लेखक परिचय

राजू सुथार

राजू सुथार

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untitledआह ! क्या दिन है थोड़ी – थोड़ी ठंड पड़नी शुरू हो गई थी साथी संग कैलाश ठंड से ठिठक रहे थे । कैलाश अभी 10 साल का है और 7वीं कक्षा में पढ़ रहा है, इनकी दो बहने है और दो भाई है, कैलाश परिवार में सबसे छोटा है इस कारण माँ का लाड़ला बेटा है । ” माँ – बेटे कैलाश अब उठ भी जाओ, बहुत समय हो चुका है विद्यालय के लिए देर हो जाएगी, उठो… जल्दी ।”
कैलाश – माँ बहुत नींद आ रही है,
माँ – अब उठ जाओ ना विद्यालय जाना है ।
रामरतन जो कैलाश के पिता है, अपने खेत में सुबह होते ही खेती का काम शुरू कर दिया करते है ।
कैलाश – पिता जी इतना जल्दी क्यों काम पर लग जाते हो, पता नहीं कितनी ठंड है ?
पिता – सही कहा बेटे पर हमारे लिए अच्छा ही है फसलें अच्छी होंगी, ज्यादा मुनाफा होगा चल चल तुझे विलम्ब हो रहा है ।
कैलाश – चलता हूँ अलविदा ।
बाप – आप ध्यान से जईओ बेटा ।
कैलाश – हां पिताजी ।
रामनगर गाँव में बहुत ठंड पड़ रही थी तो इधर कैलाश के पिता जल्दी – जल्दी खेत में काम पर लग जाते है , रामरतन के तीन भाई है हरिया, भानू और गोविन्द पर रामरतन से इनकी नहीं बनती है, क्योंकि रामरतन दिन भर मेहनत करके धनवान बन गया था इस कारण हमेशा बातों – बातों में झगड़ते थे एक दिन ,
हरिया – बड़े भैया आपकी पत्नी मेरे खेत से कुछ सब्जियां चुरा रही है, मैं हमेशा देखता हूँ ।
रामरतन – क्या बोल रहा है हरिया वो तो कभी खेत में आती ही नहीं है ?
हरिया – लगता है तुम भी मिले हुए हो ।
इस तरह हमेशा यह लड़ाई झगड़ा चलता रहता है ।
उस दिन बहुत ठंड पड़ रही थी, कैलाश को विद्यालय से आने में देर हो गई बाकी भाई बहिन जो दूसरी विद्यालय में पढ़ते है वे तो सब आ गए थे । लेकिन थोड़ी देर बाद कैलाश भी घर आ जाता है ।
कैलाश – उह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बहुत ठंड पड़ रही है माँ ।
माँ – आज इतनी देर कैसे हो गई कैलाश ?
कैलाश – वो ऐसे ही विद्यालय में समारोह था ।
कैलाश को बहुत ठंड लग रही थी इस कारण उसको भारी बुखार हो गया ।
दूसरे दिन पूरे मोहल्ले के सभी घरों से सुनने को आ रहा था, कि किसी को बुखार आ गया है तो किसी को उलटी हो रही है इत्यादि , इस कारण गाँव में महामारी सी फ़ैल गयी थी, ऐसे करते – करते अब रोज घरों से चार पाँच जनों की अर्थियां उठने लगी, पूरा गाँव जहां ख़ुशी से रह रहा था वो अब सुन्न सा लगने लगा ।
इधर कैलाश की हालत और नाजुक हो रही थी, घर वालों की आँखों से आंसू ऐसे बह रहे थे जैसे गंगा नदी परवान पर हो ,विद्यालय में कैलाश के साथी मित्र भी कैलाश के ठीक होने का इंतजार कर रहे थे लेकिन…
कैलाश – माँआआआ कहाँ हो आप, अब मुझे नहीं लगता कि मैं ठीक हो पाउंगा, अब मेरा अंत समय आ गया है माँ । कैलाश के भाई – बहिन माँ – बाप सभी काफी दुःखी थे , सभी भगवान से प्रार्थना कर रहे थे कि कैलाश ठीक हो जाए । इधर पूरा रामनगर गाँव खाली – खाली सा दिख रहा था और फिर गाँव वालों तक खबर पहुंची कि रामरतन का बेटा कैलाश भी चल बसा । इस तरह कैलाश के निधन के साथ ही इस गाँव से इस महामारी से अब तक 17 बच्चों की जानें जा चुकी थी । कैलाश के सभी घरवाले और दोस्त काफी दुःखी थे क्योंकि इनका एक सदस्य अब इस दुनिया में नहीं रहा था । घर वाले कुछ दिनों बाद अपने अपने कामों में लग गए थे, महामारी का संकट जारी था, और इधर ठंड बड़ी जोरों से पड़ रही थी ।

राजू सुथार

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