंतजार नहीं करता, उस पर जो भी टेढ़ी नजर डालेगा भारत उसे उसके घर में घुसकर तबाह कर देगा। इसका अर्थ यह कदापि नहीं लगाया जाना चाहिए कि भारत एक अमन पसंद मुल्क नहीं है।
भारत ने खून-खराबा टालने के लिए की हर कोशिश
ज्यादा पीछे न जाएं केवल 18 सितम्बर के उरी हमले की ही बात करें तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खून-खराबा टालने के लिए पाकिस्तान के साथ हर कूटनीतिक रास्ता खुला रखा, उन्होंने बिना खून बहाए पाकिस्तान को जवाब देने की रणनीति भी बनाई, बहुत समझाया, 21 सितम्बर को संयुक्त राष्ट्र के मंच से पाकिस्तान को घेरा, 24 सितम्बर को उन्होंने केरल में कहा दोनों मुल्क बेरोजगारी, गरीबी से मिलकर युद्ध करें, 25 सितम्बर को सिंधु जल संधि तोडऩे की बात भारत ने की, 26 सितम्बर को एक बार फिर यूएन में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पूरी दुनिया के सामने पाक को बेनकाब किया, 27 सितम्बर को मोदी की कूटनीतिक चालों का ही नतीजा था कि पाकिस्तान में होने वाले सार्क सम्मेलन का सभी देशों ने बहिष्कार कर रद्द करा दिया। भारत ने बिना हिंसा के हर वो कदम उठाया जो एक शांतिप्रिय देश उठा सकता है, लेकिन पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। किसी ने ठीक ही कहा है ”लातों के भूत बातों ने नहीं मानते”। वह भारत की कूटनीतिक चालों और खून खराबा टालने की कोशिशों को कमजोरी मान बैठा, वह हमें एटम बम की धमकी देने लगा।
पाक सेना के सहयोग से आतंकी थे भारत में तबाही के लिए तैयार
जिस तरह की सूचनाएं आ रही हैं उससे पता चला कि उसने भारत की सीमा से सटे स्थानों पर आतंकी प्रशिक्षण शिविरों की संख्या बढ़ा दी थी, पाकिस्तानी सेना के सहयोग से बड़ी संख्या में आतंकवादी एक बार पुन: भारत में तबाही मचाने के इरादे से घुसपैठ के लिए तैयार थे। अंतत: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए पाकिस्तानियों को उन्हीं के घर में घुसकर तबाह करने की अनुमति दे दी। हमारे जांबाजों ने उन्हें ठोका और बिना किसी नुकसान के अपने घर वापस लौट आए। अब पाकिस्तान में विधवा विलाप जैसा माहौल है। भारत की इस शांतिपूर्ण कार्रवाई से पाकिस्तान हड़बड़ा गया है और दोमुंही बातें कर रहा है। उसे समझ नहीं आ रहा आखिर करें तो क्या करें? एक तरफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भारतीय हमले की घटना को लडख़ड़ाई जुबान से कबूल रहे हैं और निंदा कर रहे हैं तो दूसरी ओर उनके कुछ मंत्री और उनकी सेना इससे इनकार कर रही है।
पाक में भारत के खिलाफ षड्यंत्र 
पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और सेना प्रमुख राहील शरीफ के बंद कमरे में भारत के खिलाफ षड्यंत्र की खबर पाक से आई है। पाकिस्तान के सामने बड़ा संकट है, यदि वह विश्व बिरादरी में इस हमले की बात उठाता है तो उसे यह स्वीकारना होगा कि उसके यहां आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर संचालित किए जाते हैं, यह उसके लिए और भी परेशानी वाली बात होगी। फिलहाल उसे समझ नहीं आ रहा वह करे तो क्या करे?
बौखलाया पाकिस्तान फिर खेल सकता है खूनी खेल!
प्रधानमंत्री की रणनीति और कूटनीति के सामने पाकिस्तान पूरी तरह असफल साबित हो रहा है। उसे नहीं भूलना चाहिए कि भारत इस उप महाद्वीप की एक बड़ी शक्ति है। इतना ही नहीं पाकिस्तान अब तक भारत से चार लड़ाइयां हार चुका है। वो आज तक लाख कोशिशों के बावजूद भारत का कुछ नहीं बिगाड़ पाया तो अब क्या बिगाड़ पाएगा। लेकिन इसके साथ ही यह नहीं भूलना होगा कि यह लड़ाई अंतिम नहीं है। निश्चित रूप से भारत के इस साहसिक कदम से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है वह आतंवादियों के कंधे पर बंदूक चलाने का खूनी खेल खेल सकता है। निश्चित ही भारत सरकार और सेना ने इसका जवाब देने की रणनीति भी बना रखी होगी, उसने पाकिस्तान को सबक सिखाने का जो अभियान शुरू किया है उसके अंतर्गत आतंकवाद का समूल नाश होगा और पूरी दुनिया में भारत एक महाशक्ति के रूप में स्थापित होगा।

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz