लेखक परिचय

प्रमोद भार्गव

प्रमोद भार्गव

लेखक प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार है ।

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बलूचिस्तान

बलूचिस्तान

प्रमोद भार्गव

हर वक्त कश्मीर का राग अलपाने वाले पाकिस्तान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से विश्व समुदाय के सामने बेनकाब कर दिया है। प्रधानमंत्री ने जिस कड़े लहजे में पाकिस्तान को सीधा संदेश देने के साथ ही उसके कब्जे वाले कश्मीर, गिलगिट और ब्लूचिस्तान में पाक सेना द्वारा किए जा रहे अमानवीय अत्याचारों का हवाला दिया, उससे यह संकेत मिला है कि भारत सरकार पाक से संबंधित विदेश नीति में नीतिगत बदलाव लाने की तैयारी में है। हालांकि पाक को आईना दिखाने की यह शुरूआत दिल्ली में संपन्न हुई सर्वदलीय बैठक से ही हो गई थी। इस बैठक में मोदी ने जहां पाक अधिकृत कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बताया, वहीं गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सख्त लहजे में कहा कि कश्मीर भारत का हिस्सा है। लिहाजा पाक के साथ इस मसले पर कोई बात नहीं हो सकती। यदि कोई बात होगी तो पीओके को लेकर होगी। इन दोनों बयानों के अगले दिन पीएमओ में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने जम्मू के सांबा में ‘तिरंगा-यात्रा‘ के एक कार्यक्रम में कहा, ‘तिरंगा-यात्रा की वास्तविक सफलता तब होगी, जब हम एक दिन पीओके के कोटली मुजफ्फराबाद में अपना राष्ट्रिय ध्वज फहरा देंगे। दरअसल हमें दुनिया का ध्यान पीओके में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन की ओर आकर्षित करना है।‘ सिलसिलेबार आए इन बयानों से साफ है कि सरकार पाकिस्तान और कश्मीर नीति में बुनियादी बदलाव के मूड में आ गई है। दरअसल यही वह वक्त है, जब पाकिस्तान द्वारा पीओके, ब्लूचिस्तान और सिंध प्रांत में हिंदूओं पर हो रहे अत्याचार के विरोध में लोग सड़कों में उतरे हैं  और वे भारत के खुले समर्थन व सहयोग की मांग कर रहे हैं। गोया, अब भारतीय कूटनीति का तकाजा बनता है कि पाक को उसी के बुने जाल में फांस लिया जाए।

पाक अधिकृत कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताने और ब्लूचिस्तान में मानवाधिकार का उल्लघंन का मानला उठाने पर इन विवादास्पद क्षेत्रों के पीड़ित लोग भारत की ओर से आशान्वित हुए हैं। इन बयानों ने इन क्षेत्रों में फूट रही विद्रोह की आग में घी डालने का काम किया है। राजनीतिक अधिकारों की मांग को नई ताकत मिली है। पीओके में 500 से भी ज्यादा युवा पाक के खिलाफ सड़कों पर उतार आए और पाकिस्तानी सेना को गिलगिट छोड़ने की बात कही। एक समाचार एजेंसी द्वारा जारी वीडियो में प्रदर्षनकारी पाक के विरुद्ध पूरे जोष में नारे लगाते दिख रहे हैं। उनकी मांग है कि पाक सेना जल्द से जल्द ब्लूचिस्तान की धरती खाली करे, ताकि हम स्वतंत्र भारत में आजादी के साथ रह सकें। ब्लूच महिला कार्यकर्ता नायला कादरी और हम्माल हैदर ब्लूच ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पीओके को भारत का अटूट हिस्सा बताने पर बधाई दी है। साथ ही उन्होंने यह उम्मीद भी जताई है कि मोदी इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में उठाएंगे और पीओके और ब्लूचिस्तान को बांग्लादेश की तरह पाकिस्तान से मुक्त कराएंगे।

