लेखक परिचय

अनिल अनूप

अनिल अनूप

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार व ब्लॉगर हैं।

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-अनिल अनूप
मसाज पार्लर की राह हमारे युवा वर्ग को कहां तक ले जाएगी इसके बारे में अनुमान लगाना कठिन है. कहीं ये रास्ता उस नर्क का दर्शन कराती है जिसकी कल्पना मात्र से ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं और कहीं इस रास्ते पर चलकर कई लोग अपना सबकुछ खो चुके होते हैं. सांस्कृतिक पतन की ओर बढ़ते देश को ऐसी कुवृत्तियां बहुत तेजी से चोट पहुंचा रही हैं. केवल पैसे और क्षणिक सुख के लिए पूरी पीढ़ी की बर्बादी कहां तक उचित है.
कोई बेरोजगारी की वजह से अपना राज्य छोड़कर दिल्ली आता है. एक दिन एक दैनिक अखबार में विज्ञापन देख कर मसाज पार्लर में काम के लिए संपर्क करता है. उसे काम भी मिल गया लिकिन पहले ही दिन जब वह काम पर गया, एक अधेड़ महिला का पहनावा और व्यवहार देखकर उसके पांव तले जमीन खिसक गई. मसाज के नाम पर वहां उपस्थित महिला ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की. मना करने पर उसने कहा कि पार्लर से इसी काम के तीन हजार रुपए में बात हुई है. ऐसा न किया तो शिकायत करूंगी. बेचारा काम की तलाश में यहां आया था और काम छोड़कर वापस बेरोजगार हो गया. लोग आज पैसे कमाने के लिए किसी भी हद तक गुजर सकते हैं और ऐसे में वेश्यावृत्ति के दलाल भी अपने धंधे के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं. जिस मसाज को आप अपने शरीर के लिए फायदेमंद समझते हैं और जिस पार्लर में आप अगली बार मसाज के लिए जाने की सोच रहे हों, उसके बारे में पहले एक बार जरा तहकीकात कर लीजिए. कहीं ऐसा न हो कि आपको मसाज के बहाने कुछ और मिल जाए.
मसाज पार्लर की आड़ में देह व्यापार आम होता जा रहा l
आज सेक्स का बाजार इतना फैल चुका है कि वह एक रेड लाइट एरिया में सिमटने की जगह पूरे समाज में अपनी पकड़ बना रहा है. यह धंधा अब बड़ी कोठियों, फार्म हाउस और बड़े होटलों तक पहुंच गया है. अब मसाज सेंटर या ब्यूटी पार्लर का इस्तेमाल भी इस धंधे में होने लगा है ताकि इसमें शामिल लोगों की सामाजिक प्रतिष्ठा बरकरार रहे. रेड लाइट एरिया तक जाने में बदनामी का डर रहता है. आज के हाई प्रोफाइल सेक्स बाजार में कोई बदनामी नहीं, क्योंकि ग्राहक को मनचाही जगह पर मनचाहा माल उपलब्ध हो जाता है और किसी को कानों कान खबर तक नहीं होती.
सेक्स तक तो ठीक था लेकिन अब मसाज पार्लर की आड़ में कई गोरखधंधे हो रहे है. अखबारों में ‘हाई प्रोफाइल लेडीज का मसाज करें’ जैसे विज्ञापन पढ़ कर कई बेरोजगर युवक इसके जाल में फंस जाते हैं. यह विज्ञापन कई बार झूठे भी होते हैं जिनमें लोगों को एक अकाउंट में पैसे डालने को कहा जाता है और जैसे ही लोग अकाउंट में पैसे डालते हैं नबंर देने वाला अपना फोन ही बंद कर देता है. इस तरह उस युवक के पैसे तो जाते ही हैं, वह शर्म से पुलिस में शिकायत भी नहीं करता.
