लेखक परिचय

निर्मल रानी

निर्मल रानी

अंबाला की रहनेवाली निर्मल रानी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट हैं, पिछले पंद्रह सालों से विभिन्न अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं में स्वतंत्र पत्रकार एवं टिप्पणीकार के तौर पर लेखन कर रही हैं...

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निर्मल रानी
हमारे देश में विशिष्ट व्यक्तियों द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर कभी अपने अत्यधिक उत्साहित प्रशंसकों को या कभी पत्रकारों को अथवा कर्मचारियों के साथ मारपीट करने,उन्हें धकियाने अथवा गाली-गलौज कर अपमानित करने जैसे मामले प्रकाश में आते रहते हैं। फि़ल्म उद्योग से जुड़े कई सिने कलाकार अपने ऐसे ही दुर्व्यवहार के लिए कई बार सुर्ख़ियां बटोर चुके हैं। हालांकि फि़ल्मी कलाकारों का जीवन मनोरंजन क्षेत्र को समर्पित सिने उद्योग की सेवा में व्यतीत होता है। लिहाज़ा बावजूद इसके कि अभिनेता व अभिनेत्रियां भी हमारे देश के युवक-युवतियों के लिए प्रेरणा स्त्रोत होते हैं। फिर भी इनके व्यवहार को इनका निजी व्यवहार समझकर किसी हद तक उसकी अनदेखी भी की जा सकती है। परंतु जब बात किसी ऐसे निर्वाचित जनप्रतिनिधि की हो जो संविधान के निर्माण,लोकसेवा व समाजसेवा जैसे दावे करता हो तथा जिसे उसके क्षेत्र व प्रदेश की जनता ने बड़ी उम्मीदों तथा विश्वास के साथ देश की सर्वोच्च सदन लोकसभा अथवा विधानसभा के लिए निर्वाचित किया हो ऐसा व्यक्ति यदि मारपीट,हाथापाई,गाली-गलौच अथवा ऐसे किसी भी अनैतिक कार्य में संलिप्त पाया जाए और दुर्भाग्यवश ऐसे आपत्तिजनक कारनामों को अंजाम देने के बावजूद अपनी ढिठाई पर आमादा रहे,देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य आख़िर और क्या हो सकता है?
हालांकि देश के अधिकांश राजनैतिक दलों से संबंध रखने वाले कई जनप्रतिनिधि समय-समय पर अपने दुर्व्यवहार तथा आपत्तिजनक बर्ताव के चलते बदनाम होते रहे हैं। परंतु महाराष्ट्र में शिवसेना तथा महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) से जुड़े नेताओं को तो ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ ज़्यादा ही आक्रामक होने की सीख दी जाती रही है। कई बार ऐसी घटनाएं महाराष्ट्र विधानसभा से लेकर सार्वजनिक स्थलों तक देखने व सुनने को मिलीं जिसमें इन दलों के जनप्रतिनिधियों ने मारपीट,हिंसा व उपद्रव का सहारा लिया। ऐसा लगता है कि ऐसे लोगों का विश्वास वार्ता या सुलह-सफ़ाई से अधिक मारपीट करने पर ही रहता है। अभी पिछले दिनों एक बार फिर शिवसेना के ही एक सांसद रविंद्र गायकवाड़ ने एयरइंडिया के एक 60 वर्षीय कर्मचारी को अपनी गुंडागर्दी का शिकार बना डाला। एयर इंडिया के वरिष्ठ ड्यूटी मैनेजर शिवकुमार जो कि विमान यात्रियों का विमान में स्वागत करने हेतु स्वागत द्वार पर मौजूद थे, उन्हें गायकवाड़ ने इतना पीटा कि उनकी आंखों पर लगा चश्मा टूट गया। गायकवाड़ का आरोप है कि उनके पास बिजऩेस क्लास में यात्रा करने का टिकट था। परंतु उन्हें इकनोमी क्लास में बैठने को कहा जा रहा था। दूसरी ओर एयर इंडिया का कहना है कि जिस विमान में सांसद गायकवाड़ यात्रा कर रहे थे उसमें बिजऩेस क्लास की व्यवस्था थी ही नहीं।