गिलगित और ब्लूचिस्तान पर पाक ने 17 मार्च 1947 को सेना के बूते अवैध कब्जा कर लिया था, तभी से यहां राजनीतिक अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक आवाज उठाने वाले लोगों पर दमन और अत्याचार आज तक जारी है। हाल ही में पीओके क्षेत्र में लोकतांत्रिक उदारवादी मुखौटा सामने लाने के मकसद से पाक ने चुनाव कराए थे। लेकिन बड़ी मात्रा में सेना और प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी मुस्लिम लीग ने धांधली की। उसने 41 में से 32 सीटें हथिया लीं। तभी से यहां विद्रोह की आग सुलग रही है। इस आग को अब हवा देने का सही काम मोदी ने कर दिया है। यह आग अस्तोर, दियामिर और हुनजा समेत उन सब इलाकों  में सुलग रही है, जो शिया बहुल हैं। सुन्नी बहुल पाकिस्तान में शिया और अहमदिया मुस्लिमों समेत सभी धार्मिक अल्पसंख्यक प्रताड़ित किए जा रहे हैं। अहमदिया मुस्लिमों के साथ तो पाक के मुस्लिम समाज और हुकूमत ने भी ज्यादती बरती है। 1947 में उन्हें गैर मुस्लिम घोषित कर दिया गया था। तब से वे पाकिस्तान में न केवल बेगाने हैं, बल्कि मजहबी चरमपंथियों के निशाने पर भी हैं। मई 2010 में लाहौर में एक साथ दो अहमदी मस्जिदों पर कातिलाना हमला बोलकर करीब एक सौ निरीह लोगों की हत्या कर दी गई थी।

पीओके और ब्लूचिस्तान पाक के लिए बहिस्कृत क्षेत्र हैं। पीओके की जमीन का इस्तेमाल वह, जहां भारत के खिलाफ शिविर लगाकर गरीब व लाचार मुस्लिम किशोरों को आतंकवादी बनाने का प्रशिक्षण दे रहा है, वहीं ब्लूचिस्तान की भूमि से खनिज व तेल का दोहन कर अपनी आर्थिक स्थिति बहाल किए हुए है। अकेले मुजफ्फराबाद में 62 आतंकी शिविर हैं। यहां के लोगों पर हमेशा पुलिसिया हथकंडे जारी रहते हैं। यहां महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं है। गरीब महिलाओं को जबरन वैष्यावृत्ति के धंधों में धकेल दिया जाता है। 50 फीसदी नौजवानों के पास रोजगार नहीं हैं। 40 फीसदी आबादी गरीबी रेखा के नीचे है। 88 प्रतिशत क्षेत्र में पहुंच मार्ग नहीं हैं। बावजूद पाकिस्तान पिछले 70 साल से यहां के लोगों का बेरहमी से खून चूसने में लगा है। जो व्यक्ति अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाता है, उसे सेना, पुलिस या फिर आइएसआई उठा ले जाती है। पूरे पाक में शिया मस्जिदों पर हो रहे हमलों के कारण पीओके के लोग मानसिक रूप से आतंकित हैं। दूसरी तरफ पीओके के निकट खैबूर पख्तूनख्वा प्रांत और कबाइली इलाकों में पाक फौज और तालिबानियों के बीच अकसर संघर्ष जारी रहता है, इसका असर गुलाम कश्मीर को भोगना पड़ता है। नतीजतन यहां खेती-किसानी, उद्योग-धंधे, शिक्षा-रोजगार और स्वास्थ्य-सुविधाएं तथा पर्यटन सब चैपट हैं। गोया यहां के लोग भारत की ओर ताक रहे हैं।

ब्लूचिस्तान ने 70 साल पहले हुए पाक में विलय को कभी स्वीकार नहीं किया। लिहाजा वहां अलगाव की आग निरंतर बनी हुई है। नतीजतन 2001 में यहां 50 हजार लोगों की हत्या पाक सेना ने कर दी थी। इसके बाद 2006 में अत्याचार के विरुद्ध आवाज बुलंद करने वाले 20 हजार सामाजिक कार्यकर्ताओं को अगवा कर लिया गया था, जिनका आज तक पता नहीं है। 2015 में 157 लोगों के अंग-भंग किए गए। फिलहाल पुलिस ने जाने-माने एक्टिविस्ट बाबा जान को भी हिरासत में लिया हुआ है। पिछले 16 साल से जारी दमन की इस सूची का खुलासा एक अमेरिकी संस्था ने किया है। वाॅशिगटंन में कार्यरत संस्था गिलगिट-ब्लूचिस्तान नेशनल कांग्रेस के सेंग सिरिंग ने मोदी द्वारा उठाए, इस सवाल का समर्थन किया है कि ‘पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और ब्लूचिस्तान में लोगों पर होने वाले जुल्म एवं अत्याचार के बाबत पाक को दुनिया के समक्ष जवाब देना होगा। ‘मानवाधिकार का उल्लघंन मानते हुए इस मुद्दे को मोदी संयुक्त राष्ट्र में उठाएं ऐसी अपील भी की जा रही है। मोदी द्वारा ब्लूचिस्तान के संघर्ष को लाल किले से स्वतंत्रता संघर्ष की मान्यता देने से इस संघर्ष को अब अंतरराष्ट्रिय स्तर पर स्वीकार्यता मिलने लग जाएगी।

