लेखक परिचय

कुमार सुशांत

कुमार सुशांत

भागलपुर, बिहार से शिक्षा-दीक्षा, दिल्ली में MASSCO MEDIA INSTITUTE से जर्नलिज्म, CNEB न्यूज़ चैनल में बतौर पत्रकार करियर की शुरुआत, बाद में चौथी दुनिया (दिल्ली), कैनविज टाइम्स, श्री टाइम्स के उत्तर प्रदेश संस्करण में कार्य का अनुभव हासिल किया। वर्तमान में सिटी टाइम्स (दैनिक) के दिल्ली एडिशन में स्थानीय संपादक हैं और प्रवक्ता.कॉम में सलाहकार-सम्पादक हैं.

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आप के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 23 अप्रैल को वाराणसी से नामांकन के समय ऐसी गलतियां कर सकते हैं, जिससे उनका नामांकन रद्द हो जाए। दरअसल, वाराणसी में अरविंद केजरीवाल को इन दिनों इतना विरोध झेलना पड़ रहा है कि अरविंद दिल्ली के पैटर्न पर वाराणसी में पहले तो यह कहकर चुनाव मैदान में कूद पड़े कि वाराणसी की जनता की इच्छा है कि वह चुनाव लड़ें। लेकिन हाल में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी का जिस कदर जोर-शोर से प्रचार अभियान परवान चढ़ा है उससे केजरी बाबू की बोलती ही बंद हो गई है। वे जहां भी जा रहे हैं, वहाँ भारी विरोध हो रहा है। कुछ दिनों पहले उन पर अंडे फेंके गए और फिर काली स्याही फेंकी गई, लेकिन केजरीवाल प्रथमद्रष्टा टस से मस होते नहीं दिख रहे।

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दरअसल, केजरीवाल बड़ी मुसीबत में फंस गए हैं। वाराणसी से अगर वो सीधे पैर लौटते हैं और अब नहीं लड़ते हैं तो उनके राजनीतिक करियर पर भगोड़ा का प्रश्न चिह्न फिर से उपलाने लगेगा, क्योंकि, पहले ही दिल्ली की सीएम कुर्सी को छोड़कर उन्होंने आफत मोल ले ली है और मजे की बात की उन्होंने इसपर मीडिया के जरिए अफसोस भी जाहीर कर लिया। ऐसे में वाराणसी से भागना तो उनके लिए मुश्किल है। अब विश्वस्त सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि अरविंद ऐसी चालें चलने की सोच रहे हैं जिससे उनके चुनाव लड़ने पर खुद ब-खुद ग्रहण लग जाए और वो सम्मानजनक ढंग से वाराणसी से विदा ले सकें।

ऐसे में केजरीवाल या तो 23 अप्रैल को नामांकन के दिन ऐसा कोई हेरफेर कर दें या गलती कर दें जिससे उनका नामांकन खुद रद्द हो जाए। या तो वो ऐसी कोई बड़ी जानकारी छिपा लें, जिससे उनकी उम्मीदवारी पर असर पड़े। या तो वो ऐसा कोई व्यान देदें, जिससे उनकी उम्मीदवारी रद्द हो सकता हो।

ज्ञात रहे कीजरीवाल का वाराणसी में विरोध की हद यहां तक है कि उन्हें विरोध के चलते वाराणसी में अपना घर तक बदलना पड़ा है। केजरीवाल अभी तक संकटमोचन मंदिर के प्रमुख विशम्भर मिश्रा के घर पर रह रहे थे, लेकिन विरोध के कारण उन्हें दूसरी जगह जाना पड़ा है। जब चारों तरफ केजरीवाल का विरोध होने लगा तो महंत के ऊपर एक सामाजिक दबाव बनने लगा, जिसके चलते महंत ने केजरीवाल को जगह बदलने को कहा और उन्होंने फिर अपना ठिकाना बदल लिया। हालांकि केजरीवाल के लिए यहां आनन-फानन में एक ऑफिस बनाया गया है और वह फिलहाल यहीं पर रहेंगे। लेकिन वहां भी आसपास केजरी को नमो-नमो की गूंज सताने लगी है।

