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प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

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भोपाल,8 फरवरी। प्रख्यात कबीर गायक स्वामी जीसीडी भारती (भारती बंधु) का कहना है कि देश के युवा अगर नई टेक्नालाजी के साथ अगर अपने आध्यात्मिक पक्ष को भी ठीक से समझ जाए तो भारत के विश्वगुरू बनने में देर नहीं लगेगी। समस्या यह है कि हम अपनी जड़ों को भूल गए हैं। वे यहां माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में विद्यार्थियों से संवाद कर रहे थे। संवाद का विषय था कबीर की संचार दृष्टि। उनका कहना था कि कबीर एक जीवन दृष्टि देते हैं, इसलिए वे किताबों का विषय नहीं हैं। उन्हें समझने के लिए दिमाग नहीं, दिल की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि आज बाजारवाद के समय में जब आपसी प्रेम कम हो रहा है, तब कबीर बहुत प्रासंगिक हो गए हैं। उनका कहना था कि जब आज से 600 साल पहले कबीर निडर होकर अपनी बात कह सकते थे तो आज के पत्रकारों को उनसे क्यों नहीं सीखना चाहिए। समस्या यह है कि हम सच कहने से डरते हैं। कबीर इसीलिए हमें सच कहने का साहस देते हैं। उनका कहना था कि लालच और अहंकार से ही व्यक्ति लक्ष्य से भटक जाता है। युवाओं को इससे बचना होगा। उनका कहना था कि दुनिया में आज अशांति का वातावरण है, सुसंवाद नहीं हो रहा है क्योंकि शांति की तलाश हम बाहर कर रहे हैं जबकि वह हमारे भीतर है।

कार्यक्रम के अध्यक्ष कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला ने कहा कि कबीर और रहीम जैसे कवियों की याद हमें इसलिए करनी चाहिए कि वे हमें संस्कार देते हैं। आध्यात्मिक संचार की शिक्षा और इस दिशा में अनुसंधान जरूरी है क्योंकि ये ही हमें जीने का रास्ता बताते हैं। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार शिवअनुराग पटैरया ने कहा कि भारती बंधु को सुनना एक विरल अनुभव है और वे सही मायने में कबीर को हमारे बीच में ले आते हैं। संवाद में भारती बंधु ने छात्रों के सवालों के जबाव भी दिए। कार्यक्रम का संचालन जनसंचार विभाग के अध्यक्ष संजय द्विवेदी ने किया।

 

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2 Comments on "कबीर को समझने को दिमाग नहीं दिल चाहिएः भारती बंधु"

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आर. सिंह
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साधारणतया न तो भ्रष्टाचार व्यापार की भाषा मेरे मेरे समझ में आती है न उनकी टिप्पणी, इस बार भी पता नहींउनकी यह टिप्पणी इस लेख से सम्बंधित है या नहीं,पर उनका यह कथन कि तम्बाकू से मुंह का कैंसर १%और टूथ पेस्ट के इस्तेमाल से९९% तम्बाकू उत्पादक कंपनियों का विज्ञापन मात्र है.पता नहीं वे किस तम्बाकू उत्पादक या विक्रेता से सम्बन्ध रखते हैं?.इसका कोई उदाहरण नहीं मिलता कि तम्बाकू नहीं इस्तेमाल करने वालों को केवल टूथ पेस्ट इस्तेमाल से मुंह का कैंसर होता है.ऐसे हो सकता है कि अपवाद स्वरुप किसी ऐसे आदमी को मुंह का कैंसर हुआ हो जो… Read more »
SARKARI VYAPAR BHRASHTACHAR
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||ॐ साईं ॐ|| सबका मालिक एक है,प्रकृति के नियम क़ानून सबके लिए एक है | देश में दांतों की बिमारी और मुह का केंसर तम्बाखू से कम १% और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के टूथ पेस्ट से ज्यादा ९९% तक हो रहा है | बहुराष्ट्रीय कंपनियों का क्वालिटी प्रोडक्ट –सौजन्य से hareshpatani 1 . पेस्ट हमलोग ब्रश करते हैं तो पेस्ट का इस्तेमाल करते हैं, कोलगेट, पेप्सोडेंट, क्लोज-अप, सिबाका, फोरहंस आदि का, क्योंकि वो साँस की बदबू दूर करता है, दांतों की सडन को दूर करता है, ऐसा कहा जाता है प्रचारों में | आप सोचिये कि जब कोलगेट नहीं था, तब… Read more »
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