हालांकि कुछ मसाज के विज्ञापन सच्चे भी होते हैं मतलब जो लड़कियों के दलाल होते हैं. पहले यह ग्राहक को एडवांस जमा कराने के लिए कहते हैं फिर उन्हें ग्राहक की मनपसंद जगह पर लडकियां भिजवा देते हैं. यह देह-व्यापार का नया रुप है, जहां आपको मसाज की जगह सेक्स मिलता है. इस धंधे के इस रुप में न तो पुलिस का डर रहता है और न ही अन्य खतरे.
आज का बेरोजगार युवा पैसा कमाने के नए और आसान रास्ते ढ़ूंढ़ता है और ऐसे में जब इस तरह की नौकरी मिलती है जहां मजे के साथ पैसा भी मिले तो वह इस काम को अपना प्रोफेशन बनाने में गुरेज नहीं करता. यह एक प्रकार की पुरुष वेश्यावृत्ति भी होती है यानी मसाज पार्लर की आड़ में जिगोलो सेवा.
इन फुल बॉडी मसाज पार्लरों का कोई स्थाई पता नहीं होता. विज्ञापन में भी मात्र नंबर ही दिए होते हैं. इनसे संपर्क करने का जरिया मात्र मोबाइल नंबर ही होता है. अगर आपको काम मिल भी जाता है तब भी आपसे इनके मालिक सामने नही मिलेंगे.
ऐसे रैकेटों के पास एक-दो नहीं, दर्जनों नंबर होते हैं, लेकिन बैंक का खाता एक ही है. ये एक नंबर को एक दिन ही काम में लाते हैं, जितने लोग फंसते हैं, उनसे ठगी कर ली जाती है और भविष्य के लिए नंबर बंद कर दिया जाता है. ठगी के शिकार जब भी उन्हें काल करेंगे तो नंबर स्विच आफ आएगा. बैंक एकाउंट भी बाहर का होता है. ऐसे में पुलिस भी उन्हें पकड़ नहीं पाती.
ऐसे मसाज पार्लर में काम करने वाले लोग वासना की पूर्ति के एक साधन मात्र होते हैं. पुरुष और स्त्री दोनों ही वेश्या होते हैं. ऐसे काम में पैसे तो मिलते हैं लेकिन इज्जत और आत्मसम्मान कभी नहीं मिलता. इसके साथ ही ऐसे पार्लर में जिस तरह के ग्राहक देते हैं उनके साथ शारीरिक संबंध बनाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है. एड्स और अन्य बीमारियों का खतरा हमेशा बना रहता है और पकड़े जाने पर जेल अलग से.
भारतीय समाज की हमेशा से ही यह खासियत रही है कि यहां पुरुषों को महिलाओं से ज्यादा शक्तिशाली और उनसे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होने का सौभाग्य प्राप्त करता आया है. यूं तो प्रकृति ने पहले से ही महिलाओं को पुरुषों की अपेक्षा शारीरिक रूप से कमजोर बनाया है लेकिन सामाजिक और पारिवारिक क्षेत्र में उन्हें पुरुषों की तुलना में किस कदर कमजोर बना दिया गया है इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जहां कहीं भी किसी महिला पर अत्याचार होता है उसका कारण प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में पुरुष ही होता है.
पारिवारिक क्षेत्र में देखें तो विवाह से पहले उसे अपने पिता और भाई के सामने सिर झुका कर रहना पड़ता है और विवाह के पश्चात पति की आज्ञा मानना और ससुरालवालों की सेवा करना ही उसका एकमात्र धर्म रह जाता है. वहीं जब सामाजिक क्षेत्र पर नजर डाली जाए तो हालात इससे भी कहीं ज्यादा कष्टकारी नजर आते हैं. बलात्कार, यौन शोषण, शारीरिक हिंसा, आदि कुछ ऐसे बेहद जघन्य अपराध है जो पुरुष द्वारा महिलाओं के प्रति किए जाते हैं. जिसके परिणामस्वरूप आज की तारीख में कोई भी महिला, फिर वे कोई बड़ी सिलेब्रिटी हो या फिर एक आम महिला, शायद अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित ना हो.
