लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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aapजाने कहाँ गये वो दिन,
कहते थे आधी तनख़्वाह मे,
विधायक काम चलयेंंगे,
नीली वैगनार से वो,
ख़ुद दफ्तर आयें जायेंगे।जाने कहाँ गये………

अब तो सभी के पास मे,
बडी से बडी हैं गाड़ियाँ,
बंगला कोठी सबको मिले,
विदेश मे हों छुट्टियाँ।जाने कहाँ गये………

ग़रीब तो और भी ग़रीब हैं हो रहे,
दाल चावल भी अब पंहुच से बाहर हो रहे,
अपनी बढ़ाई चार गुना,
हमारी कब बढ़ाेंगे। जाने कहाँ गये………

हम तो समझे थे आप जो,
कहते हैं वो करते हैं,
लेकिन अब आप तो,
गढ़ते है बस कहानियाँ।जाने कहाँ गये………

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1 Comment on "जाने कहाँ गये………"

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बी एन गोयल
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बी एन गोयल

सत्ता का स्वाद एक बार लग जाये तो फिर किस के वादे – कैसे वादे – कल किस ने देखा है – बड़ी मुश्किल से आज का दिन आया है .

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