लेखक परिचय

पंडित दयानंद शास्त्री

पंडित दयानंद शास्त्री

ज्योतिष-वास्तु सलाहकार, राष्ट्रीय महासचिव-भगवान परशुराम राष्ट्रीय पंडित परिषद्, मोब. 09669290067 मध्य प्रदेश

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लग्न से जानिए शरीर के रोग-रखें सावधानी और परहेज::::–

जन्मकुंडली का छठा (6) और ग्यारहवाँ (11) भाव रोग के भाव माने जाते है यानि इन भावों से हमें होने वाले रोगों की संभावित जानकारी मिल सकती है। यदि इन भाव के स्वामी अच्छी स्थिति में हो तो रोग का निदान हो जाता है या रोग होने की संभावना घट जाती है मगर यदि इन भावों के स्वामी खराब स्थिति में हो तो रोग भयंकर रूप लेते हैं और उनका निदान होना कठिन हो जाता है।

ऐसे में यदि बचपन से ही इस बारे में सावधानी और परहेज रखा जाए तो इनसे बचा जा सकता है। मेष लग्न के लिए एलर्जी, त्वचा रोग, सफेद दाग, स्पीच डिसऑर्डर, नर्वस सिस्टम की तकलीफ आदि रोग संभावित हो सकते हैं।

वृषभ लग्न के लिए हार्मोनल प्रॉब्लम, मूत्र विकार, कफ की अधिकता, पेट व लीवर की तकलीफ और कानों की तकलीफ सामान्य रोग है।

मिथुन लग्न के लिए रक्तचाप (लो या हाई), चोट-चपेट का भय, फोड़े-फुँसी, ह्रदय की तकलीफ संभावित होती है।

कर्क लग्न के लिए पेट के रोग, लीवर की खराबी, मति भ्रष्ट होना, कफजन्य रोग होने की संभावना होती है।

सिंह लग्न के लिए मानसिक तनाव से उत्पन्न परेशानियाँ, चोट-चपेट का भय, ब्रेन में तकलीफ, एलर्जी, वाणी के दोष आदि परेशानी देते हैं।

कन्या लग्न के लिए सिरदर्द, कफ की तकलीफ, ज्वर, इन्फेक्शन, शरीर के दर्द और वजन बढ़ाने की समस्या रहती है।

तुला लग्न के लिए कान की तकलीफ, कफजन्य रोग, सिर दर्द, पेट की तकलीफ, पैरों में दर्द आदि बने रहते हैं।

वृश्चिक लग्न के लिए रक्तचाप, थॉयराइड, एलर्जी, फोड़े-फुँसी, सिर दर्द आदि की समस्या हो सकती हैं।

धनु लग्न के लिए मूत्र विकार, हार्मोनल प्रॉब्लम, मधुमेह, कफजन्य रोग व एलर्जी की संभावना होती है।

मकर लग्न के लिए पेट की तकलीफ, वोकल-कॉड की तकलीफ, दुर्घटना भय, पैरों में तकलीफ, रक्तचाप, नर्वस सिस्टम से संबंधित परेशानियाँ हो सकती हैं।

कुंभ लग्न के लिए कफजन्य रोग, दाँत और कानों की समस्या, पेट के विकार, वजन बढ़ना, ज्वर आदि की संभावना हो सकती है।

मीन लग्न के लिए आँखों की समस्या, सिर दर्द, मानसिक समस्या, कमर दर्द, आलस्य आदि की समस्या बनी रह सकती है।

विशेष : यदि 6 या 11 के स्वामी हानि देने वाली स्थिति में हो तो शुरू से ही उनके मन्त्रों का जाप करना चाहिए। खान-पान की सावधानी रखना चाहिए और संबंधित वस्तुओं का दान करना चाहिए। इन ग्रहों के रत्न भूल कर भी न पहनें।

नोट : उपरोक्त प्रत्येक उपाय लाल किताब के विशेषज्ञ की सलाह अनुसार ही करें।

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किस ग्रह से कौन-सी बीमारी::::—

