लेखक परिचय

रवि श्रीवास्तव

रवि श्रीवास्तव

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

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-रवि विनोद श्रीवास्तव-

kejri and auto

दिल्ली में पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने के बाद आम आदमी पार्टी भले ही आम लोगों के लिए काम कर रही हो पर केजरीवाल के हमेशा से समर्थक रहे ऑटो ड्राईवर दिल्ली के जनता को परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इनकी मनमानी किराए की वसूली आज भी जारी है। हालांकि सारे ऑटो वाले ऐसा नहीं करते हैं कुछ अपनी ईमानदारी आज भी दिखाते हैं। इतना ही नहीं, इन ऑटो ड्राइवरों में बहुतों को तो बोलने का ढंग भी नहीं है। हर छोटी सी दूरी पर मनमानी किराया बोल देते हैं। साथ ही कहते हैं  इतना देना है तो दो वरना किसी और को देख लो। बात ये नहीं चुभती की दूरी कम और किराया ज्यादा, बोलने का लहजा भी ठीक नहीं होता। एक ईमानदारी की दांस्ता एक ऑटो ड्राइवर से मिली, तो मुझे लगा कि कुछ लोग तो हैं जो दिल्ली के लोगों के बारे में सोचते हैं। मैं मयूर विहार फेस-3 से अपने घर के लिए जा रहा था। उचित समय पर मुझे आनंद विहार रेलवे स्टेशन पहुंचना था। घर से निकल कर ऑटो का इंतजार कर रहा था। तभी एक ऑटो को रूकवाया, मैंने उससे कहा कि आनंद विहार रेलवे स्टेशन तो उसने कहा 120 रूपए लगेगे। फिर कहा 110 देना है। मैंने मना कर दिया, उसे लगा शायद ट्रेन पकडनी है, जो मर्जी है मांग लो। मीटर से चलने के लिए कहो तो मीटर खराब हो जाता है। यही हाल तीन से चार ऑटो ड्राईवर का रहा। किसी 150 रूपए मांगें तो किसी ने 100 रूपए। एक बार दिल तो कह रहा था कि दे दूं और चला जाऊं। तभी एक ऑटो आया उसने पूछा कहां जाना है, जबाब सुनकर कहा चलो, मैंने कहा पैसे बता दो, तो उसने कहा 70 रूपए दे देना, फिर वो 60 में राजी हो गया। मुझे नहीं पता कि मैं उसे कम किराया दे रहा हूं, पर इतना जरूर था कि दोनों के लिए शायद फायदा जरूर था। तभी वो ऑटो ड्राइवर तैयार हो गया था। घर पर पहुंचने के 5 दिन बाद मै वापस दिल्ली आ रहा था। वहीं आनंद विहार से मयूर विहार का सफर एक बार फिर तय करना था। ये बताने से पहले एक नज़र घर पर डालना चाहेंगें।  घर पर खबरिया चैनल देख रहा था, तभी दिल्ली के मुख्यमंत्री ऑटो ड्राईवरों को सम्बोधित करते नजर आए। दिल में एक ख्याल आया, चलो अब शायद दिल्ली की जनता की परेशानी दूर हो जाएगी। केजरीवाल अपने चहेतों को समझा रहे थे। कह रहे थे कि दिल्ली की जनता ऑटो ड्राइवरों से काफी परेशान रहती है। किराए को लेकर और बोलने के ढंग को लेकर। मुख्यमंत्री कह रहे थे कि आप (ऑटो वालो को) मेरे अपने हैं, दिल्ली की जनता की पूरी ईमानदारी से सेवा करों मै आप सबकी सेवा करूंगा। सुनने में काफी अच्छा लगा। चलो कुछ तो सुधरेगें। डीटीसी की हड़ताल की बात भी उस रैली में केजरीवाल ने कही और माना भी उस समय दोगुना किराया वसूला था ऑटो वालों ने। लोगों की मजबूरी