लेखक परिचय

कनिष्क कश्यप

कनिष्क कश्यप

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

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I LOVE TO WALK IN THE RAIN ,,,, knowbody knows  i am crying..

I LOVE TO WALK IN THE RAIN ,,,, knowbody knows i am crying..

अक्श बिखरा पड़ा है आईने में

मैं जुड़ने कि आस लिए फिरता हूँ

कदम तलाशते कुछ जमीं

हाथों पर आकाश लिए फिरता हूँ

कठोर हकीक़त है है मेरा आज

कल खोया विस्वास लिए फिरता हूँ

कदम उठते पर पूछते कुछ सवाल

क़दमों का उपहास लिए फिरता हूँ

कामयाबियां खुशी नहीं दे पाती

ऐसी कमी का आभास लिए फिरता हूँ

जाने यह कैसी जुस्तजू है

जाने कैसी प्यास लिए फिरता हूँ ?

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3 Comments on "कनिष्क कश्यप : अक्श बिखरा पड़ा है आईने में"

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राजेन्द्र स्वर्णकार : rajendra swarnkar
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कनिष्क कश्यप जी

आज पता चला ,आप तो छुपे रुस्तम निकले …

कामयाबियां खुशी नहीं दे पाती

ऐसी कमी का आभास लिए फिरता हूँ

जाने यह कैसी जुस्तजू है

जाने कैसी प्यास लिए फिरता हूँ ?

अच्छे भाव-शिल्प की सुंदर कविता केलिए आभार ! बधाई ! मंगलकामनाएं !

बधाई और शुभकामनाओं सहित…
– राजेन्द्र स्वर्णकार

हिमांशु डबराल
Guest
हिमांशु डबराल

बहुत अच्छा लिखा है आपने…..

nirmla.kapila
Guest

कदम तलाशते कुछ जमीम पर
हाथों मे आकाश लिये फिरता हूँ
लाजवाब सुन्दर आभार्

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