सोचने का विषय है कि यदि उस विमान में बिज़नेस क्लास की सीटों की व्यवस्था होती और गायकवाड़ के पास उसी श्रेणी का टिकट भी था फिर आिखर विमान का स्टाफ उन्हें बिज़नेस क्लास में बैठने से रोकता ही क्यों? और यदि उनके पास टिकट तो बिज़नेस क्लास का था परंतु इस श्रेणी की व्यवस्था विमान में नहीं थी इसमें साठ वर्षीय विमान कर्मचारी शिवकुमार का आख़िर क्या देाष था? वैसे भी विमान कर्मचारियों को सभी विमानन कंपनियां इस बात के लिए पूरी तरह से प्रशिक्षित करती हैं कि वे यात्रियों के साथ पूरे आदर-सत्कार तथा मृदुल स्वभाव के साथ पेश आया करें। उन्हें यात्रियों के समक्ष हंसते व मुस्कुराते रहने की ट्रेनिंग दी जाती है। इसके बावजूद एयर इंडिया के बुज़र्ग विमानन कर्मचारी को एक सांसद के हाथों इस कद्र अपमानित होना पड़ा कि सांसद ने उसे गालियां दीं,उसका स्वेटर फाड़ दिया, उसकी शर्ट के बटन टूट गए, चश्मा तोड़ दिया तथा उसे अपनी सैंडल से अत्यधिक पीटा। इसकी वजह से उस कर्मचारी को अपने सहयोगी कर्मचारियों व यात्रियों के समक्ष घोर अपमान का सामना करना पड़ा। एक पत्रकार ने जब इस सांसद से घटना के बारे में पूछा तो उसने पत्रकार को झिडक़ी देते हुए बड़े गर्व से कहा कि हां मैंने 25 बार उसे सैंडल से मारा है। उसने इस घटना पर कोई पश्चाताप करने या माफ़ी मांगने से भी इंकार किया।
सवाल यह है कि क्या हमारे देश की राजनीति जो कभी महात्मा गांधी,पंडित जवाहरलाल नेहरू,सरदार पटेल,लाल बहादुर शास्त्री,डा० राममनोहर लोहिया,बाबा साहब भीमराव अंबेडकर तथा मौलाना अबुल कलाम आज़ाद जैसे देश के महान नेताओं को आदर्श मानकर चलती थी वही राजनीति अब गुंडों,बदमाशों,अपराधियों,मवालियों तथा समाज में दंगा-फ़साद फैलाने ,हिंसा का मार्ग अपनाने तथा दूसरों को अपमानित करने में अपनी शान समझने वाले लोगों के हाथों जा चुकी है? उपरोक्त घटना का एक दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह भी है कि जब गुंडागर्दी करने वाले इस सांसद के विरुद्ध देश की कई प्रमुख विमानन कंपनियों ने हवाई यात्रा पर प्रतिबंध लगाए जाने की घोषणा की उसके बाद लोकसभा में भी कई सांसद इसके पक्ष में आवाज़ बुलंद करते दिखाई दिए। हालांकि कई राजनैतिक दलों ने इसके दु:स्साहस की निंदा भी की। परंतु इसकी गुंडागर्दी को समर्थन देना या इसकी हौसला अफ़ज़ाई करना तो किसी भी क़ीमत पर मुनासिब नहीं था। यहां तक कि शिवसेना ने भी इस सांसद के विरुद्ध कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की। संसद में समाजवादी पार्टी के एक सांसद को विमानन कंपनियों द्वारा गायकवाड़ की यात्रा को प्रतिबंधित करने में एयरलाइंस कंपनियों की ‘दादागीरी’ तो नज़र आई परंतु गायकवाड़ के बर्ताव में उन्हें किसी प्रकार की ‘दादागीरी’ दिखाई नहीं दी। सदन में ही एक और शिवसेना सांसद ने पिछले दिनों विमान में कामेडियन कपिल शर्मा के दुर्व्यवहार का उदाहरण गयकवाड़ के पक्ष में देते हुए सवाल किया कि जब कपिल शर्मा के दुर्व्यवहार पर उसे विमान यात्रा के लिए प्रतिबंधित नहीं किया गया फिर गायकवाड़ पर प्रतिबंध क्यों? परंतु इस ‘भोले-भाले’ सांसद को शायद यह पता नहीं कि कपिल शर्मा ने अपने ही साथी के साथ कथित दुर्व्यवहार किया था उस विमान के कर्मचारियों के साथ नहीं।