थी देना। आफिस, इंटरव्यू, अस्पताल आदि जरूरी जगह जाने के लिए बस का नहीं केवल ऑटो का सहारा था। तो जितना एक दिन में वसूल सकते हो वसूल लो। इसी एक दिन में जनता से वसूलकर लखपति तो बन नहीं जाओगे, पर हजारपति तो बन जाओगे। क्या सोच थी इन ऑटो वालों की। लोग परेशान हो रहे थे। बस का न चलना मुसीबत बन गया था। उस रैली में केजरीवाल ने एक हेल्पलाइन भी जारी की, जिस पर ऑटो ड्राईवरों की शिकायत कर सकते हैं अगर वो कुछ गलत व्यवहार बगैरह करते हैं। दिल में थोड़ी सी खुशी हुई। चलों अब जो तो दिल्ली की जनता के हाथ में है। 5 दिन बाद जब मैं वापस आया तो सोचा कि अपने चहेते कि बात सब मानते हैं, ऑटो वाले भी केजरीवील की बात को मान गए होंगे। दो दिन पहले केजरीवाल का सम्बोधन और फिर दो दिन बाद का हाल दिल्ली के ऑटो वालों का। मैंने फिर पूछा कि मयूर विहार फेस-3 तो फिर से वही जवाब 150 रूपए, कोई 120 रूपए तो कोई मना कर रहा जाने के लिए। एक तरफ तेज धूप से, दूसरी तरफ ऑटो वालों को पूछते- पूछते थक गया। कोई 120 से कम राजी नहीं है रहा था। मुझसे रहा नहीं गया, मैंने एक से पूछ लिया। भाई दो दिन पहले तो आप सबको समझाया गया है। उसने कहा किसने समझाया, तो मैंने कहा आप के मुख्यमंत्री ने और किसने, नजारा देखने वाला था। उसने कहा फर्जी वात मत करो चलना है तो 120 रूपए दो, मैंने कहा शिकायत के लिए हेल्पलाइन भी शुरू कर दी है। गुस्से से उसने बोला जाओ कर दो शिकायत। घर का खर्च चलाने के लिए मुख्यमंत्री नहीं आते हैं। दिन भर कमाता हूं तब चलता है। मैंने भी बहस का मन बना लिया था, ताकि और भी बाते जान सकूं उनके दिल की, तो कह दिया कि घर का खर्च चलाने के लिए जनता को लूटना शुरू कर दोगे। उसने बिना कुछ जवाब दिए आखों में गुस्सा लिए अपने ऑटो का गियर बदलते हुए तेजी से आगे चला गया। तो मुझे लगा, मुख्यमंत्री ने शायद भैंस के आगे बीन बजाई है। मैंने अपना समान उठाया और चल रही टाटा मैजिक से 15 रूपए देकर मयूर बिहार फेस-3 आया। ये कोई पहला वाक्या नहीं है, दिल्ली रेलवे स्टेशन से तो 250, 230, 200 रूपए मांगते हैं ये ऑटो वाले। लोग परेशान हो जाते हैं पर क्या करें, मजबूरी है। ऐसे न जाने कितने लोग बाहर से आते हैं ऑटो ड्राईवर उनसे मन मुताबिक किराया वसूल करते हैं। दिल्ली की जनता के लिए ये परेशानी आज भी है, और रहेगी। बात यहां के लोगों की नहीं बाहर से घूमने आए लोग भी अपने घर जाकर इनकी बुराई करते हैं।  अगर आप दिन भर ऑटो चलाकर पैसा कमा रहे हैं तो दूसरा भी दिनभर काम करके ही कमा रहा है, ऐसे में इतना क्यों ? अपनी छवि को बिगाड़ रहे हो। आप जिसे चाहते है, और उसे दिल्ली में दोबारा मौका दिया सत्ता का उसकी बात तो सुन सकते हैं। अगर दिल्ली सरकार आप के लिए इतना करने के लिए तैयार है तो आप का भी फर्ज है दिल्ली के लोगों की सेवा करना। ईमानदारी के लिए आप ने केजरीवाल को चुना, और ऐसा कर आप खुद पर दाग लगा रहे हो।

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