दरअसल, वाराणसी में अरविंद के सामने इतने सवाल उपज रहे हैं कि उनके लिए जवाब देना भी मुश्किल है। जब उन्हें अन्ना का पहले दूत और अब उनके अलग हटकर आका बनने की बात पूछी जाती है, तो उनके पास तर्क तो होता है, लेकिन जिस लोकपाल बिल के बल वह यहां तक पहुंचे उस पर चुप्पी क्यों है, इसका जवाब के लिए वो दिल्ली सरकार में रहते कदम को बताने लगते हैं, लेकिन दिल्ली सरकार से जिस कदर हटे, इस पर वो मौन हो जाते हैं।

केजरी बाबू की परेशानी यहीं तक नहीं है। उनके विश्वसनीय शागिर्द और अमेठी से लोकसभा प्रत्याशी कुमार विश्वास के प्रचार में अब आप की टोपी पर केजरी नहीं, विश्वास की फोटो देखी जा रही है। केजरीवाल के लिए यह भी मुसीबत है, क्योंकि हाल में आप के एक नेता ने विश्वास को आप का केजरीवाल से बड़ा नेता बताया था, जिसके बाद उसे बाहर कर दिया गया। चुनाव के बाद केजरी और विश्वास के बीच वह भी चिंगारी सुलगने वाली है।

अंदर – अंदर केजरीवाल को यह डर सताने लगा है कि अगर वो वाराणसी में चुनाव बुड़ी तरह हार जाएँ, और कुमार विश्वास चुनाव जीत जाएँ, या केजरीवाल और कुमार विश्वास दोनों ही चुनाव हार जाएँ और विश्वास के हार का अंतर कम हो या कहें कुमार विश्वास को उनसे बहुत ही ज्यादा मत मिले दोनों ही हालत में केजरीवाल की मुश्किलें बढ़नेवाली है।

ऊपर से कोर्ट की सख्ती केजरीवाल पर अलग है। दिल्ली की एक अदालत ने अरविंद केजरीवाल और आप के तीन अन्य नेताओं को आगाह है किया कि केंद्रीय दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल के बेटे वकील अमित सिब्बल की ओर से दायर आपराधिक मानहानि मामले में 24 मई को पेश होने में यदि वे नाकाम रहते हैं तो ‘मजबूरन उसे कार्रवाई’ करनी होगी।

चलिए अगर केजरी वापस नहीं होते हैं और लोकसभा चुनाव लड़ते हैं और चुनाव हार जाते हैं तो भी उनके पास रेडीमेड जवाब पहले से ही है। इस हार के लिए वाराणसी की जनता ही जिम्मेदार है, क्योंकि केजरीवाल कहेंगे कि “मैं क्या जी, मैं तो बहुत ही मामूली आदमी हूँ, मेरी कोई औकाद नही है, वो तो वाराणसी की जनता ने मुझे कहा कि खड़े हो जाओ तो मैं खड़ा हो गया। मैं तो सारे निर्णय जनता से पूछ कर करता हूं।“

खैर, बाकी परेशानियों से तो केजरीवाल चुनाव के बाद निपट लेगें, लेकिन अभी फिलहाल उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा है कि वाराणसी से इस चुनावी रणभूमि से वापस कैसे मुड़ा जाए, वो केजरीटर्न क्या हो।

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38 Comments on "वाराणसी का मैदान छोड़ सकते हैं केजरीवाल"