दामिनी कह लीजिए, निर्भया कह लीजिए या फिर गुड़िया, एक आम लड़की समाज में मौजूद पुरुष रूपी भेड़िए की शिकार बनती ही आई है लेकिन बड़ी-बड़ी कंपनियों में कार्यरत पढ़ी-लिखी महिलाएं और चकाचौंध से भरी माया नगरी में अपनी अदाओं के जलवे बिखेरने वाली महिलाएं भी पुरुषों के चंगुल से खुद को पूरी तरह सुरक्षित नहीं पाती हैं. भले ही हम इस बात पर यकीन ना करें कि बड़ी-बड़ी हस्तियां भी शारीरिक शोषण का शिकार होती हैं लेकिन लोकप्रिय सिने तारिका चित्रांगदा सिंह का कहना है कि जहां भी पुरुषों का वर्चस्व होगा वहां महिलाओं के साथ यौन शोषण जैसी बातें भी जरूर होंगी. अब सोचने वाली बात यह है कि भारत में ऐसा क्षेत्र कौनसा है जहां पुरुषों का रसूख नहीं है? क्योंकि राजनीति, सिनेमा, पत्रकारिता, शिक्षा आदि बड़े क्षेत्रों में पुरुषों को ही महत्वपूर्ण भूमिका में देखा जाता है. ऐसे हालातों में कहां और कब तक महिलाएं सुरक्षित हैं इसका जवाब देना शायद किसी के लिए भी मुमकिन नहीं है.
लिव-इन संबंध: बदलाव नहीं भटकाव का सूचक
हालिया चर्चित मामला नामी-गिरामी पत्रीका ‘तहलका’ की महिला रिपोर्टर से जुड़ा है जिसने तहलका के एडिटर इन चीफ तरुण तेजपाल पर यौन शोषण का आरोप लगाया है. इस आरोप के चलते तरुण तेजपाल को अपनी इज्जत और कुर्सी से हाथ तो गंवाना पड़ा लेकिन इस अपराध के चलते कानून द्वारा उन्हें सजा कब होगी इस बात पर जिक्र ना ही करें तो सही है. खैर यह पहला ऐसा मामला नहीं है जब नामी-गिरामी लोगों पर महिला सह-कर्मचारी के साथ छेड़खानी या उनका शारीरिक शोषण करने के आरोप लगते रहे हैं. लेकिन अफसोस पैसे और पॉवर के बल पर ये बड़े लोग अपने अपराध से बचते आए हैं और इसमें कोई बड़ी बात भी नहीं है कि वे आगे भी बचते रहें.
स्कूल, कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चे अपनी एक्स्ट्रा पॉकेट मनी के लिए, नशे के शिकार लोग अपनी लत पूरी करने के लिए या फिर गरीबी से त्रस्त लोग चोरी-चकारी जैसे धंधे में धसते चले जाते हैं वहीं कुछ लोग अपनी अनैतिक इच्छाओं की पूर्ति के लिए गलत काम करने शुरु कर देते हैं. आपने कई बार तो ये भी सुना होगा कि दिन में अच्छा भला इंसान दिखने वाला व्यक्ति रात के समय हैवान बन जाता है लेकिम जिस खबर से हम आपको रुबरू करवाने जा रहे हैं वैसी घटना से आपका सामना कभी ना हुआ हो.
बंगलूरु पुलिस ने एक ऐसे चोर को पकड़ा है जो दिन में तो एक नामी-गिरामी एमएनसी (बहुराष्ट्रीय कंपनी) में मैनेजर के पद पर काम करता है और रात होते ही चेन स्नैचर बनकर राह चलते लोगों को लूटता है.
आरुषि हत्याकांड: दोषी तलवार दंपत्ति नहीं हालात थे!!