बहुजन समाज पार्टी प्रमुख कांशीराम से लेकर उमा भारती,गोविंदा सहित और भी कई सांसद मंत्री व विधायक आदि राजनीतिज्ञ लोग अपने ऐसे ही आक्रामक दुर्व्यवहार के लिए अक्सर सुर्ख़ियों में रह चुके हैं। जिस देश में जनप्रतिनिधियों के सदन को संविधान के मंदिर की संज्ञा दी जाती हो वहां इस प्रकार के लोगों का पहुंचना निश्चित रूप से चिंता का विषय है। जो लेाग स्वयं अपने-आप पर नियंत्रण नहीं रख सकते,जिनमें जनप्रतिनिधि चुने जाने के बाद गंभीरता व उदारता के बजाए अहंकार व आक्रामकता का प्रवेश हो जाए क्या ऐसे लोग हमारे देश की भावी नस्ल के लिए कोई आदर्श स्थापित कर सकते हैं? ऐसे लोगों के इस प्रकार के आपत्तिजनक कारनामे जहां उस जनप्रतिनिधि की औक़ात ज़ाहिर करते हैं वहीं इनकी हरकतों से उस क्षेत्र की भी बदनामी होती है जहां से यह चुनकर किसी सदन में पहुंचते हैं। आज के समय में जबकि हमारे देश की राजनीति में अपराधियेां व बाहुबलियों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है इस प्रकार की दुर्भाग्यपूर्ण घटना ऐसे जनप्रतिनिधियों की निर्वाचित सदनों में उपस्थिति का स्वयं एहसास करा रही है। आज इस लोकतांत्रिक व्यवस्था में सुधार आने के बजाए जिस प्रकार राजनैतिक पतन का वातावरण देखा जा रहा है उसे देखकर एयरइंडिया के पीडि़त कर्मचारी शिवकुमार के ही शब्दों में ‘हमारे देश के सांसदों का व्यवहार व उनकी संस्कृति ऐसी हो तो हमारे देश की रक्षा केवल भगवान ही कर सकता है।

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1 Comment on "जनप्रतिनिधि: लाईसेंस समाज सेवा का या गुंडागर्दी का?"

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इंसान
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आज भारत की वर्तमान दयनीय स्थिति को देखते महत्वपूर्ण “सवाल यह भी है कि क्या अब गुंडों, बदमाशों, अपराधियों, मवालियों तथा समाज में दंगा-फसाद फैलाने, हिंसा का मार्ग अपनाने तथा दूसरों को अपमानित करने में अपनी शान समझने वाले लोगों के हाथों जा चुकी राजनीति” का सीधा संबंध “महात्मा गाँधी, पंडित जवाहरलाल नेहरु, सरदार पटेल, लाल बहादुर शास्त्री, डॉ. राममनोहर लोहिया, बाबा साहब भीमराव अंबेडकर तथा मौलाना अबुल कलाम जैसे देश के (तथाकथित) महान नेताओं को आदर्श मानकर” सरलमति भारतीयों द्वारा उनके राजनैतिक दल, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, के समर्थन से है? भारतीय उप महाद्वीप के मूल निवासियों के विरुद्ध रचाए… Read more »
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