मनुष्य के मन, मस्तिष्क और शरीर पर मौसम, ग्रह और नक्षत्रों का प्रभाव लगातार रहता है। कुछ लोग इन प्रभाव से बच जाते हैं तो कुछ इनकी चपेट में आ जाते हैं। बचने वाले लोगों की सुदृढ़ मानसिक स्थिति और प्रतिरोधक क्षमता का योगदान रहता है। लाल किताब अनुसार हम जानते हैं कि किस ग्रह से कौन-सा रोग उत्पन्न होता है।

कुंडली का खाना नं. छह और आठ का विश्लेषण करने के साथ की ग्रहों की स्थिति और मिलान अनुसार ही रोग की स्थिति और निवारण को तय किया जाता है। प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली में यह स्थितियाँ अलग-अलग होती है। यहाँ प्रस्तुत है सामान्य जानकारी, जिसका किसी की कुंडली से कोई संबंध है या नहीं यह किसी लाल किताब के विशेषज्ञ से पूछकर ही तय किया जा सकता है।

ग्रहों से उत्पन्न बीमारी :-

1. बृहस्पति : पेट की गैस और फेफड़े की बीमारियाँ।

2. सूर्य : मुँह में बार-बार थूक इकट्ठा होना, झाग निकलना, धड़कन का अनियंत्रित होना, शारीरिक कमजोरी और रक्त चाप।

3. चंद्र : दिल और आँख की कमजोरी।

4. शुक्र : त्वचा, दाद, खुजली का रोग।

5. मंगल : रक्त और पेट संबंधी बीमारी, नासूर, जिगर, पित्त आमाशय, भगंदर और फोड़े होना।

6. बुध : चेचक, नाड़ियों की कमजोरी, जीभ और दाँत का रोग।

7. शनि : नेत्र रोग और खाँसी की बीमारी।

8. राहु : बुखार, दिमागी की खराबियाँ, अचानक चोट, दुर्घटना आदि।

9. केतु : रीढ़, जोड़ों का दर्द, शुगर, कान, स्वप्न दोष, हार्निया, गुप्तांग संबंधी रोग आदि।

रोग का निवारण :

1. बृहस्पति : केसर का तिलक रोजाना लगाएँ या कुछ मात्रा में केसर खाएँ।

2. सूर्य : बहते पानी में गुड़ बहाएँ।

3. चंद्र : किसी मंदिर में कुछ दिन कच्चा दूध और चावल रखें या खीर-बर्फी का दान करें।

4. शुक्र : गाय की सेवा करें और घर तथा शरीर को साफ-सुथरा रखें।

5. मंगल : बरगद के वृक्ष की जड़ में मीठा कच्चा दूध 43 दिन लगातार डालें। उस दूध से भिगी मिट्टी का तिलक लगाएँ।

6. बुध : 96 घंटे के लिए नाक छिदवाकर उसमें चाँदी का तार या सफेद धागा डाल कर रखें। ताँबे के पैसे में सूराख करके बहते पानी में बहाएँ।

7. शनि : बहते पानी में रोजाना नारियल बहाएँ।

8. राहु : जौ, सरसों या मूली का दान करें।

9. केतु : मिट्टी के बने तंदूर में मीठी रोटी बनाकर 43 दिन कुत्तों को खिलाएँ।

नोट : उपरोक्त प्रत्येक उपाय लाल किताब के विशेषज्ञ की सलाह अनुसार ही करें।

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जब हो दो ग्रह एक साथ -दो ग्रहों का साथ और बीमारियाँ

प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की स्थितियाँ अलग-अलग होती है। यदि कुंडली के किसी खाने में दो ग्रह एक साथ हैं तो उनसे कई बीमारियाँ हो सकती है। प्रस्तुत है उनकी सामान्य जानकारी।

कुंडली के किसी भी खाने में दो ग्रह साथ होने पर उनसे होने वाली बीमारियाँ :

1. बृहस्पति-राहु : दमा, तपेदिक या श्वास की तकलीफ।

2. बृहस्पति-बुध : दमा या श्वास की तकलीफ।

3. चंद्र-राहु : पागलपन या निमोनिया (बुखार)।

4. सूर्य-शुक्र : दमा और तपेदिक।

5. मंगल-शनि : शरीर का फटना, कोढ़, रक्त संबंधी बीमारी।

6. शुक्र-राहु : नपुंसकता, स्वप्न दोष आदि गुप्तांग संबंधी रोग।

7. शुक्र-केतु : पेशाब, धातु रोग, शुगर।

8. बृहस्पति-मंगल : पीलिया।

कुछ खास अन्य उपाय ::::—–

यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से बीमारी हो तो उसके लिए कुछ सामान्य उपायों की जानकारी भी दी गई है, लेकिन उपरोक्त और निम्न उपाय लाल किताब के जानकार से पूछकर ही करें।

