लेखक परिचय

श्‍यामल सुमन

श्‍यामल सुमन

१० जनवरी १९६० को सहरसा बिहार में जन्‍म। विद्युत अभियंत्रण मे डिप्लोमा। गीत ग़ज़ल, समसामयिक लेख व हास्य व्यंग्य लेखन। संप्रति : टाटा स्टील में प्रशासनिक अधिकारी।

Posted On by &filed under दोहे, साहित्‍य.


handकैसे कैसे लोग से भरा हुआ संसार।

बोध नहीं कर्त्तव्य का बस माँगे अधिकार।।

 

कहने को आतुर सभी पर सुनता है कौन।

जो कहने के योग्य हैं हो जाते क्यों मौन।।

 

आँखों से बातें हुईं बहुत सुखद संयोग।

मिलते कम संयोग यह जीवन का दुर्योग।।

 

मैं अचरज से देखता बातें कई नवीन।

मूरख मंत्री के लिऐ अफसर बहुत प्रवीण।।

 

जनता बेबस देखती जन-नायक है दूर।

हैं बिकते अब वोट भी सुमन हुआ मजबूर।।

 

 

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz