लेखक परिचय

अतुल तारे

अतुल तारे

सहज-सरल स्वभाव व्यक्तित्व रखने वाले अतुल तारे 24 वर्षो से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। आपके राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय और समसामायिक विषयों पर अभी भी 1000 से अधिक आलेखों का प्रकाशन हो चुका है। राष्ट्रवादी सोच और विचार से अनुप्रमाणित श्री तारे की पत्रकारिता का प्रारंभ दैनिक स्वदेश, ग्वालियर से सन् 1988 में हुई। वर्तमान मे आप स्वदेश ग्वालियर समूह के समूह संपादक हैं। आपके द्वारा लिखित पुस्तक "विमर्श" प्रकाशित हो चुकी है। हिन्दी के अतिरिक्त अंग्रेजी व मराठी भाषा पर समान अधिकार, जर्नालिस्ट यूनियन ऑफ मध्यप्रदेश के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष, महाराजा मानसिंह तोमर संगीत महाविद्यालय के पूर्व कार्यकारी परिषद् सदस्य रहे श्री तारे को गत वर्ष मध्यप्रदेश शासन ने प्रदेशस्तरीय पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित किया है। इसी तरह श्री तारे के पत्रकारिता क्षेत्र में योगदान को देखते हुए उत्तरप्रदेश के राज्यपाल ने भी सम्मानित किया है।

Posted On by &filed under विविधा.


-अतुल तारे-
modi1-300x182

कौन बनेगा करोड़पति की आठवीं प्रस्तुति का एक विज्ञापन इन दिनों बेहद चर्चित है और एक सटीक संदेश भी देता है। विज्ञापन में महानायक एवं शो के एंकर अमिताभ बच्चन प्रतिभागी पूर्णिमा से एक प्रश्न पूछते हैं। प्रश्न है कोहिमा किस देश में है। एक बेहद आसान से सवाल पर प्रतिभागी ऑडियंस पोल लेती है। सौ प्रतिशत जवाब आता है ‘इंडिया’ अमिताभ प्रश्न करते हैं कि इतने आसान से सवाल पर वह लाइफ लाइन क्यों लेती हैं, क्या वे भी नहीं जानती कि कोहिमा भारत में है जबकि वह स्वयं वहीं से है। जवाब बेहद मार्मिक है, वह कहती है जानते सभी हैं, मानते कितने हैं।
क्या यह देश का आज कड़वा सच नहीं है। आजादी के 67 साल बाद आज भी पूर्वोत्तर भारत के निवासी जब दिल्ली आते हैं तो क्यों कहते हैं कि वे इंडिया जा रहे हैं। या फिर क्यों शेष भारत के निवासी उन्हें कभी चीनी, कभी नेपाली समझने की अक्षम्य भूल करते हैं? जो प्रदेश देश को सबसे पहले सूरज की किरण दिखाता है, आखिर क्यों शेष भारत के आत्मीय स्पर्श से आज भी वंचित हैं? यही वजह है कि आज पूर्वोत्तर भारत का अधिकांश क्षेत्र अलगाववाद की चपेट में हैं। जनसंख्या का असंतुलन तेजी से बढ़ रहा है। शरणार्थियों की शकल में घुसपैठिए पांव पसार रहे हैं। चीन, बांग्लादेश की इस क्षेत्र में हरकतें बढ़ती जा रही हैं। पर बावजूद इसके देशवासी यह जानते हैं, नेतृत्व यह जानता है कि यह क्षेत्र भारत का हिस्सा है पर व्यवहार प्रतिभागी के उत्तर की तरह है कि मानते नहीं हैं ये हमारे ही देश का हिस्सा है। ऐसा नहीं है कि राष्ट्रघाती शक्तियों के इरादों को पहचाना नहीं गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित देश की राष्ट्रवादी शक्तियों ने प्राणों की बाजी लगाकर यहां हमेशा अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई है, जिसके परिणाम सामने हैं कि आज भी यह क्षेत्र राष्ट्रघाती शक्तियों को मुंहतोड़ जवाब दे रहा है। राजनीतिक स्तर पर भी इसके प्रयास भाजपा ने प्रारंभ किए। अपने अध्यक्षीय कार्यकाल में नितिन गडकरी ने एक प्रकोष्ठ बनाया पूर्वोत्तर भारत सम्पर्क प्रकोष्ठ जो देश भर में (पूर्वोत्तर भारत सहित) क्षेत्र के निवासियों के हितों के लिए काम कर रहा है। देश भर में शिक्षा या व्यवसायगत कारणों से रह रहे पूर्वोत्तर भारत के निवासी भेदभाव के शिकार न हों और वे भी अपनी जड़ें भारत में ही महसूस करें, यह प्रयास यह प्रकोष्ठ करता है। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस प्रयास को और गति दी है। यह पहला मौका है कि देश का गृह राज्यमंत्री किरण रिजूजू है जो स्वयं अरूणाचल प्रदेश से आते हैं। इतना ही नहीं, गृह राज्यमंत्री वीके सिंह जो कि हरियाणा से आते हैं को पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को अतिरिक्त जवाबदारी दी गई है, यह एक ऐतिहासिक निर्णय है और इसके संदेश स्पष्ट हैं।

