लेखक परिचय

कन्हैया कुमार झा

कन्हैया कुमार झा

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भूमि हस्तांdownload (1)तरण मुद्दे पर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने में जुटी भाजपा- कांग्रेस

गुवाहाटी,। भाजपा असम के लोगों को भारत-बांग्लादेश भूमि हस्तांतरण मुद्दे पर बरगला कर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने में जुटी है। लेकिन भाजपा को यह समझना चाहिए की लोगों के सेंटिमेंट को भड़काकर भाजपा को कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है। क्योकि राज्य की जनता राजनीतिक रूप से काफी सजग है। ये बातें आज गुरुवार को असम प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी व पूर्व मंत्री रिपुन बोरा ने असम प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि आज भाजपा भूमि हस्तांतरण मुद्दे के लिए असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई को दोषी ठहराकर घड़ियाली आंसू बहा रही है। जो सही नहीं है। उन्होंने कहा कि भूमि हस्तांतरण समझौता बांग्लादेश की राजधानी ढांका में पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह की उपस्थिति में वर्ष 2011 में हुआ था। इस समझौते को लेकर भाजपा ने पूरे राज्य में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। इतना नहीं वर्तमान में केंद्र के मंत्री सर्वानंद सोनोवाल, सांसद विजया चक्रवर्ती, भाजपा के वरिष्ठ नेता एसएस अहलुवालिया के साथ ही अन्य कई वरिष्ठ नेताओं ने भारत-बांग्लादेश अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर राष्ट्रीय ध्वज फहराकर कहा था कि हम एक इंच भूमि भी बांग्लादेश को नहीं देने देंगे। लेकिन अब नरेंद्र मोदी सरकार कांग्रेस के भूमि हस्तांतरण समझौते को अक्षरसतः लागू करने जा रही है। ऐसे में उनका उस समय का विरोध महज दिखावा था। श्री बोरा ने कहा कि मोदी सरकार ने इसे लागू करने से पहले राज्यवासियों को धोखे में रखने के लिए एक कुटिल चाल चली। केबिनेट की बैठक में यह पारित किया गया कि भूमि हस्तांतरण समझौते में असम को शामिल नहीं किया जाएगा। इस बात को पूरे राज्य में बड़े ही जोरशोर से भाजपा ने उठाते हुए अपनी वाहवाही लूटी। हालांकि केंद्रीय केबिनेट ने इसे पारित करने से पहले असम के मुख्यमंत्री को विश्वास में नहीं लिया। जिसके चलते मुख्यमंत्री ने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर भूमि हस्तांतरण में असम को भी शामिल करने का आह्वान किया। भाजपा इस पत्र को लेकर हाय-तौबा मचाने लगी। इतना ही नहीं केबिनेट ने पुनः एक बैठक कर असम को फिर से उसमें शामिल कर लिया और राज्यवासियों के सामने भाजपा और उसके सहयोगी संगठनों ने चिल्लाना शुरू कर दिया कि असम को फिर से शामिल करने के पीछे सारा दोष मुख्यमंत्री का है। कांग्रेस के प्रदेश मीडिया प्रभारी ने कहा कि भाजपा भूमि हस्तांतरण मुद्दे पर राज्य के लोगों को आंदोलित कर सस्ती राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि क्या अब भाजपा का राष्ट्रीय अखंडता खंडित नहीं हो रही है। साथ ही कहा कि जब तत्कालीन प्रधानमंत्री डा. सिंह समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए ढाका जा रहे थे, उससे पहले दोनों सदनों के विपक्ष के नेता सुषमा स्वराज और अरुण जेटली को अवगत कराया था। समझौता होने के बाद भी उन्होंने भाजपा के दोनों नेताओं को फिर से अवगत कराया। उस समय भाजपा ने अपनी आपत्ति क्यों नहीं दर्ज कराई। उस दौरान भाजपा ने इस समझौते का स्वागत किया था। लेकिन आज भाजपा मुख्यमंत्री गोगोई को पत्र लिखने के नाम पर खलनायक के रूप में पेश कर रही है, लेकिन कांग्रेस भाजपा के इस कुटिल चाल को कामयाब नहीं होने देगी ।

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