लेखक परिचय

ए.एन. शिबली

ए.एन. शिबली

उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी में विभिन्‍न समसामयिक मुद्दों पर निरंतर कलम चलाने वाले शिबली जी गत दस वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। दैनिक हिंदुस्तान, राष्ट्रीय सहारा, कुबेर टाइम्स, उर्दू में राष्ट्रीय सहारा, क़ौमी आवाज़, क़ौमी तंजीम आलमी सहारा, हिन्दी और उर्दू चौथी दुनिया सहित अनेक वेबसाइट्स पर लेख प्रकाशित। फिलहाल उर्दू दैनिक हिंदुस्तान एक्सप्रेस में ब्‍यूरो चीफ के पद पर कार्यरत हैं।

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ए एन शिबली

गत दिनों सुप्रीम कोर्ट ने लीव इन में रह रही महिलाओं के संबंध में एक अहम फैसला देते हुये कहा की अगर कोई पुरूष रखैल रखता है , जिसको वो गुज़ारे का खर्च देता है और मुख्य तौर पर यौन रिश्तों के लिए या नौकरानी की तरह रखता है तो यह शादी जैसा रिश्ता नहीं है। इस फैसले के बाद बहुत से लोगों को रखैल शब्द पर आपत्ति है। प्रख्यात वकील और अडिशनल सॉलीसिटर जनरल इंदिरा जय सिंह ने लिव-इन रिश्तों में रह रही महिलाओं के लिए ‘ रखैल ‘ शब्द के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है की फैसले में इस्तेमाल किया गया रखैल शब्द बेहद आपत्तिजनक है और इसे हटाए जाने की जरूरत है। जयसिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट 21वीं सदी में किसी महिला के लिए ‘ रखैल ‘ शब्द का इस्तेमाल आखिर कैसे कर सकता है? क्या कोई महिला यह कह सकती है कि उसने एक पुरुष को रखा है?
यह सही है की कोई महिला यह नहीं कहेगी की उसने पुरूष रखा हुआ है मगर इस सच्चाई से इंकार नहीं किया जा सकता की जिस प्रकार पुरूष महिला को बिना शादी के साथ में रखते हैं उसी प्रकार महिलायें भी पुरूष को बिना शादी के अपने साथ रखती हैं। अब इस के बाद एक अहम सवाल यह पैदा हो गया है और इस पर बहस की ज़रूरत है की ऐसी महिलाओं के लिए रखैल शब्द का प्रयोग उचित कियून नहीं है। यह अलग बात है की कानून के मुताबिक कोई भी बालिग लिव इन में रह सकता है या रह सकती है। मगर क्या भारत जैसे देश में इस रिश्तों को सही माना जाएगा या सही माना जाना चाहिए। कोई भी धर्म ऐसा नहीं हैं जिसमें बिना शादी के महिला और पुरूष को एक पति पत्नी की तरह रहने और शारीरिक संबंध बनाने की इजाज़त देता है। इस के बावजूद यदि कोई ऐसा करता है तो उसे बुरी नज़र से कियून नहीं देखा जाए। ऐसा नहीं हैं रखैल शब्द सिर्फ महिलाओं के लिए ही है यदि कोई पुरूष किसी महिला के साथ बिना शादी के रह रहा है और शारीरिक संबंध बना रहा है तो उसके लिए भी यही शब्द इस्तेमाल होना चाहिए। यह कहना की 21 वीं सदी में किसी महिला के लिए रखैल शब्द का इस्तेमाल सही नहीं है बेकार की बात है। यह 21 वीं सदी है, देश तरक़्क़ी कर रहा है, महिलायें भी जीवन के विभिन्न मैदानों में आगे बढ़ रही हैं इसका मतलब यह नहीं है की वो बिना शादी के किसी पुरूष के साथ पति पत्नी की तरह रहें। ईमानदारी की बात यह है और सच्चाई भी इसी में है की जो कोई महिला या पुरूष इस तरह लीव इन में रहता है या रहती वो सिर्फ और सिर्फ ऐसा मज़े के लिए और जिम्मेदारियों से भागने के लिए करता है। इस प्रकार के रिश्तों में रहने वालों के लिए नैतिकता की बात करना बेमानी है। यह इंसान की फितरत है और इस लिए एक लड़का और लड़की में पियार मुमकिन है ऐसे में यदि उन दोनों को साथ रहना है और दोनों बालिग हैं तो फिर उनके लिए शादी एक बेहतरीन तरीका है। ऐसे लड़के या लड़कियां शादी जैसे पवित्र बंधन में बांधने से कियून भागते है। अगर कोई शादी से भागता है तो इसका मतलब यह है की शादी के बाद आने वाली जिम्मेदारियों से भाग रहा है। और जो लोग समाज से भागते हों , सामाजिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों से भागते हों ऐसे लोगों के साथ हमदर्दी किस बात की। एक आसान सी बात है जो हर किसी को समझना चाहिए की बिना शादी के शारीरिक संबंध बनाना ग़लत है और इसे ग़लत माना जाना चाहिए। जब बिना शादी के शारीरिक संबंध बनाने को ग़लत माना जाता है तो फिर लीव ईन में रहने और हर प्रकार के मज़े करने की जितनी भी निंदा की जाये कम है। जो लोग इस प्रकार के रिश्ता रखने वालों का साथ देते हैं, उनके साथ हमदर्दी रखते हैं और उनके हक़ की लड़ाई लड़ते हैं वो दरअसल भारत की संस्कृति के साथ मज़ाक करते हैं। मेरी जितनी समझ है उस से मुझे लगता है की लीव इन वेस्टर्न मुल्कों में फैली एक बुराई है जो अब बड़ी तेज़ी से भारत में भी फैलती जा रही है यदि ऐसे रिश्तों की निंदा नहीं की गयी तो धीरे धीरे शादी का सिस्टम ही खत्म हो जाएगा और पार्टनर बादल बदल कर मज़ा बदलने का रिवाज भी बढ्ने लगेगा.

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12 Comments on "लीव इन में रहने वाली महिला रखैल नहीं तो और क्या?"

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nisharam
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Dear sir I want to know that if a person who is facing a article 489a in court can that man can live in relationship

इक़बाल हिंदुस्तानी
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Koee stree livein me rehti hai to ye uska qanooni adhikaar hai. Usko rkhel nhi kahaa ja skta kyonki purush bhi aise me usi haisiyt me hota hai jisme mahilaa rehti hai. Rhi dhrm aur snskriti ki baat uska dhong aur dava bahut ho chuka sb maamlo me ye nhi chl skta. Asli baat ye hai ke chnd logon ke cheekhne chillane se ye rukne vala nhi hai. Hm logon ne yoorup aur america ke tmaam taur treeqe apna liye hai baqi bhi aakr rhenge aap kuchchh bhi krlo. Ek misal velentineday ke baare me dekhi jaa skti hai snskriti… Read more »
RTyagi
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इकबाल भाई, आपकी मानसकिता समझ से परे हैं…. अमेरिका और यूरोप में तो पार्टनर बदल-बदल कर रहना, मुक्त सेक्स, खुला देह, बिना शादी के बच्चे आदि प्रचलित हैं… तो क्या … अन्य तथाकथित अल्पसंख्यक धर्म भी अपनी संस्कृति (जिसे आप कह रहे हैं की ढोंग है) छोड़ कर अपनाने के लिए तैयार हैं… या उसका विरोध करेंगे??…और अगर है तो कब से..?? फतवे क्या हैं….?? उस पर कोई फ़तवा निकलेगा या नहीं..? क्या अगर कोई चीज गलत है.. और हमारा धर्म संस्कृति के अनुरूप नहीं है.. तो उसका विरोध सिर्फ ढोंग होता हैं… या उसका विरोध नहीं करना चाहिए…पता नहीं…… Read more »
Sushant Singhal
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यदि आप मानवेतर प्राणियों में देखें तो पायेंगे कि वहां पर हर मादा को पूरी स्वतंत्रता है कि वह किसी भी नर-पशु से संबंध बनाये। यही स्वाभाविक भी है। इसके बावजूद मानव जाति ने सभ्यता के विकास के साथ-साथ विवाह संस्था को जन्म दिया है तो उसके अनेक महत्वपूर्ण कारण हैं। सभ्य मानव समाज में बच्चों के लालन – पालन की जिम्मेदारी अकेली महिला नहीं उठाती बल्कि पति – पत्नी मिल कर यह जिम्मेदारी उठाते हैं। भारत जैसे देश में तो पूरा संयुक्त परिवार आने वाले बच्चे की जिम्मेदारी उठाता है और लालन-पालन में बच्चे के माता-पिता के साथ पूरा… Read more »
RTyagi
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सुशांत सिंघल्जी, बिलकुल सही कहा सर अपने …

..और …इसी में इकबाल भाई के लिए रही सहा जवाब भी छुपा है….वशर्ते अगर वो तथ्यों को खुल कर स्वीकार करतें हो…

नमन.
आर त्यागी

shrikant upadhayay
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प्रिय शिबली जी मै आपके बात से सहमत हु लेकिन एक सर्त के साथ की पुरषों को भी रखैल जैसे सरतो के साथ …क्योकि जो आदमी या ओरत यदि सादी पूर्व दैनिक जीवन में पति पत्नी की तरह रहने लगे ओभी बिना किसी पारिवारिक जिमेदारी को निभाए ओ कभी भी सादी सुदा जीवन में अपने लाइफ पार्टनर के साथ इमानदार नहीं हो सकते और ऐसे लोग अपने साथ दो परिवार को भी नरक में धकेलने से कभी बाज नहीं आयेंगे ऐसे में उन सारे लोग जो पुरुष हो या स्त्री इन्हें समाज में अश्लील उद्बोधन के माध्यम से जलील कर… Read more »
डॉ. राजेश कपूर
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कुछ लोग मजाक पसंद होते हैं, अछा मजाक कर लेते हैं; पर चुटकुलों से गंभीर मसलों का समाधान तो नहीं होता. स्त्रियों के सम्मान की बात करने वाले शायद अपनी बात को लेकर गंभीर नहीं. वरना वे अंतर्विरोधी बातें न करते. एक तरफ तो वेश्याओं जैसे जीवन को जीने यानी लिव इन रिलेशन का समर्थन और साथ ही स्त्रियों के सम्मान की बात. बड़ा क्रूर और बुद्धी हीनता से भरा मजाक है. बल्कि ये कहना होगा कि औरतों के सम्मान के साथ बलात्कार है. अरे भाई स्त्रियों के सम्मान की अगर चमुच चिंता है तो उन्हें चरित्रवान बनने और विधिवत… Read more »
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