लेखक परिचय

हर्ष सिंह

हर्ष सिंह

मै उत्तर प्रदेश के जौनपुर का निवासी हूँ तथा त्रिवन्द्रम मेडिकल कॉलेज , त्रिवन्द्रम , केरल मे एमबीबीएस प्रथम वर्ष का छात्र हूँ|

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हर्ष सिंह

कश्मीर को हम भारतीय अपना गौरव कहते है | कश्मीर को हमने हिंदुस्तान का मुकुट कहा है लेकिन क्या हमने कश्मीर के साथ वो व्यवहार किया जिसका वो अधिकारी है ? शायद नहीं , क्यूकी कश्मीर को हमने हमेशा एक जीती हुई वस्तु के समान माना और समझा है | कश्मीर को कभी समझा ही नहीं कश्मीर और दिल्ली की दूरी कभी नहीं मिटी |1947 से लेकर आज 2015 तक 68 साल हो गए कश्मीर आज तक हमारे लिए एक पहेली ही बना रहा | कश्मीर क्या चाहता है न तो नेहरू जी ने समझा , ना इंदिरा ने , ना राजीव ने और ना ही मोदी उसे समझ पा रहे हैं | 1947 मे हमने राजा हरी सिंह से ‘इन्स्ट्रुमेंट आफ एक्सेसन’ पर दस्तखत तो करा लिए लेकिन कश्मीर को संभाल नही पाये और ना ही पाकिस्तानी कुचक्र को समझ पाये | ये तो 100 फीसदी सही है की कश्मीर का आतंकवाद पाकिस्तान की देन है और वो भाषण जो पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो ने 88 मे पाक अधिकृत कश्मीर मे दिया और जिसने हिन्दुस्तानी कश्मीर मे कश्मीरी अवाम को हिंदुस्तान के खिलाफ भड़का दिया और यहा हिंदुस्तान के खिलाफ एक ऐसा माहौल बना दिया जिसने अब तक कुल 1 लाख लोगो की बली ले ली | कश्मीर मे 88 से अफस्पा लगा हुआ है जो उस समय बहुत ज़रूरी था क्यूकी उग्रवाद और अलगाववाद अपने चरम पर था जेकेएलएफ़ , लश्कर , हिजबुल और हुर्रियत कान्फ्रेंस जैसे उग्रवादी और अलगाववादी संगठनो ने वहा आतंक फैला रखा था | स्थिती तब और विस्फोटक और चिंताजनक होने लगी जब वहा कश्मीरी पंडितो और सिखों को निशाना बनाया जाने लगा | उनकी हत्या होने लगी औरतों और लड़कियों की इज्ज़त लूट कर उन्हे मारा जाने लगा| इतना ही नही मस्जिदों से नमाज़ के दौरान भी भड़काऊ नारे लगने लगे | इन सब घटनाओ के कारण वहा पाए रह रहे कश्मीरी पंडितो मे डर का माहौल व्याप्त हो गया और ऊपर से रोज मिल रही धमकियो और हो रही हत्याओ से वे सहम गए , और 19 -20 जनवरी 1990 को लाखो कश्मीरी पंडितो ने रातो रात अपने घर बार छोड़ दिये और भाग कर जम्मू या दिल्ली आ गए | 4 लाख से ज्यादा पंडित कश्मीर छोड़ कर भाग गए |वो आज तक अपने ही देश मे विस्थापन का दंश झेल रहे हैं |

इसी बीच आंशिक अफस्पा को पूरी तरह से लागू कर दिया गया और जम्मू कश्मीर मे राज्यपाल शासन लागू हो गया | इसके बाद शुरू हुआ सेना और अर्धसैनिक बलों का आतंकवाद और अलगाववाद का दमन करने का अमानवीय कदम | 1991 मे आरआर 15 के जवानो ने कश्मीर के कुनोन पोशपोरा गाँव मे धावा बोल कर वहा की 100 से ज्यादा महिलाओ का सामूहिक बलात्कार किया जिनकी उम्र 13 से 80 साल के बीच थी उनमे से कई बीमार थी और कई गर्भवती | कई महिलाओ ने इसके बाद आत्महत्या कर ली थी| सेना ने पहले तो इसे उग्रवादियो द्वारा बता कर पल्ला झाड लिया लेकिन बाद मे दबाव पड़ने पर पूरी पलटन का तबादला कर दिया गया| सेना के इन दमनकारी फैसलो का नतीजा ये हुआ की कश्मीर मे भारत के खिलाफ असंतोष बढ़ने लगा | 1994 मे जेकेएलएफ़ के प्रमुख यासीन मलिक ने ये घोषणा की वो अब शांति पूर्वक विरोध करेंगे यानी जेकेएलएफ़ ने एक तरह से बंदूक का सहारा छोड़ दिया था| यासीन मलिक कश्मीर की पूर्ण स्वतन्त्रता की मांग करते हैं वही हुर्रियत कान्फ्रेंस के प्रमुख सईद शाह गिलानी कश्मीर का पाकिस्तान मे विलय चाहते हैं|