एमबीए की डिग्री प्राप्त साइकेत गूइन दिन में तो एक जानी-मानी बहुराष्ट्रीय कंपनी में ऑपरेशन एनालिस्ट डेवलेपमेंट मैनेजर के तौर पर काम करता था लेकिन रात होते-होते वह ऐसी बाइक गैंग का सदस्य बन जाता था जो राह चलते लोगों के गले से चेन खींच लेते हैं. साइकेत गुइन अपने 20 वर्षीय दोस्त सोनक दत्ता के साथ मिलकर बंगलुरु की गलियों में आतंक मचाते थे. पुलिस की मानें तो पिछले एक साल से यह दोनों चेन-स्नैचिंग जैसे धंधा कर रहे थे और इस एक साल में शहर में हुई चेन-स्नैचिंग की वारदातों में से 40 घटनाओं में इनका हाथ था.
साइकेत और सोनक के बारे में सुनकर अगर आपको ये लग रहा है कि हालातों की वजह से दोनों चोरी-चक्कारी जैसे धंधे में लिप्त ओ गए होंगे लेकिन शायद आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि 27 वर्षीय साइकेत और 27 वर्षीय सोनक दोनों ही काफी समृद्ध परिवार से आते हैं जिन्हें ना तो पैसे की दिक्कत है और ना ही इज्जत और सम्मान पाने में ही उनके परिवार पीछे नहीं है. सोनक दत्ता और साइकेत गुइन दोनों एक पार्टी में एक दूसरे से मिले और दोनों ने एक बाइक गैंग बनाकर चेन स्नैचिंग का धंधा करने की ठान ली. अब इस निर्णय के पीछे का जो कारण था वह वाकई ये सोचने के लिए मजबूर कर देगा कि हमारी युवा पीढ़ी आखिर किस दिशा में जा रही है?
जब कमजोरी ही ताकत बन जाए तो कोई हरा नहीं सकता l
उल्लेखनीय है कि मात्र रोचकता का अनुभव करने के लिए, जिसे आजकल एडवेंचर के नाम से ज्यादा जाना जाता है, इन दोनों ने कुछ खतरनाक काम करने का निश्च्य किया था जिसके परिणाम के बारे में शायद उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा.
जिस युवा पीढ़ी को हम भारत का भविष्य समझते हैं वह दर-बदर भटकते हुए आज ऐसे मुकाम पर जा पहुंचे हैं जहां आगे का रास्ता सिर्फ और सिफ अंधेरों से ही घिरा हुआ है. शौक पूरा करने के नाम पर और जीवन को थोड़ा रोचक बनाने के लिए युवा अपने भविष्य का सौदा करते जा रहे हैं. कुछ समय के मजे के लिए वह अपना पूरा जीवन दांव पर लगाने से भी गुरेज नहीं करते. हर चीज में मजे की तलाश करते हुए वे हर गंभीर चीज को शौकिया तरीके से स्वीकार करने लगे हैं. नाजाने क्यों आज की पीढ़ी के बीच एक अजीब सी जिज्ञासा विकसित हो गई है, एक अजीब सा शौक पैदा हो गया है जिसे पूरा करने के लिए वह किसी भी हद तक जा सकते हैं. कुछ खतरनाक करने का उनका शगल इतना बढ़ चुका है जिसकी कोई अति नहीं है.
आजाद भारत: हकीकत कम अफसाने ज्यादा
शारीरिक संबंधों से लेकर ड्रग्स की लत तक वे लगभग सभी तरीके आजमाते हैं ताकि किसी तरह तो वह खुद को संतुष्ट कर सके. हर क्षेत्र में कुछ अलग करने की उनकी महत्वाकांक्षा ने आज उन्हें एक ऐसे दोराहे पर ले आई है जहां एक तरफ कुआं है और एक तरफ खाई और जिस तलवार की धार पर वो चल रहे हैं उसपर जख्मों के अलावा उन्हें कुछ और हासिल भी नहीं होने वाला.
-अनिल अनूप

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