इस बार पाक के सिंध प्रांत में रहने वाले हिंदुओं का आक्रोश भी सड़क पर उतरा है। उन्होंने मुखर होकर मीडिया के सामने अपनी पीड़ा जताई। यह जानकर हैरानी होती है कि पाक में हर साल 10 से 12 साल की 300 लड़कियां अगवा कर ली जाती हैं। इनसे जबरन कलमा पढ़वाकर धर्म परिवर्तन कराकर, मुस्लिम युवाओं से शादी रचा दी जाती है। धर्मपरिवर्तन का यह काम वहां की सत्तारुढ़ पार्टी मुस्लिम लीग के सांसद मिट्ठू मियां कर रहे हैं। मिट्ठू धर्म परिवर्तन के इतने बड़े ठेकेदार हैं कि उन पर 117 मामले दर्ज हैं। फिर भी वे खुले घूम रहे हैं। धर्म परिवर्तन के इस पूरे मामले को पाक मीडिया ने भी सिलसिलेबार उठाया था, लेकिन मिट्ठू पर सरकार ने शिकंजा कसने का जोखिम नहीं उठाया, क्योंकि मुस्लिम कट्टरपंथियों का उन्हें समर्थन प्राप्त है। ऐसे ही उपायों के चलते 1951 में जहां हिंदुओं की आबादी 22 प्रतीशत थी, वह अब घटकर महज 3 प्रतिशत रह गई है। इसी समय यहां 428 हिंदू मंदिर थे, जो घटकर अब केवल 26 रह गए हैं। केवल सिंध एक ऐसा प्रांत है, जहां 70 लाख हिंदु आबादी है। इन हालातों के मद्देनजर ही मोदी ने सर्वदलीय बैठक में कहा था कि कष्मीरी पंडितों को घाटी से विसथापित करने के पीछे भी पाकिस्तान का हाथ रहा है। एक समुदाय विशेष के विरुद्ध इस प्रकार की ज्यादती पाक प्रशिक्षित व हथियारबंद आतंकी ही कर सकते हैं। ऐसे आतंकियों के प्रति जो भी लोग सहानुभूति रखते हैं, वह कष्मीरियत अथवा इंसानियत नहीं हो सकती है।‘

पीओके समेत संपूर्ण कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग है, इस बावत पीवी नरसिंह राव सरकार द्वारा भी कड़ा रूख अपनाया गया था। तब इस सरकार ने भारतीय संसद में बाकायदा इस मकसद का प्रस्ताव पारित किया था कि पाक अधिकृत कश्मीर के साथ, वह भूभाग जो पाक ने चीन को बेच दिया है, वह भी हमारा है। लेकिन इसके बाद 15 साल केंद्रीय सत्ता पर काबिज रहीं अटलबिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह सरकारों ने इस दावे को संयुक्त राष्ट्र संघ के मंच पर उठाने की कभी हिम्मत नहीं जुटाई। अब नरेंद्र मोदी से पीओके और ब्लूचिस्तान के पीड़ित यह मांग कर रहे हैं कि उनकी पीड़ा को संयुक्तराष्ट्र में उठाया जाए, तो इस मांग को अंतरराष्ट्रिय मंच पर उठाने का यह उचित अवसर भी है। इस मौके से चूके तो फिर पाकिस्तान को उसी के जाल में फंसाना मुश्किल हो गया ?

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