लेखक परिचय

प्रवक्‍ता ब्यूरो

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ये चंद घड़िया ही तो है,
जो हमें अनगिनत खुशियाँ देती हैं।
छोटी-छोटी बातें ही
हमें यादगार पल देती है ।
चलती तेज हवाए
देती हमे मंजिल का पता
वक्त चला जा रहा
उम्मीद का सहारा दिए ।
अपनों को खुश देखना ,
यही आस लगा
तुम चलो या हम चले
“दोनों” रास्ते पर चले….
साथ मिलकर चलने से
जिन्दगी का मजा आ रहा।।

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