लेखक परिचय

शादाब जाफर 'शादाब'

शादाब जाफर 'शादाब'

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार हैं।

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शादाब जफर ‘शादाब’

के भाजपा में शामिल होने पर वबाल मच गया। वबाल भी ऐसा मचा की भाजपा के कद्दावर नेताओ को अपनी छवि के साथ साथ पार्टी की छवि बचानी मुश्किल हो गई। कुशवाहा के भाजपा में शामिल होते ही सारे राजनीतिक दलो ने आसमान सर पर उठा लिया, ऐसी हाय तौबा मचाई की आखिर कार मन मसोसकर भाजपा को कुशवाहा के रूप में मिले वोटो के जैकपोट को बाहर का रास्ता दिखाना ही पडा। भाजपा पर देश के सारे राजनीतिक दल एक सुर में आग बबूला हो कर चिल्लाने लगे कुशवाहा दागी है भ्रष्ट है, लेकिन अपने अपने गिरेबानो में आज कोई भी पार्टी झांकना नही चाहती क्यो?, दरअसल आज देश की सियासी पार्टियो की सच्चाई ये है हर पार्टी दागियो से भरी है, देश की ज्यादातर राजनीतिक पार्टियो में इस वक्त दागियो की भरमार है। दागियो से सब का दामन दागदार है। इस सब के बावजूद सत्ता पाने के लालच में कोई ये देखने को तैयार नही की ये दलबदलू है, गुण्डा है, भ्रष्टाचारी है, बलात्कारी है, बस सीट निकलनी चाहिये चाहे किसी प्रकार से भी निकले। आज इस होड़ में कांग्रेस, पीछे है न सपा, न भाजपा, न पीस पार्टी, न महान दल और न बसपा।

वाराणसी में अजय राय को बच्चा बच्चा बाहुबली के रूप में जानता है। बाहुबली क्या होता है मुझे बताने की जरूरत नही, ये साहब पहले भाजपा के बहुत करीब थे जब वहा दाल नही गली और लोकसभा में टिकट नही मिला तो सपा में आ गये और अब इस बार वाराणसी की पिंडरा सीट से कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार है। कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल नंदी पर हमले के आरोपी विजय मिश्रा को सपा ने भदोही सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है। मित्र सेन यादव को हाल ही में अदालत से फर्जीवाडे के एक मामले में सजा हुई है। वही इन का बेटा आनंद सेन यादव एक दलित छात्रा के साथ बलात्कार व हत्या के मामले में उम्र कैद की सजा काट रहा है। इस सब के बावजूद समाजवादी पार्टी ने मित्र सेन यादव को अपनी पार्टी से उम्मीदवार बनाया है। बाहुबली गुड्डू पंडित और विनोद सिंह उर्फ पंडित सिंह भी सपा के ही टिकट से चुनाव लड रहे है। मुहम्म्द मुस्लिम, सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली की तिलाई विधानसभा सीट से उम्मीदवार है। मुहम्मद मुस्लिम के खिलाफ मारपीट, बलवा जैसे कई अपराधिक मामले थाने में दर्ज है। अभिजीत सांगा, कानपुर के बिठूर से उम्मीदवार अभिजीत सांगा पिछले दिनो राहुल गांधी के मंच पर भी नजर आये थे। इन के खिलाफ भी कई संगीन मामले विभिन्न थानो में दर्ज है। बिठूर के लोगो को सांगा की तारीफ सुनाने की भी जरूरत नही क्यो की सांगा की दबंगई के किस्से घर में सुनाई और बताये जाते है। कांग्रेस ने इस चुनाव में लगभग ड़ेढ दर्जन के करीब दागियो को टिकट देकर उम्मीदवार बनाया है। इस सब के बावजूद कांग्रेस और समाजवादी पार्टी अपने दामन को दागदार मानने को कतई तैयार नही।

