लेखक परिचय

प्रवक्‍ता ब्यूरो

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क्यों रें अज्जू!!!
क्या हो रिया हैं आजकल ।
अज्जू- कुछ नहीं हो रिया यार पीके,बस फेसबुकिया बन एक दुसरे को गरिया
रहै हैं । पीके- गरिया रहै हो??किसे गरिया रहै हो बे! तुम कब से गरियाना
शुरूकर दिये हो!! अरे कुछ नहीं भाई बस ऐसे ही अब जकरबर्ग ने फेसबुकिया
बनाई है तो बकैती कर लेते है हम भी थोड़ी बहुत। अच्छा !! का बकैती कर रहै
हो बे!! हमे भी इत्तिला करो जरा। अरे!कुछौ खास नहीं भाई बस यही की तबेल
की बला बंदर के सिर लग है । मतलब!! अरे!मतबल ये कि तु डाल-डाल और मै
पात-पात वाली कहानी चल रही है देश मे तो बस उसी पे बैठ कर बकैती कर रहै
है। ओह! सही है भिया करो जरूरीहै आजकल । हाँ ! पीके- और बताओ बे गाँव के
क्या हाल हैं । अज्जू- कुछ नहीं बस सब ठीक है, ओ रामू काका आज कह रहै थे
कि पिछले बरस मेरी 4बीघा सोयाबीन खराब हो गई थी तो साला विधायकवा कह रहा
था पैसा मिलेगा । तो क्या हूआ ?मिला पैसा! अरे!! काहे का पैसा यार पीके ऊ
रामू काका सिरियस ले लिया विधायकवा की बात को, उनने देखा ही नही की ऐसा
बोलते समय ऊनने आख भी तो मारी थी। अरे!हाँ समझाओ उन्हें यार!! और बताओ
सुना है डिजिटल हो रहा है अपना गाँव भी ,का सही बात है का। अरे हाँ ऊ
पेपर मे हम भी पढै थे कि कौनो डिजिटल विजिटल की बात चल रही है अभी बहुत
दिनो से का है ई?? अरे कुछौ नहीं हमने भी सुना है कि अब अपने गाँव मे भी
सबके पास फोनवा आ जायेगा?? फोन आ जायेगा??? का सरकार फोन बाँट रही है सब
को??? अरे! नहीं भाया जूमले बाट रही है ऊ विधायकवा के जैसे। ओह!! हाँ ।।
और बता सड़क वडक बनी गाँव मे कि बस? अरे!!काहे कि सड़क भाई ,सब काका बाबा
मिलके पत्थर से रस्ता सही किये है। आज ऊ कोई अफसर आया था कह रहा था सर्वे
करना है कौनो टेक्स वेक्स का। तो!! तो का बड़ी गाड़ी से आया था चले
गया।ऊसकी गाड़ी पंचर हो गई मनीषवा के घर सामने तो गाली देते हुये बोला
बुलेट ट्रेन चलने वाली है।।।।।।।।।।
पंकज कसरादे ‘बेखबर ‘


pankaj

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