लेखक परिचय

डा. राधेश्याम द्विवेदी

डा. राधेश्याम द्विवेदी

Library & Information Officer A.S.I. Agra

Posted On by &filed under विविधा.


कन्हैया कुमार अपने विरोधियों पर तीखा हमलाकर जेएनयू को राजनीतिक मंच बनाया
दिल्‍ली हाईकोर्ट ने देशद्रोह के मामले में कन्हैया को जमानत प्रदान कर दी और देशविरोधी व सुरक्षा बलों के खिलाफ नारेबाजी लगाने वालों के खिलाफ कड़ी टिप्पणियां भी की हैं। अदालत ने कहा कि सभी को आत्मनिरीक्षण की जरूरत है। जे एन यू के संकाय भी सही रास्ते पर मार्गदर्शन कर देश के विकास में योगदान कर सकते हैं। इसी दृष्टि के लिए जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय स्थापित किया गया था।
माननीय हाईकोर्ट के कड़ी टिप्पणियां का सम्मान न करते हुए तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद जेएनयू पहुंचे कन्हैया कुमार ने प्रधानमंत्री समेत मीडिया और अपने विरोधियों पर तीखा हमला बोला। कन्हैया ने अपने विरोध में खबर चलाने वाली टीवी मीडिया और बीजेपी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग सही गलत का फैसला करने में शरीक हुए उनका धन्यवाद। दिल्ली पुलिस का धन्यवाद जिन्होंने इतना बड़ा काम किया।
जेएनयू को बदनाम करने के लिए चैनलों के प्राइम टाइम पर जेएनयू को जगह देने वाले लोगों का भी धन्यवाद। इसी बहाने सही उन्होने कम से कम जेएनयू को प्राइम टाइम पर जगह तो दी। कन्हैया ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद पर भी तंज कसा। जो लोग अपने आपको राजनीतिक विद्वान समझते हैं उनकी हालत देख लीजिए ।एबीवीपी पर टिप्पणी करते हुए कन्हैया ने कहा कि शिकार उसका किया जाता है जो शिकार करने लायक हो। सच में कह रहा हूं जेएनयू ने जो दिखाया जेएनयू जो सच कहने के लिए खड़ा हुआ है वो बड़ा काम है।
कन्हैया बोला कि इन सब लोगों ने सारा काम प्लान की तरह किया और जो हमने किया वो अचानक। मैं भाषण नहीं दूंगा मैं सिर्फ अपना अनुभव आपको बताउंगा। मैं पहले पढ़ता ज्यादा था सिस्टम को झेलता कम था। इस बार सिस्टम को झेला ज्यादा है। जेएनयू में लोग रिसर्च करते हैं। मैं उस देश की जनता से कहना चाहता हूं जो सब जानती है। प्रधानमंत्री जी ने ट्वीट किया है कि सत्यमेव जयते। प्रधानमंत्री जी से मेरा वैचारिक मतभेद है। मैं ये कहना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री जी सत्यमेव जयते क्योंकि ये सत्यमेव जयते आपका नहीं है। हमारे संविधान के द्वारा हमें दिया गया है। कन्हैया ने कहा कि छात्रों के प्रति देशद्रोह का इस्तेमाल एक हथियार के रूप में किया जाता है। हमारे यहां रेलवे स्टेशन पर एक जादूगर आता है वो कहता है जादूगर दिखाएगा जादू।