बिहार को भ्रष्टाचार और अपराध मुक्त करने का दावा करने वाले नीतीश कुमार भी कहा पीछे रहने वाले है। नीतीश ने बृजेश सौरभ और मनवीर तेवतिया को अपनी पार्टी से उम्मीदवार बनाया है। इन दोनो के खिलाफ कई अपराधिक मामले थानो में दर्ज है। इस के अलावा आरएलडी, पीस पार्टी और अपना दल तो मानो बाहुबलियो और दागियो को अपनी अपनी पार्टी से उम्मीदवार बनाने के लिये अतुर है। आरएलडी ने जहां हाजी याकूब कुरैशी और शाहनवाज राणा जैसे दागियो को पार्टी में शामिल कर लिया है, वही पीस पार्टी अब बाहुबली अखिलेश सिंह व बब्लू के अलावा अपराधिक पृष्टभूमि के मोनू सिंह को उम्मीदवार बना चुकी है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी का घर जलाने के आरोपी और लखनऊ के चर्चित सेजय झुनझुनावसला अपहरण कांड में आरोपी रहे जितेंद्र सिह बब्लू हालाकि पहले बसपा के साथ पर अब वो वहा से निष्कासित हो चुके है और लखनऊ की जेल में बंद है। शायद इसी उपलब्धि पर पीस पार्टी ने उन्हे फैजाबाद जिले की बीकापुर सीट से अपना प्रत्याशी बनाया है। अपना दल ने तो माफिया अतीक और कुख्यात ड़ॉन मुन्ना बजरंगी को ही टिकट दे दिया है। भाजपा विधायक कृश्णानंद राय हत्या कांड से चर्चा में आये अब तिहाड़ जेल में बंद प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी भी अपने गृह नगर जनपद जौनपुर की मड़ियाहॅू सीट से चुनाव लडने के लिये अतुर है। वर्श 2009 में मुम्बई में गिरफ्तार हुए गैंगस्टर मुन्ना बजरंगी पर मकोका समेत कई मामले चल रहे है। बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड समेत कई मामलो में चर्चा में आए अपना दल के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व सांसद अतीक अहमद इस बार भी अपना दल से ही इलाहाबाद पश्चिम सीट से प्रत्याशी है। वही अतीक के साथ ही उन्नाव जेल में बंद उन के भाई अशरफ भी प्रतापगढ की एक सीट से टिकट पाने और चुनाव लडने की जुगत में है। 1992 में मुम्बई में जेजे हास्पीटल कांड में दाऊद के साले के हत्यारे शैलेश हलड़दकर को मार कर चर्चा में आए माफिया बृजेश सिंह पर एक समय पॉच लाख का इनाम था। 2008 में उडीसा से हुई रहस्यमय गिरफ्तारी के बाद अब उसने भी निर्दोष लोगो के खून से सने कपडे उतार कर खद्दर पहनकर राजनीति कर राह पकड ली है। जब की इस पर सन् 1994 में आजमगढ जिले के पकडी में एक साथ 13 लोगो की हत्या और पुलिस की वर्दी में विरेंद्र सिंह टाटा की हत्या का भी आरोप है। इस वक्त अहमदाबाद की जेल में बंद बृजेश इस बार चंदौली की सैय्यद राजा सीट से प्रगतिशील मानव समाज पार्टी से विधायकी के लिये उम्मीदवार है। जेल में बंद बृजेश के लिये चुनाव लडना कोई मुश्किल काम नही क्यो की बृजेश के भाई चुलबुल सिंह पिछले दिनो भाजपा से एमएलसी रह चुके है। ये फैहरिस्त यही खत्म नही होती भाजपा, सपा, कांग्रेस सहित देश के तमाम राजनीतिक दलो का दामन ऐसे और इन से भी बडे बडे अपराधियो और दागियो से दागदार है जिन के बारे में अगर लिखा जाये तो अगले चुनाव की तारीख आ जायेगी।

सोचने वाली बात ये है कि आखिर क्यो दागियो और अपराधियो से राजनीतिक दलो का मोह भंग नही हो रहा। क्या इस सब में राजनीतिक दल ही दोषी है या हम लोग भी, इस पर भी बहुत ही गहराई से बहुत जल्द मंथन होना चाहिये। आज मुख्य निर्वाचन आयोग भविष्य में होने वाले चुनावो पर सख्त बहुत सख्त है, सख्त से सख्त कदम उठा रहा है। पिछले दिनो मुख्य निर्वाचन अधिकारी एम वाई कंरैशी ने अपराधियो के चुनाव लडने पर भी कानून बनाने की ओर इशारा किया था। मगर इस सब के बावजूद लगता है इस बार भी नोट तंत्र और बंदूक तंत्र चुनावो पर पिछले चुनावो की तरह ही हावी रहेगा इन अपराधिक लोगो की उम्मीदवारी और देश में रोज रोज पुलिस द्वारा पकडे जा रहे करोडो रूपयो की खेंप तो ये ही इशरा करती है। दरअसल वजह बिल्कुल साफ है, हर किसी पार्टी को सत्ता चाहिये वो किसी बाहुबली के सहारे मिले या दागी के सहारे इस से क्या फर्क पडता है जनता दो चार दिन बोलेगी और चुप हो जायेगी। कोई ईमानदार पुराना निष्ठावान कार्यकर्ता यदि यदा कदा पार्टी हाईकमान नेता जी से ये पूछता है कि हुजूर में तो बीस साल से पार्टी की सेवा तन मन से कर रहा हॅू तो मुझे टिकट क्यो नही तो उस बेचारे को जवाब मिलता है तुम अगर बीस या तीस साल से पार्टी की सेवा कर रहे हो तो ये माननीय भावी विधायक जी तीस लाख से पार्टी की सेवा कर रहें है। ऐसे में आने वाले दिनो में देश और इन चुनाव का क्या का भविष्य रह जायेगा ये तो वक्त ही बतायेगा।

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