लेखक परिचय

प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

Posted On by &filed under समाज.


dayan

काली कान्त झा

इक्सवीं सदी के भारत में आज जहाँ देशवासी दिन प्रतिदिन नित्य नए आयाम को छु रहे है वही झारखण्ड आज भी विभिन्न प्रकार की कुरीतियों से जूझ रहा है | झारखण्ड को बने लगभग १३ साल हो गए है लेकिन आज भी डायन कुप्रथा के नाम पर औरतो खास कर विधवाओ को प्रताड़ित किया जा रहा है | गौरतलब है की १५ नवम्बर २००० को झारखण्ड राज्य के गठन के साथ ही राज्य में डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम लागु कर दिया गया था इस अधिनियम के अंतर्गत डायन का आरोप लगाने वाले पर अधिकतम तीन महीने कैद या फिर एक हज़ार रुपये के जुर्माना का प्रावधान है और किसी महिला को डायन बता कर प्रताड़ित करने पर छह महीने की कैद, दो हज़ार का जुर्माना या फिर दोनों की सज़ा का प्रावधान है |

 

झारखण्ड प्रदेश की सरकार के अनुसार ये कुरीति पूरी तरह ख़त्म हो गई है लेकिन आये दिन समाचार पत्रों में घटनाये आती रहती है |

झारखण्ड में पिछले १२ महीने में करीब १२९ महिलाओ की हत्या डायन बता कर कर दी गई जाहिर है ऐसी घटनाओ में पंचायत से ले कर गाँव वाले की मिली भगत रहती है, पुलिस इन मामले में प्राथमिक दर्ज तो करती है लेकिन बात उससे आगे नहीं बढ़ पाती है | डायन बता कर महिलाओ को सावर्जनिक तौर पर मैला पिलाया जाता है, उसके बाल काट दिए जाते है, उन्हें निवस्त्र करके पुरे इलाके में घुमाया जाता है | आकड़ो के मुताबिक झारखण्ड गठन होने के बाद से २०१२ तक लगभग १२०० महिलाओ को डायन बता कर मार दिया गया |

कुछ महीनों पहले की एक घटना है जिसमे कोल्हान क्षेत्र में डायन बता कर तकरीबन १० महिलायों के जीव काट दिए गए थे | मई में लोहरदगा में ७० वर्षीय वृद्ध को डायन बता कर जला दिया गया था | हद्द तो तब हो जाती है जब परिवार के लोग भी डायन के नाम पर महिलाओ को प्रताड़ित करने लगते है ऐसे ही मामले में एक बेटे ने अपनी माँ की कुल्हाड़ी से मार कर हत्या कर दी थी पुलिस के अनुसार वो अपनी माँ पर डायन होने का संदेह करता था इसलिए अपनी पत्नी के साथ अपने ससुराल में रहता था बेटे को शक था की उसकी माँ टोना टोटका कर के उसके दो छोटे बच्चे की जान ले ली थी | बहुत मामले तो प्रकाश में आते ही नहीं है जो की सुदूर आदिवासी बहुल क्षेत्र में होते है |

आखिर ये सब क्या हो रहा है ? इसे रोकने की जबाबदेही किसकी है ? देश को आजाद हुए ६६ साल हो गए जहाँ लोग हर दुसरे दिन नए आविष्कार कर रहे है विज्ञानं की नई उचाइयो को छू रहे है, और लोग पाषाण युग की तरफ जा रहे है आदिम युग की तरह सोचने लगे है, अपनी नासमझी से मुर्खता की सारी हदे पार कर रहे है, इन्हें समझाने की जवाबदेही किसकी है ? क्या इसी को झारखण्ड का विकास कह रहे है ? यही भारत का निर्माण हो रहा है ? जब पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम  चल रहा था तो जोर शोर से एक नारा दिया गया था ‘एक भी बच्चा छुटा सुरक्षा चक्र टुटा’ क्या इसी तरह का नारा डायन कुप्रथा उन्मूलन में क्यों नहीं लागु किया जा सकता है |

आज के युग में जहाँ हम ऐसे तत्व को नकारते है वही दूसरी तरफ इन्ही को स्वीकारते भी है जिससे समाज में इस तरह की घटनाये देखने को मिलती है | ऐसी घटनाये वही देखने को मिलती है जहाँ के लोग गरीब है, अशिक्षित है | सरकार ऐसी जगह पर विकास की दीप क्यों नहीं जला पाई? आज जरुरत है ऐसे ग्रामीण आदिवासी इलाके में जा कर उन्हें जागरूक करने की |

 

Leave a Reply

1 Comment on "डायन कुप्रथा से जूझता झारखण्ड"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
हरिराम चौरसिया 'घाघ'
Guest

डायन कुप्रथा सहित समाज मॅ व्याप्त अन्य विकराल कुरीतियॉ से केवल अभिभाजित बिहार के लोग ही नही, बल्कि देश के अधिकान्श राज्यॉ के रहवासी भी निरन्तर सन्घर्श कर रहे है. २१ वी सदी के प्रगतिशील कहे जाने वाले भारत मॅ हो रहा यह कारनामा वेहद शर्मनाक है.

wpDiscuz