निति निर्माता कहते हैं काला धन आएगा। हर-हर मोदी घर-घर मोदी। सबका साथ सबका विकास जैसे जुमले हम सारे लोगों के जेहन में हैं ये महज जुमले हैं। कन्हैया ने अपने भाषण में आगे कहा कि सरकार चाहती है कि उनके द्वारा बोले गए जुमलों को भुला दिया जाए। इसके लिए एक तरीका अपनाया गया है। वो पहले इस देश की तमाम रिसर्च के फेलोशिप बंद करते हैं। सोचते हैं कि लोग फैलोशिप मांगने लगेंगे तो जितनी फैलोशिप उन्हें पहले मिलती थी उतनी उन्हें फिर वापस कर दीजिए इस तरह से सरकार जुमले भुला देना चाहती है। आज माननीय जेएनयू का मुद्दा इस वजह से प्राइमटाइम पर चला रहे हैं कि लोग असल मुद्दा भूल जाएं।
मैने पुलिसवालों से पूछा तो उन्होंने कहा कि पुलिस महकमें में सब जातिवाद से आते हैं। कन्हैया ने कहा कि हम उसी भ्रष्टाचार जातिवाद और भुखमरी से आजादी चाहते हैं। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि बाबा साहब ने कहा कि राजनीतिक लोकतंत्र से काम नहीं चलेगा। हम सामाजिक लोकतंत्र लेकर आएंगे। हम इसलिए लड़ रहे हैं कि एक राष्ट्रपति का बेटा और एक चपरासी का बेटा एक ही स्कूल में पढ़ाई कर सकें। सरकार जिस आंदोलन को दबाना चाहती थी वही आंदोलन इतना बड़ा बनकर उभरा है।
मुझे जेल में दो रंग की कटोरी मिलीं। एक कटोरी का कलर लाल था एक का नीला। मैं कटोरी को देखकर सोच रहा था कि इस देश में कुछ अच्छा होने वाला है। मुझे वो प्लेट देश की तरह लग रही थी। उसमें नीले रंग की कटोरी अंबेडकर के आंदोलन की तरह थी। हम सबका साथ सबका विकास वाला देश बनाएंगे। एक कहावत है कि जबतक तक जेल में चना रहेगा। आना-जाना लगा रहेगा।
आज माननीय प्रधानमंत्री जी का आदर ये बोलना पड़ेगा नहीं तो देशद्रोह का आरोप लगाया जाएगा। मेरी इच्छा हुई की टीवी में घुस जाउं और मोदी जी का सूट पकड़कर उनसे पूछूं मोदी जी छोड़ दीजिए स्टॉलिन की बात कभी हिटलर की भी बात कीजिए। आप उसकी बात कीजिए जिसकी आप टोपी लगाते हैं। गोलवलकर जी की बात कीजिए। मोदी जी मन की बात करते हैं सुनते नहीं हैं। तीन महीने बाद मेरी मां से बात हुई । जब जेएनयू में था तो मां से बात नहीं करता था। जेल में गया तो पता चला घर पर बात करते रहनी चाहिए। आप लोग भी करते रहा करिए। मैने तीन महीने बाद मां को फोन किया है उनसे कहा तुमने मोदी जी पर अच्छी चुटकी ली। मां ने कहा कि चुटकी तो वो लोग लेते हैं हम तो अपना दर्द बोलते हैं। मैने तो अपना दर्द कहा। वो बोलीं कि मोदी जी भी किसी मां के बेटे हैं। वो मन की बात करते हैं मेरे बेटे की भी बात कर लें।
राजनैतिक मंच के रूप में उपयोग
दिल्‍ली में बैठकर बिहार की सूरत बदलने का असफल प्रयोग कई बिहारी बाबू कर चुके हैं यूनीवर्सटियां शिक्षा का केंद्र  बने या फिर उस राजनीति की लडाई का मंच जिसके लिये प्रजातंत्र  में अलग से व्‍यवस्‍था है। बिहार से दिल्‍ली की जे एन यू पहुंचे कन्‍हैया ने जो कुछ भी पहले किया हो उसका एक बडा भाग न्‍यायालय के तहत विचारित है इसलिये इस पर कुछ भी कहना शायद उपयुक्‍त न हो किन्‍तु अब वह शिक्षण संस्‍थान को जिस प्रकार से राजनैतिक मंच के रूप में उपयोग कर रहे है वह निश्‍चित रूप से उस हर आम आदमी के लिये सोच का विषय है जिसके पैसे से तमाम जरूरी प्राथमिक्‍तायें दरकिनार कर सरकार के द्वारा जे एन यू जैसे बेहद खर्चीले संस्‍थान संचालित हैं।