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डॉ. मधुसूदन
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वाराणसी का मैदान, अपनी ओरसे नहीं छोड़ सकते केजरीवाल। क्यों कि, भ्रष्टाचार का विरोध छोडकर, मोदीका ही विरोध करने के लिए उनकी नियुक्ति(?) हुयी प्रतीत होती है। घटनाक्रम यही बताता है। पदार्पण, उन्होंने सही किया, (१) अण्णा के साथ भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में जुडे। (२) परिणामकारी होने के लिए, भ्रष्टाचार विरोधी आ आ पा बनाई। (३)जीते, और ४९ दिन मु. मंत्री रहे। (४) लोकसभा के लिए, त्यागपत्र देकर निकले। यहांतक ठीक था। ——————————-यहां से पलटने लग गए।—- ==>फिर लगता है, बीच में कुछ बदलाव हुआ, जो महा भ्रष्टाचारी कांग्रेस का पीछा छोड, –भ्रष्टाचार का विरोध छोड, भ्रष्टाचार विरोधी मोदी के… Read more »
आर. सिंह
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डाक्टर मधुसूदन जी,आआप की निगाह में भ्रष्टाचार के मामले में कांग्रेस और भाजपा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं.इसीलिए जहां रागा के खिलाफ कुमार विशवास हैं ,वहीँ नमो के खिलाफ अरविन्द है. नमो के लिए तो वाराणसी में हारने के बावजूद भी संसद में पहुंचने का रास्ता खुला है,पर अगर रागा हार गए ,तो वे संसद में पहुँच भी नहीं सकेंगे. मैं तो इसके बारे में इतने तर्क दे चूका हूँ कि अगर सब को एक साथ कापी और पेस्ट कर दूँ ,तो पता नहीं वह कितना बृहद रूप ले लेगा. इसलिए आज मैं इस पर अपनी और से… Read more »
Pankaj Kumar agrawal
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Your information proved wrong. Good not to be biased.

Pankaj Kumar agrawal
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Your information proved wrong.

narendrasinh
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r r sinh kejrival ka paid prachar karne vale hai is liye unko chhod do paid person ki apani soch nahi hoti —vo to jaise uske aaka kehte hai vaisa likhte hai ————-ham to bas itna kahenge desh ke liye jo achha hai use apnana hai —

आर. सिंह
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आ गए न आप अपनी असलियत पर. अभी तक मुझे खरीदने की ताकत तो किसी में नहीं हैं.रही पेड प्रचारक बनने की बात ,तो मुझे आआप क्या दे सकता है?मुझे नमो की पार्टी या कांग्रेस के भी बहुत लोग जानते हैं.वे मेरी वाक्पटुता और तर्क शैली से भी वाकिफ हैं अगर मैं बिकाऊ होता तो .वे मुझे कब का खरीद चुके होते. १८ अक्टूबर को प्रवकता डाट कम से मुझे सम्मानित होने का गौरव प्राप्त हुआ था.उस समय मैंने कहा था, कबीरा खड़ा बाजार में ,लिए लुकाठी हाथ. जो घर जारे आपने चले हमारे साथ. तो मेरा असल रूप वही… Read more »
आर. सिंह
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इस आलेख का शीर्षक है,’वाराणसी का मैदान छोड़ सकते हैं केजरीवाल. अब तो कल अरविन्द केजरीवाल ने नामांकन का पर्चा भर दिया है.उम्मीद तो नहीं है की आपकी भविष्य वाणी सच होगी.उस हालात में क्या यह व्यर्थ का राग अलापना नहीं कहा जाएगा?.

Dr. Ashok Kumar tiwari
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Dr. Ashok Kumar tiwari
Sach hai afvaah nahi failaana chahie – – – yadi reliance jaisi baDi companiyon ko pakad len to any pahale hi Thik ho jayenge —— सब आधुनिक मेघनाद-कुम्भकर्ण- रावण ( मोदी + अम्बानी + कांग्रेस ) का कमाल है ! इन सबने मिलकर पूरे देश को बड़ी चालाकी से अपने वश में कर लिया है !! और जो भी इनकी सच्चाई कहेगा ये उसे बटबाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे !!! केजरीवाल जैसे ईमानदार और आई.ए.एस. कैडर का आदमी इन्हीं की घटिया मानसिकता का शिकार हो रहे हैं । ऐसा मैं इसलिए कह सकता हूँ क्योंकि १४ सालों से… Read more »
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