1. बुखार न उतरें तो तीन दिन लगातार गुड़ और जौ सूर्यास्त से पूर्व मंदिर में रख आएँ।

2. प्रति माह गाय, कौए और कुत्तों को मीठी रोटियाँ खिलाएँ।

3. पका हुआ सीता फल कभी-कभी मंदिर में रख आएँ।

4. रक्त चाप के लिए रात को सोते समय अपने सिरहाने पानी रख कर प्रात: पौधों को दें।

5. कान की बीमारी के लिए काले-सफेद तिल सफेद और काले कपड़े में बाँधकर जंगल या किसी सुनसान जगह पर गाड़कर आ जाएँ।

6. जब भी श्मशान या कब्रिस्तान से गुजरना तो ताँबे के सिक्के उक्त स्थान पर डालने से दैवीय सहायता प्राप्त होगी।

7. यदि आँखों में पीड़ा हो तो शनिवार को चार सूखे नारियल या खोटे सिक्के नदी में प्रवाहित करें।

8. शुगर, जोड़ों का दर्द, मूत्र रोग, रीढ़ की हड्डी में दर्द के लिए काले कुत्ते की सेवा करें।

9. सिरहाने कुछ रुपए-पैसे रख कर प्रात: सफाईकर्मी को दे दें।

नोट : उपरोक्त प्रत्येक उपाय लाल किताब के विशेषज्ञ की सलाह अनुसार ही करें।

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मंगल क्रूर नहीं कल्याणकारी है–मंगल को कैसे अनुकूल बनाएँ

कोई भी व्यक्ति चाहे वह लड़की हो या लड़का, सबसे पहले आँखों के माध्यम से फीजिकल ब्यूटी की ओर एट्रैक्ट होता है। उसके बाद म्युचअल अंडरस्टैंडिंग यानी कि वैचारिक समानता और फिर सहन-सहन की समानता। परंतु क्या शादी के बंधन के लिए मात्र सुंदर शरीर और वैचारिक या रहन-सहन की समानता पर्याप्त है। नहीं….। मात्र केवल क्षणिक सौंदर्य का आकर्षण पूरे जीवन को नरक बना सकता है। आजकल बहुत कम लव मैरिज सफल होते देखी गई है।

जिस प्रकार चंद्रमा के कारण ज्वार-भाटा समुद्र में आता है, वनस्पतियों में रस चंद्रमा के कारण ही आता। ठीक उसी प्रकार सौर-मंडल के ग्रह हमें अलग-अलग रूप से प्रभावित करते हैं। अतः सावधानीपूर्वक कुंडली मिलान करके ही विवाह करना चाहिए। कहने को मंगल बड़ा क्रूर ग्रह माना गया है जबकि मंगल क्रूर नहीं, वह तो मंगलकर्ता, दुखहर्ता, ऋणहर्ता व कल्याणकारी है। मंगल दोषपूर्ण होने पर मनुष्य को अलग-अलग तरह के कष्ट होते हैं। मंगल को अनुकूल बनाने के उपाय भी अलग-अलग हैं।

 

मंगल की अनुकूलता के उपायः::::—-

– कर्ज बढ़ जाने पर ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ स्वयं करे या किसी युवा ब्राह्मण सन्यासी से कराएँ।

– जीवन में जमीन-जायदाद प्राप्त करने हेतु किसी की जमीन न दबाए और बड़े भाई की सेवा करें।

– रोग होने पर गुड़, आटा दान करें।

– क्लेश शांति हेतु लाल मसूर जल प्रवाह करें।

– विद्या प्राप्ति हेतु रेवड़ी मीठे जल में प्रवाह करें।

– मूँगा रत्न किसी श्रेष्ठ ज्योतिषाचार्य से विचार-विमर्श के बाद ही धारण करें…..

 

 

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