बेहतर  हो कि  कन्‍हैया छात्रों की भीड में घुस कर राजनीति करने के स्‍थान पर खुल कर राजनीति करें। देश में प्रधानमंत्रियों के खिलाफ बोलने वाले  कन्‍हैया नये नहीं हैं। अपनी स्‍वभाविक नियति से दम तोडते जातिबाद के दंलदल से पुन: संस्‍कारी करने वालों में सबसे आगे रहने वाले पूर्व प्रधानमंत्री स्‍व वी पी सिह तो कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पिता स्‍व राजीव गांधी के मंत्रिमंडल में रहते हुए भी उनके खिलाफ बोलकर अपने समय के प्रमुख विपक्षियों से कही तगडे साबित होते रहे थे। यही नहीं मौका आते ही परहेजी विचारधारा वाली भाजपा से गठबन्‍धन कर सरकार भी बना डाली थी। किन्‍तु उनकी सरकार और पार्टी जनता दल का क्‍या हुआ यह सबके सामने है। यही नहीं जिस बोफोर्स की खरीद को लेकर जो हल्‍ला उन्‍हों ने रक्षामंत्री जैसे महत्‍वपूर्ण पद पर रहते हुए मचाया था वही पाकिस्‍तानी घुसपैंठियों के कारण कारगिल युद्ध के समय भारत के लिये सबसे उपयोगी साबित हुई।
कन्‍हैया के समान ही कई कांग्रेसियों और गैर कांग्रेसियों ने स्‍व पी वी नरसिम्‍हा राव के खिलाफ भी क्‍या नहीं बोला । बोलने वाले यह भी भूल गये थे कि स्‍व राव एक महान चिंतक  है और देश के खजाने को खाली कर देने वाली व्‍यवस्‍था से उन्‍हीं के कार्यकाल में मनमोहन सिह निजात का रास्‍ता तय करा सके थे। एक दो  नहीं बल्‍कि प्रधानमंत्रियों के खिलाफ बोलने वालो का पुराना सिलसिला है जो आगे भी चलता रहने वाला है । हकीकत में यह राजनीति में आगे बढते रहने ही स्‍ट्रेटजी है। जिसमें जनता के द्वारा पंच साल के लिये चुनी हुई सरकार को काम करने देना जैसी संवैधानिकपरंपरा को लगभग तिलांजली सी ही है। जिसे कि अब श्री कन्‍हैया के माध्‍यम से कई सिद्धहस्‍त अपनाने को प्रासरत थे यह बात तो अलग है कि अब तो श्री कन्‍हैया खद ही इसके खिलाडी हो चुके हैं।
कन्‍हैया के बकौल वह बेरोजगारी बिहार के पिछडे पन जैसी बीमारियों से लडना चाहते है वह भी दिल्‍ली में बैठकर । समझ से परे है। बिहार के पिछडे दिन आज के नहीं हैं स्‍व बाबू जगजीवन राम श्रीमती मीरा कुमार भगबत झा आजाद के बेटे कीर्ति आजाद शरद यादव शत्रुघ्‍न सिन्‍हा लालू यादव आदि दिल्‍ली में बैठकर  दशकों से लडते रहने के चैम्‍पियन रहे किन्‍तु बिहार पिछडता ही नहीं रहा दो भागों में बंट भी गया। जनाब अगर लडना ही हो तो बिहार जाकर सुधार की कोशिश करें जहां सरकारे स्‍पेशल पैकेज की बीमारी की शिकार है ओर नान प्‍लान एक्‍सप्रेडीचरों से सरकारी धन की तीन तेरह किये जा रही है ।
kanhaiya

Leave a Reply

2 Comments on "कन्हैया का तीखा हमला"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
बी एन गोयल
Guest
बी एन गोयल

आज ही सीता राम येचुरी ने नए नेता को बिहार में चुनाव प्रचार करने के लिए चुन लिया है – नए नेता कह रहे थे की उन का राजनीती से कोई लेना देना नहीं लेकिन चुनाव प्रचार क्या गैर राजनैतिक काम है ?

बी एन गोयल
Guest
बी एन गोयल

यहाँ सन्दर्भ पश्चिमी बंगाल के चुनाव से था …….

wpDiscuz