लेखक परिचय

जयराम 'विप्लव'

जयराम 'विप्लव'

स्वतंत्र उड़ने की चाह, परिवर्तन जीवन का सार, आत्मविश्वास से जीत.... पत्रकारिता पेशा नहीं धर्म है जिनका. यहाँ आने का मकसद केवल सच को कहना, सच चाहे कितना कड़वा क्यूँ न हो ? फिलवक्त, अध्ययन, लेखन और आन्दोलन का कार्य कर रहे हैं ......... http://www.janokti.com/

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laxmi-uraonलगभग डेढ़ साल पहले गुवाहाटी में आदिवासियों की एक रैली के दौरान मीडिया की सुर्खियों में रहने वाली लक्ष्मी ओरांव आजकल फ़िर चर्चा में है। इस बार वजह है कि वो तेजपुर संसदीय क्षेत्र से यूडीएफ की उम्मीदवार हैं। साल भर पहले आसाम की राजधानी मे अपमानित की गई अबला आदिवासी महिला आज राजनीति मे आने के लिए कमर कस कर खड़ी है।एक तरफ़ इस देश में ऐसे लोग भी हैं जो सिस्टम की दुहाई देते हुए वोट देने से भी कतराते हैं तो वहीँ दूसरी ओर लक्ष्मी जैसी आत्मविश्वासी और हिम्मती महिला भी, जो तथाकथित सभ्य समाज को उसके घिनोने चेहरे का आइयाना दिखानेको तैयार है । लक्ष्मी कहती हैं -” चुनाव भले न जीते लेकिन मैदान में उतर कर वह शोषण के ख़िलाफ़ लोगों में संदेश देना चाहती है। “मार्टिन लूथर किंग को अपना आदर्श मानने वाली लक्ष्मी का यह एक कदम नारी को अबला बताने वालों को करा जवाब और लाखों शोषितों के लिए प्रेरणा का सबब बना हुआ है। महिला उत्थान के लिए काम करने वाले समाजसेवी व अधिवक्ता सुकुमार कहते हैं – “नारी विमर्श के इस ज़माने मे नारी की ऐसी दशा है कि जिसका जिक्र करते हुए ख़ुद पर शर्म आने लगती है । आज पढ़े लिखे भारतीय जन मानस की मनोविकृति की शिकार महिलाये आम तौर पर खामोशी से चुप चाप सब कुछ सहने की आदी हो गई है। हर दिन हजारों बलात्कार, हजारों दहेज़ हत्या और मारपीट, हजारों छेड़छाड़ की घटनाएँ होती हैं पर उनमे से कितनी पीडिता विरोध मे आवाज उठाती है ? सामान्य जनों की बात छोडिये समाज को जगाने का ढिंढोरा पीटने वाले बुद्धिजीवी वर्ग भी अब किताबों एवं समाचारपत्र- पत्रिकाओं तक सिमट गया है। कहने को तो नारी उत्थान के पुरोधा लोग इस दिशा मे काम कर रहे हैं लेंकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। बड़ी बड़ी पार्टियो मे तथा बंद कमरों मे लम्बी-लम्बी डींगे हांकने से परिस्थिती नही बदल जाती है । कुल मिला कर आज के भारत मे नारी दुर्दशा का दर्शन और इसके परिणामो के प्रति उदासीनता सर्वत्र दृष्टिगत होती है । ऐसे प्रतिकूल माहोल मे लक्ष्मी ओरांग का राजनीति मे आने का फ़ैसला सराहनीय कदम माना जाएगा। आसाम की ये वीरांगना स्त्री समस्त भारतीय महिलाओ के लिए आदर्श है।”

फिलवक्त , लक्ष्मी मीडिया हाइप से दूर अपने क्षेत्र के चाय बागानों में आदिवासिओं को एकजुट करने का अभियान चला रही है। १२ लाख मतदाताओं वाली सीट में से ४ लाख लोग इन्ही चाय बागानों में रहते हैं। मंच-माला -माइक के तामझाम से अलग न तो लक्ष्मी भाषण देने की भी जरुरत नही समझती और न ही वहां के लोग। लक्ष्मी के साथ घटी घटना ही लोगों को काफी लगती है । पूरे देश भर में चुनाव प्रचार और जनसंपर्क के लिए उम्मीदवारों द्वारा करोड़ों रूपये खर्च किए जाते हैं। ऐसे में लक्ष्मी का सादा प्रचार कितना सफल होता है यह देखना बाकी है।

– जयराम ‘विप्लव’
मो: 09210907050
ईमेल: jay.choudhary16@gmail.com

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11 Comments on "शोषितों के लिए प्रेरणा है लक्ष्मी – जयराम ‘विप्लव’"

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Bhaskar Bikram Chetia
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Bhaskar Bikram Chetia
भाई जयराम – आप की लेख को पढ़कर अच्छा लगा | भारत की बर्तमान समाज में भी नारी की स्थान और हालत में काफी प्रगति होना अब भी बाकी हैं | मैं आसाम से वास्ता रखता हूँ, इसीलिए आप के लेख से जुरे कुछ वास्तविक घटनाओ और पहलूओ के बारे में मै अपनी जानकारी और राइ देना चाहूँगा : १) सबसे पहले मैं स्पस्ट करना चाहूँगा की लक्ष्मी के साथ जो हुवा वोह गलत हुआ | उसका कोई भी असमिया इंसान समर्थन नहीं करेगा | पर : २) उस दिन लक्ष्मी की हालत का जिम्मेदार गुवाहाटी के लोग नहीं थे… Read more »
shailesh sharma
Guest

jeet tumhera kdmo mea hai

shailesh sharma
Guest

ekta mea hi taakat hai,ham sab tumharea saath hai.

nrendra nirmal
Guest

जब कभी आईना देखता हूँ
सिहर उठता हूँ
हर बार एक नया चेहरा
हर बार आईना
एक बिना धार के चाकु से
मेरे व्यक्तित्व का
कुछ न कुछ अंश
तराश ही देता है।
laxmi jee jab apne atit ko bhul kar pratinidhitw karne nikli hain to jeet unke kaDAM CHUMEGI…………..

sagar bhushan dubey
Guest

एक बेचारा सा भ्रम
जम्हूरियत में
एक आम आदमी,
एक अपग से आम आदमी की
लाचारी को परोसता
हर सवाल पर निरुत्तरित रह जाता
सर झुकाये पीठ पर
ढोता नामर्दगी
और पालता
अपने मर्द होने का भ्रम
अपने जिन्दा होने का भ्रम।

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