सेना ने उग्रवाद को ख़त्म करने के लिए कई बार मानवाधिकारों का हनन भी किया बिझेबेझारा नरसंहार (1993) ,सोपोर नरसंहार (1993), प्रमुख है जिनमे सेना को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया | सेना ने वहा पापा 2 जैसे कई इंटेरोगेशन सेंटर खोले थे जहा ले जा कर लोगो से पूछताछ की जाती थी और इसके लिए वहा बहुत अमानवीय तरीको का इस्तेमाल किया जाता था | इन्हे बाद मे बंद कर दिया गया | कश्मीर मे अब तक 40000 लोग लापता हो चुके हैं जिनको सेना पूछ ताछ के लिए ले गयी थी | सेना का कहना है की वो सीमा पार आतंकवादी कॅम्पस मे हैं | कश्मीर मे स्थित मानसिक रोग अस्पताल मे 10000 से ज्यादा लोग भर्ती हैं , 20000 से ज्यादा लोगो ने आत्महत्या कर ली जिनमे महिलाए ज्यादा हैं | अब तक कश्मीर मे कुल 1लाख लोग मारे जा चुके हैं | सरकारी आंकड़ो की अगर माने तो अब 20000 नागरिकों की मौत सेना की कार्यवाही मे हुई इन्हे कोलेटेरल डैमेज बोला गया | 16000 आतंकवादी और 7000 सेना के जवान इन 25 सालो मे मारे गए | सेना और उग्रवादियो द्वारा वहा भारी तौर पर मानवाधिकारो का हनन किया गया है | अभी अक्तूबर 2014 मे वह आरआर 15 द्वारा 3 किशोरों को आतंकवादी बता कर मर दिया गया बाद मे सेना का ये दावा ग़लत निकला | सेना ने इस पर माफी मांगी और इस घटना मे शामिल जवानो के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उनका तबादला कर दिया | नवंबर मे सेना के कुछ जवानो को 2010 मे हुई 3 निर्दोष युवको की हत्या मे सेना कोर्ट द्वारा उम्र कैद और कोर्ट मार्शल की सज़ा दी गयी | ये सच है की वहा आतंकवाद और अलगाववाद है जिसे दबाने के लिए कठोर कदमो की ज़रूरत है लेकिन इसका मतलब ये नही की इंसानियत को दरकिनार कर दिया जाये | उग्रवादियो का काम है हत्या करना उन्हे इसके लिए कितना भी कोसा जाए कम है | सेना को वहा स्थिति को सामान्य करने और मुसीबतों को ख़त्म करने भेजा गया है ना की वहा जा कर इसे और गंभीर करने | भारत की सेना बहुत महान है हम देश वासियों पर हमारी सेना के बहुत उपकार हैं जिनहे भुलाया नहीं जा सकता | लेकिन कश्मीरी भी अपने है इसी देश के निवासी हमारे भाई और बहन | सेना एक बहुत जिम्मेदार संगठन है जिससे ये उम्मीद नही की जा सकती की वो इन अमानवीय कृत्यो मे उलझे |

दिल्ली को कश्मीर पर ध्यान देने की ज़रूरत है सब सेना और राज्य सरकार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता क्यूकी किसी के पास सीमा रहित अधिकारो का अर्थ है उन अधिकारो का दुरुपयोग | यही कश्मीर के लिए अच्छा होगा और भारत के लिए भी | कश्मीर की आवाम को मोदी जी से बहुत उम्मीदे हैं जिनहे मोदी जी को समझना होगा | मोदी जी ने इसकी शुरुआत कश्मीर बाढ़ पीड़ितों को 100 करोड़ की सहायता देकर कर भी दी | मोदी पर मुस्लिम विरोधी होने के जो आरोप लगे है इसकी वजह से देश का एक मात्र मुस्लिम बहुल राज्य उन पर भरोसा करने मे हिचकिचा रहा है .

अभी प्रधानमंत्री जी को कश्मीर के लिए बहुत कुछ करना होगा और हम ये आशा करते हैं की वो इसमे सफल होंगे और अपने पूर्व प्रधानमंतरिओ द्वारा की गयी ग़लतियो को नहीं दोहराएंगे | बाकी कश्मीर तो हमारा है और हमारा ही रहेगा , भारत का गौरव और मुकुट |

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2 Comments on "कश्मीर , कश्मीरियत और इंसानियत"

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Dr Ashok kumar Tiwari
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Dr Ashok kumar Tiwari
आतंकवादी ही सेना को बदनाम करने की नापाक साज़िशों के तहत सेना- सीआरपीएफ की वर्दी पहनकर अवाम पर गोलियाँ चला रहे हैं — समझने की कोशिस करो :——पाक अधिकृत कश्मीर वालों को भी सोचना चाहिए :— ” पाकिस्तान ने कश्मीर का (अक्साई चिन) का जो इलाका चीन को दे दिया है, उसे कैसे प्राप्त करोगे और क्या 1948 में पाकिस्तानी कबायलियों ने आपके साथ न्याय किया था ?” ” एक लड़की होने के नाते कश्मीर लौटने के बाद डर सता रहा है ‘दंगल’ की जायरा वसीम को—–” जब कश्मीरी लड़की का ये हाल है तो ——-एकमात्र समाधान है :—– आदरणीय… Read more »
sureshchandra.karmarkar
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sureshchandra.karmarkar
काश्मीर ,या भारत का कोई प्रान्त हो पुलिस या फ़ौज द्वारा अन्याय निंदनीय है. यदि ”कश्मीरियत”का जुमला हमेशा ही बने रखना है और इस आधार पर कश्मीरी पंडितों और सिखों की प्रतारणा करनी है तो समस्या का हल नहीं हो सकता। हर प्रदेश की अपनी अस्मिता है ,इसका मतलब यह तो नहीं उस प्रदेश के बहूसंख्यक ,वहां के अल्पसंख्यकों पर अत्यचार करें. केरल ,नागालैंड,मिजोरम में शायद हिन्दू या तो अल्पसंख्यक हैंया कम हैं.iska मतलब वे अपनी प्रान्तीयता ,अस्मिता,धर्म के आधार पर इन कम संख्या वाले समुदायों को प्रताड़ित करें?उन्हें भगा दें?उनकी जमीने ,संपप्ति। चीन लें?उनकी बहु बेटियों की इज्जत से… Read more »
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