मोदी सरकार के बजट में पूर्वोत्तर भारत के लिए अरूण प्रभा टीवी चैनल की शुरूआत करना एक और सराहनीय सांकेतिक निर्णय है। यही नहीं, बजट में पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए अतिरिक्त बजटीय प्रावधान दर्शाता है कि दिल्ली में बैठी सरकार का दिल पूरे देश के लिए धड़कता है। वित्त मंत्री अरूण जेटली का बजट देश के आर्थिक विकास को तो गति देगा ही पर यह बजट देश की सामूहिक भावना का सही प्रगटीकरण भी है। इसलिए ये बजट पर जमावेशी एवं सर्वस्पर्शी जाना जा सकता है। कश्मीर से विस्थापित पंडितों के पुनर्वास के लिए 500 करोड़ है तो मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए भी 100 करोड़ है। देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में नई रेल लाइनों के लिए 100 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान दूरगामी परिणाम देने वाला है। सुदूर मणिपुर क्षेत्र में खेलों के लिए 100 करोड़ का प्रावधान केन्द्र की प्राथमिकताओं एवं संवेदनशीलता को दर्शाता है, वहीं समूचे देश की आस्था का प्रगटीकरण नमामि गंगे की योजना में 2037 करोड़ का प्रावधान भी है। यही नहीं देश के प्रधानमंत्री ने अपनी पहली विदेश यात्रा पहले भूटान और अब ब्राजील में कर अपनी कूटनीतिक क्षमता का परिचय भी दिया है। परिणाम अमेरिका आज स्वागत के लिए गलीचे बिछा रहा है। तात्पर्य अगर देश का नेतृत्व समूचे देशवासियों में देश के प्रति एक निष्ठा का भाव जाग्रत करने में सफल होता है तो उसके परिणाम सुखद आते ही हैं। प्रशंसा करना होगी। केन्द्र सरकार की उसने इस दिशा में ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि भविष्य में केबीसी की कोई प्रतिभागी ऐसे किसी प्रश्नों के लिए लाइफ लाइन नहीं लेगी।

Leave a Reply

3 Comments on "किस देश में है ‘कोहिमा’ ?"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
आर. सिंह
Guest
नमो सरकार का पूर्वोत्तर सीमा क्षेत्र के राज्यों के लिए उठाया गया कदम सराहनीय है,पर क्या यह कदम हमारे उस प्रवृति को बदलने में सहायक होगा,जो आज भी उन इलाके निवासियों को चीनी या नेपाली मानता है.यह सही है कि कोहिमा भारत का हिस्सा है और अधिकतर लोग यह जानते हैं,पर वहां के निवासियों को जबतक भारतीय नहीं समझेंगे,तब तक कोई भी अनुदान इस समस्या का समाधान नहीं प्रस्तुत कर सकता. ऐसे भी भारत की स्वाधीनता के बाद उन इलाकों में या कश्मीर में पैसे कम नहीं खर्च किये गएँ ,पर भ्रष्टाचार और हमारी संकुचित मनोवृति ने राष्ट्र के लिए… Read more »
Ramesh Sachdeva
Guest

Excellent. Really an article for the whole society. Really I have not words to say something about this because the matter is so nicely represented and commented which is to be shared tharoughly.

डॉ. मधुसूदन
Guest

शासन की राष्ट्रीय दृष्टि सराहनीय है। अतुल जी को आलेख लिखने पर बधाई।

wpDiscuz